UPI ने बदली भारत में पेमेंट की तस्वीर, 5.8 अरब डॉलर की फंडिंग से ग्लोबल हुआ डिजिटल भुगतान बाजार

खबर सार :-

भारत का डिजिटल भुगतान क्षेत्र यूपीआई के दम पर वैश्विक महाशक्ति बन चुका है, 371 इक्विटी फंडिंग राउंड में 5.8 अरब डॉलर का निवेश इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे ने न केवल देश को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि उपभोक्ता और फिनटेक ऐप्स के लिए एक मजबूत निजी इकोसिस्टम भी तैयार किया है। जो भारतीय फिनटेक नवाचार और आर्थिक प्रगति को वैश्विक मंच पर एक नई और मजबूत पहचान दे रहा है।
UPI से पेमेंट सेक्टर को बूस्ट, 371 फंडिंग राउंड में जुटे $5.8 अरब

खबर विस्तार : -

India Digital Payments: देश का डिजिटल भुगतान क्षेत्र तेजी से ग्लोबल बनता जा रहा है। इस क्षेत्र में वर्ष 2021 से अब तक 371 घोषित इक्विटी फंडिंग राउंड के जरिए करीब 5.8 अरब डॉलर का निवेश आ चुका है। यह निश्चित तौर पर देश के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम पर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाता है। मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैकसन की “द इंडिया पेमेंट्स लैंडस्केप: हाउ यूपीआई मेड इंडिया सेल्फ-रिलायंट इन पेमेंट्स” शीर्षक वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि सार्वजनिक डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे ने एक मजबूत निजी क्षेत्र के इकोसिस्टम को विकसित करने में काफी मदद की है। इसमें उपभोक्ता भुगतान ऐप, कारोबारी भुगतान प्लेटफॉर्म और फिनटेक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने वाली कंपनियां शामिल हैं।

भुगतान प्लेटफॉर्म को निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा

रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता-केंद्रित भुगतान प्लेटफॉर्म को निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा मिला। इन्हें कुल फंडिंग का करीब 53 प्रतिशत यानी लगभग 3.1 अरब डॉलर प्राप्त हुए हैं। इतना ही नहीं, कारोबारी भुगतान कंपनियों को करीब 38 प्रतिशत फंडिंग मिली, जबकि भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर और एपीआई आधारित सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को शेष 9 प्रतिशत यानी लगभग 526 मिलियन डॉलर मिले हैं।

6 वर्षों में 8 आईपीओ और 25 अधिग्रहण

रिपोर्ट के अनुसार, “भुगतान कंपनियों ने जनवरी 2021 से अब तक 371 घोषित इक्विटी राउंड में 5.8 अरब डॉलर जुटाए हैं। इस दौरान आठ आईपीओ और 25 अधिग्रहण हुए हैं। हालांकि, कुछ अच्छी तरह से फंडिंग प्राप्त कंपनियों के इर्द-गिर्द क्षेत्र में एकीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई है।” तकनीकी निवेश में तेजी के दौर के बीच वर्ष 2021 में तो फंडिंग गतिविधियां अपने चरम पर पहुंच गई थीं। इसके बाद 2022 से 2024 के बीच व्यापक फंडिंग मंदी के कारण निवेश की रफ्तार धीमी हो गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस क्षेत्र में परिपक्वता बढ़ रही है और कंपनियां अब निकासी के अवसर पैदा करने और पूंजी को दोबारा निवेश करने लगी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से भारत के भुगतान उद्योग में आठ प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और 25 अधिग्रहण हुए हैं।

सीमा-पार यूपीआई लेनदेन में बढ़ोतरी

ट्रैकसन की रिपोर्ट में यूपीआई के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विस्तार का भी जिक्र किया गया है। आंकड़ों पर गौर करें तो, सीमा-पार यूपीआई लेनदेन वित्त वर्ष 2024 में करीब 37,000 से 20 गुना से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 7.5 लाख से अधिक हो गया है। वहीं, अब यह भुगतान नेटवर्क एक दर्जन से अधिक देशों में संचालित हो रहा है। एनपीसीआई इंटरनेशनल ने मौजूदा भुगतान प्रणालियों को जोड़ने, साझेदार देशों के लिए भुगतान नेटवर्क तैयार करने और तकनीकी मानकों को साझा करने समेत कई मॉडलों के जरिए यूपीआई का वैश्विक विस्तार किया है। जो निश्चित तौर उसकी लोकप्रियता और विश्वसनीयता को दर्शाता है। देश और दुनिया के अनेकों देश भुगतान की इस डिजिटल प्रणाली को अपने यहां लागू करना चाहते हैं।

ये भी पढ़ें.....भारत के UPI को साइप्रस में मिली एंट्री, एनपीसीआई और यूरोबैंक के बीच हुआ समझौता

भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार

 आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार अब केवल सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव भी भुगतान प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं। डिजिटल पेमेंट में बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन जैसी तकनीकें साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ धोखाधड़ी के जोखिम को भी कम करती हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता इस विकल्प को अपना रहे हैं। यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड के लिए भी बायोमेट्रिक भुगतान की सुविधा उपलब्ध होने से क्रेडिट आधारित डिजिटल भुगतान को नई गति मिली है। अब ग्राहक बिना यूपीआई पिन डाले केवल फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सहज और तेज हो गई है। एनपीसीआई का मानना है कि आने वाले महीनों में बायोमेट्रिक आधारित यूपीआई भुगतान का दायरा और बढ़ेगा। अधिक बैंक, फिनटेक कंपनियां और डिजिटल भुगतान एप इस सुविधा को अपनाएंगी, जिससे डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत होगा। सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच यह तकनीक डिजिटल वित्तीय समावेशन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

ये भी पढ़ें....UPI का नया रिकॉर्ड: बायोमेट्रिक पेमेंट ने पकड़ी रफ्तार, जून में 61 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन

 

अन्य प्रमुख खबरें