अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा बढ़ी महंगाई; ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से सोने-चांदी पर दबाव

खबर सार :-

अमेरिकी महंगाई अपेक्षा से अधिक रहने के कारण फेड की सख्त नीतियों की आशंका बढ़ गई है, इस कारण सोने और चांदी पर दबाव भी बना है। ऊंची ब्याज दरें कीमती धातुओं की निवेश मांग को कमजोर कर सकती हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और तेल आपूर्ति संबंधी जोखिम सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में सहारा दे सकते हैं। इसलिए निकट भविष्य में सोने की दिशा फेड के फैसले और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी।
महंगाई बढ़ी तो सोना हुआ फीका, फेड की सख्ती से पीछे हटे निवेशक

खबर विस्तार : -

US Inflation Fed Rate: अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़े सामने आने के बाद वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव अधिक बढ़ गया है। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की संभावना ने सोने जैसी बिना ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों की मांग को बहुत अधिक प्रभावित किया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,340 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया। दिन के कारोबार में इसमें लगभग 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले पिछले सप्ताह सोने की कीमत कुल मिलाकर करीब 1.8 प्रतिशत कमजोर हुई थी। इतना ही नहीं चांदी भी लगभग 0.8 प्रतिशत फिसलकर 64 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई। इसके अलावा प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली।

घरेलू बाजार में शाम के सत्र पर नजर

भारत में गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोमवार को एमसीएक्स के सोना और चांदी वायदा बाजार का सुबह का सत्र बंद रहा। कारोबार शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक होने की जानकारी दी गई है। एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा करीब 1,52,655 रुपये प्रति 10 ग्राम और सितंबर डिलीवरी वाली चांदी लगभग 2,34,886 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही। बाजार की नजर अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी नीति बैठक पर टिकी है। निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि महंगाई के दबाव को देखते हुए फेड आगे ब्याज दरों को किस दिशा में ले जाता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि सोना नियमित ब्याज या आय नहीं देता। ऐसे माहौल में निवेशक ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों को अधिक आकर्षक मान सकते हैं।

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कोर महंगाई ने बढ़ाई चिंता

शुक्रवार को जारी अमेरिकी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य और ऊर्जा कीमतों को अलग रखकर मापी जाने वाली कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अगस्त में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़ी। यह बाजार की उम्मीद से अधिक रही। आंकड़ों ने संकेत दिया कि अमेरिका में महंगाई का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। महंगाई के इन आंकड़ों के बाद बाजार में यह धारणा मजबूत हुई कि फेडरल रिजर्व मौद्रिक नीति को और सख्त कर सकता है। कारोबारियों के अनुमान में सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 88 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यदि फेड दरों में वृद्धि करता है और भविष्य के लिए भी सख्त रुख का संकेत देता है, तो सोने पर आगे भी दबाव बना रह सकता है।

महंगा तेल बढ़ा सकता है महंगाई का जोखिम

इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री आपूर्ति मार्गों को लेकर जोखिम ने कच्चे तेल की कीमतों को भी प्रभावित किया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधान से वैश्विक ऊर्जा कीमतों और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में हौथी बलों के महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर कब्जे और होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन हमलों तथा एक व्यापारिक पोत पर हमले ने समुद्री व्यापार को लेकर जोखिम बढ़ाया है। इन घटनाओं के बाद सऊदी अरब द्वारा अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे घटनाक्रमों से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बाजार की चिंता बढ़ा रही है।

फेड का फैसला तय करेगा सोने की अगली चाल

विश्लेषकों के मुताबिक, यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इससे वैश्विक महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं। इसका असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में कुछ समर्थन दे सकती है। इसलिए आने वाले दिनों में बाजार की दिशा दो प्रमुख कारकों से तय होगी-अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दर संबंधी फैसला और कच्चे तेल की कीमतों का रुख। निवेशक इन दोनों संकेतों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल).....

1. सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई?

अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़ों के बाद फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका बढ़ी, जिससे सोने पर दबाव आया।

2. ऊंची ब्याज दरों का सोने पर क्या असर होता है?

ऊंची ब्याज दरों से ब्याज देने वाली परिसंपत्तियां आकर्षक होती हैं, जबकि सोना ब्याज नहीं देता। इससे सोने की मांग घट सकती है।

3. आगे सोने की कीमत किस पर निर्भर करेगी?

अमेरिकी फेड के ब्याज दर फैसले, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव से सोने की दिशा प्रभावित होगी।

 

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