IRDAI का नया कमीशन कैप प्रस्ताव, मोटर-हेल्थ समेत बीमा डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पर असर
खबर सार :-
IRDAI के प्रस्तावित नियम लागू होने पर बीमा वितरण में कमीशन आधारित मॉडल से ग्राहक-केंद्रित और डिजिटल व्यवस्था की ओर बदलाव तेज हो सकता है। मोटर, हेल्थ और जनरल इंश्योरेंस में भुगतान सीमित होने से डिस्ट्रीब्यूटर्स के मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम प्रभाव नियमों के अंतिम स्वरूप और संक्रमण व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
खबर विस्तार : -
Insurance Regulations: बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के प्रस्तावित नए नियम देश के इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बड़ा संरचनात्मक बदलाव ला सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था का फोकस पॉलिसीधारकों की लागत घटाने, कमीशन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और गलत तरीके से पॉलिसी बेचने पर रोक मजबूत करने पर है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलाव लागू होने पर ग्राहकों के लिए बीमा खरीदने के विकल्प बढ़ सकते हैं, जबकि बैंक-एश्योरेंस पार्टनर, एनबीएफसी, ऑटोमोबाइल डीलर और अन्य डिस्ट्रीब्यूटर्स के मौजूदा मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
IRDAI के कंसल्टेशन पेपर में इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए आसान तीन-स्तरीय ढांचे का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत अलग-अलग इंश्योरेंस प्रोडक्ट के आधार पर कमीशन और भुगतान की सीमा तय करने की दिशा में बदलाव सुझाए गए हैं। इसका उद्देश्य डिस्ट्रीब्यूशन की लागत और ग्राहकों से जुड़ी पारदर्शिता को बेहतर बनाना है।
मोटर इंश्योरेंस में बड़ा बदलाव प्रस्तावित
कंसल्टेशन पेपर में नई गाड़ियों के मोटर इंश्योरेंस के लिए कमीशन या भुगतान की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। थर्ड-पार्टी प्रीमियम के लिए भुगतान शून्य और खुद के नुकसान तथा संबंधित कवर के लिए 5 प्रतिशत तक भुगतान का सुझाव दिया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था में टेक्नोलॉजी, जागरूकता और संबंधित खर्चों को भी कमीशन सीमा के दायरे में लाने की बात कही गई है। साथ ही, मौजूदा मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर (MISP) व्यवस्था की जगह व्यापक इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी (IDE) सिस्टम लाने का प्रस्ताव है।
शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर शैलजा लाल के मुताबिक, इसका ऑटोमोबाइल डीलरों, ओईएम से जुड़े ब्रोकर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मोटर इंश्योरेंस बेचने वाले अन्य डिस्ट्रीब्यूटर्स पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है। नई गाड़ियों की पॉलिसी से शुरुआती कमाई घटने और डीलर से जुड़े समझौतों के सख्त होने से डिस्ट्रीब्यूशन मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
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डीलर मॉडल और 'बीमा सुगम' पर जोर
प्रस्तावों में बीमा बिक्री को वाहन बिक्री और डीलर से जुड़े दूसरे कारोबारी संबंधों से अलग करने की दिशा दिखाई गई है। डीलर केवल इस वजह से कैशलेस रिपेयर से इनकार नहीं कर सकेंगे कि ग्राहक ने वाहन का बीमा किसी दूसरे चैनल से खरीदा है। ग्राहकों को 'बीमा सुगम' जैसे वैकल्पिक डिजिटल चैनलों तक पहुंच देने पर भी जोर है। प्रस्ताव के मुताबिक, वाहन बेचते समय डीलरों को ग्राहकों को ऐसे विकल्पों की जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी।
हेल्थ इंश्योरेंस में भी कमीशन की सीमा
कंसल्टेशन पेपर में सभी तरह के जनरल इंश्योरेंस कमीशन पर सीमा लगाने का प्रस्ताव है। हेल्थ इंश्योरेंस में पहली बार के कमीशन को 15 से 20 प्रतिशत के बीच रखने और रिन्यूअल तथा पोर्टिंग पेआउट को 5 से 10 प्रतिशत तक सीमित करने की बात कही गई है। ड्राफ्ट में डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के लिए पहले साल के कमीशन को पॉलिसी की अवधि के आधार पर 5 से 20 प्रतिशत के बीच सीमित करने का प्रस्ताव है। यह उन प्रभावी पेआउट के मुकाबले काफी कम हो सकता है, जिनमें प्रमोशनल खर्च और रिवॉर्ड्स शामिल होने पर भुगतान 60 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही गई है।
डिजिटल चैनलों और ग्राहक-केंद्रित मॉडल को बढ़ावा
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर देबाशीष बनर्जी के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव डिजिटल तरीकों को अपनाने, पॉलिसी को लंबे समय तक बनाए रखने और टिकाऊ ग्राहक-केंद्रित बाजार विकसित करने की दिशा में हैं। उनके मुताबिक, नए नियम कंपनियों को डिस्ट्रीब्यूशन और ग्राहक सेवा के लिए नए तरीके अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कमीशन आय पर दबाव बढ़ने की स्थिति में डिस्ट्रीब्यूटर्स रिन्यूअल, सर्विसिंग, टेक्नोलॉजी और अन्य अनुमोदित वैल्यू-एडेड सेवाओं पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं। हालांकि, प्रस्तावों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि IRDAI अंतिम नियम किस रूप में लागू करता है और बदलाव के लिए कितना प्रभावी ट्रांजिशन फ्रेमवर्क तैयार किया जाता है।
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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)..
1. IRDAI के नए प्रस्तावित नियमों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इनका उद्देश्य बीमा वितरण की लागत घटाना, कमीशन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों को गलत तरीके से पॉलिसी बेचने से बचाना है।
2. मोटर इंश्योरेंस में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
नई गाड़ियों के मोटर इंश्योरेंस में थर्ड-पार्टी प्रीमियम पर भुगतान शून्य और खुद के नुकसान व संबंधित कवर पर 5% तक भुगतान का प्रस्ताव है।
3. क्या नए नियमों से ग्राहकों को फायदा होगा?
प्रस्तावित व्यवस्था से ग्राहकों को अधिक डिजिटल विकल्प, बेहतर पारदर्शिता और बीमा खरीदने के वैकल्पिक चैनल मिलने की संभावना है।
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