ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर पार, अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ा सप्लाई संकट, महंगाई का खतरा गहराया

खबर सार :-

ब्रेंट क्रूड का 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा संकेत है। अमेरिका-ईरान तनाव, खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति जोखिम, चीन की मजबूत खरीदारी और सऊदी अरब के घटते उत्पादन ने कीमतों को सहारा दिया है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो तेल, गैस और डीजल महंगे हो सकते हैं, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने और आर्थिक वृद्धि प्रभावित होने का खतरा है।
ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी टेंशन

खबर विस्तार : -

Brent Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में गुरुवार को तेज उछाल देखने को मिला। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके अलावा चीन की मजबूत तेल खरीदारी और सऊदी अरब के उत्पादन में भारी गिरावट ने भी कीमतों को ऊपर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड वायदा कीमत में करीब 2.63 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। इससे पहले पिछले सत्र में ब्रेंट 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया था। जुलाई के बाद पहली बार इस स्तर के ऊपर पहुंचने के बाद अब वैश्विक बेंचमार्क मई के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है।

लंबा चला संघर्ष तो बढ़ेगी महंगाई

तेल की कीमतों में इस तेजी ने दुनियाभर में ऊर्जा महंगाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो कच्चे तेल के साथ प्राकृतिक गैस और डीजल जैसी ऊर्जा वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बना रह सकता है। इसका सीधा असर वैश्विक महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि तेल आपूर्ति में किसी बड़ी बाधा से बाजार में उपलब्धता घट सकती है। ऐसी स्थिति में मांग और आपूर्ति के संतुलन पर असर पड़ने से कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार सहमा

पिछले एक सप्ताह में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ा है। अपेक्षाकृत शांत अवधि के बाद दोनों देशों के बीच टकराव तेज हुआ है और फिलहाल तत्काल सुधार के संकेत कम दिखाई दे रहे हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि तेहरान अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के आगे झुकने वाला नहीं है। यदि अमेरिका ईरानी क्षेत्र पर हमले जारी रखता है, तो जवाबी कार्रवाई और तेज की जा सकती है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि संघर्ष नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद तक जारी रह सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पेट्रोल की कीमतों में निकट भविष्य में बड़ी राहत मिलना मुश्किल हो सकता है। इन बयानों ने बाजार में लंबे समय तक आपूर्ति दबाव बने रहने की आशंका को मजबूत किया है।

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अगस्त के निचले स्तर से 30% चढ़ा ब्रेंट

आंकड़ों पर गौर करें तो, अगस्त की शुरुआत में दर्ज निचले स्तरों की तुलना में ब्रेंट क्रूड की कीमतें अब करीब 30 प्रतिशत ऊपर आ चुकी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समझौते की कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। अगस्त के अंत में संघर्ष दोबारा तेज होने के बाद खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरी हुई। बाजार में तेजी का एक और प्रमुख कारण चीन की मजबूत खरीदारी है। दुनिया के प्रमुख तेल उपभोक्ताओं में शामिल चीन की मांग में मजबूती से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिला है।

सऊदी अरब का तेल उत्पादन भी घटा

तेल बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक और अहम घटनाक्रम सऊदी अरब के उत्पादन में तेज गिरावट है। गुरुवार को प्रकाशित ओपेक की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में सऊदी अरब का तेल उत्पादन घटकर 62 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। यह 2026 का सबसे निचला मासिक स्तर है और जुलाई की तुलना में करीब 23 प्रतिशत कम है। उत्पादन में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के पश्चिमी तट से होने वाली तेल आपूर्ति को निशाना बनाने की धमकी दी है। हूती गतिविधियों में बढ़ोतरी से सऊदी अरब के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाले निर्यात मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। ऐसे में बाजार की नजर अमेरिका-ईरान संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, सऊदी उत्पादन और चीन की मांग पर बनी रहेगी। यदि तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)....

1. ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार क्यों पहुंचा?

अमेरिका-ईरान के बढ़ते तनाव, वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंका, चीन की मजबूत खरीदारी और सऊदी अरब के घटते उत्पादन से ब्रेंट क्रूड में तेजी आई।

2. अमेरिका-ईरान संघर्ष का तेल बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?

लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने पर खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल संभव है।

3. सऊदी अरब का तेल उत्पादन कितना घटा है?

ओपेक की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में सऊदी अरब का उत्पादन घटकर 62 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो जुलाई से करीब 23% कम है।

4. महंगे कच्चे तेल का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

तेल महंगा होने से पेट्रोल, डीजल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास प्रभावित होने का जोखिम है।

 

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