फास्टैग एनुअल पास ने पार किया एक करोड़ यूजर्स का आंकड़ा, तेजी से हुआ लोकप्रिय
खबर सार :-
फास्टैग एनुअल पास ने एक करोड़ यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। 3,075 रुपये में एक साल या 200 टोल क्रॉसिंग की सुविधा मिलती है। जानें वनटैग और फास्टैग से जुड़ी जानकारी।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने सोमवार को बताया कि फास्टैग एनुअल पास ने लॉन्च के बाद बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एक करोड़ उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा पार कर लिया है। सरकार की ओर से शुरू की गई यह सुविधा राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस पास के जरिए वाहन मालिकों को बार-बार फास्टैग रिचार्ज कराने की जरूरत नहीं पड़ती और निर्धारित शुल्क के भुगतान के बाद टोल भुगतान की प्रक्रिया आसान हो जाती है। फास्टैग एनुअल पास की शुरुआत पिछले वर्ष 15 अगस्त को की गई थी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, यह वार्षिक पास देशभर के करीब 1,150 टोल प्लाजा पर लागू है। इनमें राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे भी शामिल हैं।
3,075 रुपये में एक साल या 200 टोल क्रॉसिंग
फास्टैग एनुअल पास के तहत वाहन मालिकों को एकमुश्त 3,075 रुपये का भुगतान करना होता है। इसके बाद पास एक वर्ष या 200 टोल क्रॉसिंग, जो भी पहले पूरा हो, तक वैध रहता है। सरकार के अनुसार यह सुविधा विशेष रूप से उन वाहन चालकों के लिए उपयोगी है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित रूप से यात्रा करते हैं। बार-बार टोल भुगतान करने के बजाय एकमुश्त शुल्क के माध्यम से यात्रा की सुविधा मिलने से टोल भुगतान की प्रक्रिया सरल हो जाती है।
गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए उपलब्ध
मंत्रालय ने बताया कि फास्टैग एनुअल पास सभी गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए उपलब्ध है। इसके लिए वाहन में वैध फास्टैग लगा होना जरूरी है। वाहन मालिक को राजमार्ग यात्रा ऐप के माध्यम से निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होता है। भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एनुअल पास वाहन से जुड़े मौजूदा फास्टैग पर ही सक्रिय हो जाता है। इसके लिए अलग से नया फिजिकल फास्टैग लेने की आवश्यकता नहीं होती। सरकार का कहना है कि इस सुविधा को मिल रही बढ़ती स्वीकृति से पता चलता है कि वाहन चालक राष्ट्रीय राजमार्गों पर अधिक सुविधाजनक और किफायती यात्रा के विकल्पों को अपना रहे हैं। एनुअल पास के कारण टोल भुगतान में लगने वाला समय कम करने और यात्रा को अधिक सुगम बनाने में भी मदद मिल रही है।
‘वनटैग’ से बैंक बदलने की सुविधा
फास्टैग व्यवस्था को और सुविधाजनक बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पिछले महीने ‘वनटैग’ सुविधा भी शुरू की। यह फास्टैग पोर्टेबिलिटी सेवा है, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता अपने वाहन पर लगे मौजूदा फास्टैग को बदले बिना उसका जारीकर्ता बैंक बदल सकते हैं। इस सुविधा का फायदा यह है कि बैंक बदलने के लिए वाहन मालिक को नया फिजिकल फास्टैग लेने की जरूरत नहीं होगी। मौजूदा टैग को ही पोर्ट कर नए जारीकर्ता बैंक के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा।
13 करोड़ के करीब पहुंची फास्टैग की पहुंच
मंत्रालय के अनुसार देश में फास्टैग की पहुंच अब 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। फास्टैग उपयोगकर्ताओं की संख्या भी करीब 13 करोड़ तक पहुंच गई है। फास्टैग के इस्तेमाल ने देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली को काफी बदल दिया है। टोल प्लाजा पर कैश भुगतान की आवश्यकता कम होने के साथ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा मिला है। सरकार के अनुसार इससे टोल संग्रह में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में भी मदद मिली है।
कैसे काम करता है वनटैग?
वनटैग सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए फास्टैग उपयोगकर्ता को राजमार्ग यात्रा ऐप में लॉग-इन करना होगा। इसके बाद वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करके पात्रता की जांच की जा सकती है। पात्रता की पुष्टि होने के बाद मौजूदा जारीकर्ता बैंक की ओर से उपयोगकर्ता के मोबाइल नंबर पर 6 अंकों का मोबाइल वेरिफिकेशन कोड (MVC) भेजा जाएगा। कोड के माध्यम से सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपयोगकर्ता अपनी पसंद का नया जारीकर्ता बैंक चुन सकता है। इसके बाद आवश्यक केवाईसी प्रक्रिया और वॉलेट ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहन पर मौजूद फास्टैग को ही नए जारीकर्ता बैंक के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा।
डिजिटल टोलिंग को बढ़ावा देने पर जोर
केंद्र सरकार का कहना है कि फास्टैग एनुअल पास और वनटैग जैसी सुविधाएं देश की डिजिटल टोलिंग व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद करेंगी। एक तरफ एनुअल पास नियमित हाईवे यात्रियों के लिए टोल भुगतान को आसान बनाता है, वहीं वनटैग सुविधा फास्टैग उपयोगकर्ताओं को बैंक बदलने की अधिक सुविधा देती है। सरकार के मुताबिक डिजिटल टोलिंग व्यवस्था का विस्तार होने से हाईवे यात्रियों को अधिक सुविधा और लचीलापन मिलेगा। साथ ही टोल प्लाजा पर भुगतान की प्रक्रिया को तेज और अधिक व्यवस्थित बनाने में भी मदद मिलेगी।
एक करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं तक पहुंच बना चुका फास्टैग एनुअल पास अब राष्ट्रीय राजमार्गों पर डिजिटल टोल भुगतान व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। आने वाले समय में ऐसी डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से हाईवे यात्रियों के लिए यात्रा और टोल भुगतान की प्रक्रिया को और सरल बनाने पर जोर दिया जा सकता है।
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