Wholesale Inflation में बड़ा उछाल: मई में WPI 9.68% पर पहुंची, सरकार ने लॉन्च की नई मूल्य सूचकांक प्रणाली
खबर सार :-
सरकार द्वारा 2022-23 आधार वर्ष के साथ नई डब्ल्यूपीआई सीरीज लागू करना भारतीय मूल्य मापन प्रणाली में बड़ा सुधार माना जा रहा है। मई में 9.68 प्रतिशत की थोक महंगाई ने ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ते लागत दबाव को उजागर किया है। नई प्रणाली से महंगाई, उत्पादन लागत और आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक विश्लेषण संभव होगा, जिससे नीतिगत निर्णयों को मजबूती मिलेगी।
खबर विस्तार : -
Wholesale Inflation May 2026: देश में महंगाई के आकलन और उत्पादक कीमतों की निगरानी के तरीके में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने सोमवार को संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) सीरीज लॉन्च कर दी। इसके साथ ही मई 2026 के लिए थोक महंगाई के आंकड़े भी जारी किए गए, जिनके अनुसार डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई दर 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई। सरकार ने 2011-12 आधार वर्ष वाली पुरानी सीरीज को बदलकर 2022-23 को नया आधार वर्ष घोषित किया है। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करने और वैश्विक मानकों के अनुरूप मूल्य मापन प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, नई डब्ल्यूपीआई सीरीज देश में उत्पादक मूल्य मापन प्रणाली को आधुनिक बनाने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके तहत केवल थोक मूल्य सूचकांक ही नहीं, बल्कि आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (ओपीपीआई), ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (आईपीपीआई) और सात प्रमुख सेवा क्षेत्रों के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) की नई श्रृंखला भी जारी की गई है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नई व्यवस्था
मंत्रालय ने बताया कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की सिफारिशों और वैश्विक सांख्यिकीय मानकों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। उत्पादक मूल्य सूचकांक प्रणाली को अपनाने से उत्पादन लागत, औद्योगिक गतिविधियों और मूल्य परिवर्तनों की अधिक व्यापक तस्वीर सामने आएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपयोगकर्ताओं, उद्योगों और शोधकर्ताओं को नई प्रणाली के अनुरूप ढलने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। इसी उद्देश्य से डब्ल्यूपीआई की पुरानी और नई प्रणाली को संक्रमण काल में समानांतर रूप से संचालित किया जाएगा तथा नई सीरीज कम से कम पांच वर्षों तक जारी रहेगी।

ईंधन और बिजली श्रेणी ने बढ़ाया महंगाई का दबाव
मई में जारी आंकड़ों के अनुसार, सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक बढ़कर 109.9 पर पहुंच गया। महंगाई बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान ईंधन एवं बिजली श्रेणी का रहा, जहां महंगाई दर लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह संकेत देता है कि ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी का असर विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ रहा है। प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर भी मई में बढ़कर 4.99 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर 7.48 प्रतिशत रही, जो औद्योगिक क्षेत्र में लागत दबाव को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा और कच्चे माल की बढ़ती कीमतें उद्योगों के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
इन क्षेत्रों ने बढ़ाई Wholesale inflation
मंत्रालय के अनुसार, खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद तथा बेसिक मेटल्स जैसे क्षेत्रों ने थोक महंगाई को ऊपर ले जाने में प्रमुख भूमिका निभाई। इन वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का असर उत्पादन लागत और आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ा है। हालांकि खाद्य क्षेत्र में स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रित रही। मई में डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स के तहत खाद्य महंगाई दर 4.49 प्रतिशत दर्ज की गई। यह दर कुल थोक महंगाई की तुलना में काफी कम रही, जिससे खाद्य क्षेत्र में कीमतों के दबाव को सीमित माना जा रहा है।
957 वस्तुओं तक बढ़ा WPI बास्केट
नई सीरीज के तहत थोक मूल्य सूचकांक (WPI) बास्केट का दायरा काफी विस्तृत किया गया है। पहले जहां इसमें 697 वस्तुएं शामिल थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में उभरते नए उत्पादों और उद्योगों को भी मूल्यांकन प्रणाली में शामिल किया जा सकेगा। ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहली बार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा से उत्पादित बिजली को डब्ल्यूपीआई बास्केट में शामिल किया गया है। इससे देश की बदलती ऊर्जा संरचना और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते महत्व को मान्यता मिली है। इसके अलावा, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी से हटाकर ईंधन एवं ऊर्जा श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का अधिक सटीक आकलन संभव होगा।
नई तकनीक से तैयार होंगे सूचकांक
संशोधित पद्धति में वस्तुओं का वेटेज तय करने के लिए ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट (जीवीओ) को आधार बनाया गया है। साथ ही कीमतों की अनुपलब्धता जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आधुनिक सांख्यिकीय तकनीकों को अपनाया गया है। मई में सभी वस्तुओं के लिए नया आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (ओपीपीआई) 109.6 दर्ज किया गया, जबकि विनिर्माण क्षेत्र के लिए ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (आईपीपीआई) 104.9 रहा। ये आंकड़े उत्पादन लागत और औद्योगिक गतिविधियों की दिशा समझने में मदद करेंगे।
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