UPI का नया रिकॉर्ड: बायोमेट्रिक पेमेंट ने पकड़ी रफ्तार, जून में 61 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन
खबर सार :-
जून में 611 मिलियन से अधिक बायोमेट्रिक आधारित यूपीआई ट्रांजैक्शन और 25,416 करोड़ रुपये के लेनदेन यह साबित करते हैं कि भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से विकसित हो रहा है। फिंगरप्रिंट और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी सुविधाएं भुगतान को अधिक सुरक्षित, तेज और आसान बना रही हैं। आने वाले समय में इस तकनीक का विस्तार यूपीआई को और मजबूत तथा व्यापक बनाएगा।
खबर विस्तार : -
UPI Transaction: भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार तेजी से बढ़ रहा है और अब बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन आधारित यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन भी नए रिकॉर्ड बना रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने में बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के जरिए 611 मिलियन यानी 61.1 करोड़ से अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन किए गए। इन लेनदेन का कुल मूल्य 25,416 करोड़ रुपये रहा। यह उपलब्धि बताती है कि भारतीय उपभोक्ता तेजी से सुरक्षित, आसान और बिना पिन वाले डिजिटल भुगतान विकल्पों को अपना रहे हैं। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन तकनीक के तहत यूजर्स अपने स्मार्टफोन में मौजूद फिंगरप्रिंट सेंसर या फेस रिकग्निशन की मदद से यूपीआई भुगतान कर सकते हैं। इसमें यूपीआई पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे भुगतान प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, सुविधाजनक और सुरक्षित बन जाती है।
एनपीसीआई ने कहा कि जून में दर्ज किए गए 611 मिलियन से अधिक बायोमेट्रिक ट्रांजैक्शन इस बात का संकेत हैं कि देश में डिजिटल भुगतान का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बड़ी संख्या में लोग अब रोजमर्रा के भुगतान के लिए इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल भुगतान का समय कम हो रहा है, बल्कि ट्रांजैक्शन की सफलता दर में भी सुधार देखने को मिल रहा है।
ऑथेंटिकेशन के नए तरीके को तेजी से मिल रही स्वीकार्यता
एनपीसीआई की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ग्रोथ) सोहिनी राजोला ने कहा कि बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन को मिल रही तेजी से स्वीकार्यता दर्शाती है कि यूपीआई उपयोगकर्ता अब अधिक सरल, सुरक्षित और निर्बाध भुगतान अनुभव को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जून में 600 मिलियन से अधिक ट्रांजैक्शन इस तकनीक की बढ़ती लोकप्रियता का स्पष्ट प्रमाण हैं। उन्होंने बताया कि यह सुविधा केवल सामान्य बैंक खातों तक सीमित नहीं है, बल्कि यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड के जरिए होने वाले भुगतान में भी सफलतापूर्वक इस्तेमाल की जा रही है। इससे उपभोक्ताओं को क्रेडिट कार्ड से भी बिना पिन के भुगतान करने की सुविधा मिल रही है, जिससे लेनदेन पहले की तुलना में अधिक सहज हो गया है। राजोला ने कहा कि वर्तमान में कई प्रमुख बैंक और यूपीआई एप्लीकेशन अपने ग्राहकों को बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की सुविधा उपलब्ध करा चुके हैं। जैसे-जैसे अधिक बैंक और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म इस तकनीक को अपनाएंगे, वैसे-वैसे इसके उपयोग में और तेजी आने की संभावना है।
बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का सबसे बड़ा लाभ
एनपीसीआई के अनुसार, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे यूपीआई पिन पर निर्भरता कम होती है। कई बार उपयोगकर्ता पिन भूल जाते हैं या सार्वजनिक स्थानों पर पिन दर्ज करने में असहज महसूस करते हैं। ऐसे में फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान के माध्यम से कुछ ही सेकंड में सुरक्षित भुगतान संभव हो जाता है। यह सुविधा पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) और पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) दोनों प्रकार के लेनदेन का समर्थन करती है। यानी उपभोक्ता किसी व्यक्ति को पैसे भेजने के साथ-साथ दुकानों, व्यापारियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के जरिए भुगतान कर सकते हैं। इससे रोजमर्रा की खरीदारी और सेवाओं का भुगतान अधिक तेज और आसान हो गया है।
भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार अब केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव भी इसकी सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन जैसी तकनीकें साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ धोखाधड़ी के जोखिम को भी कम करती हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता इस विकल्प को अपना रहे हैं। यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड के लिए भी बायोमेट्रिक भुगतान की सुविधा उपलब्ध होने से क्रेडिट आधारित डिजिटल भुगतान को नई गति मिली है। अब ग्राहक बिना यूपीआई पिन डाले केवल फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सहज और तेज हो गई है।
एनपीसीआई का मानना है कि आने वाले महीनों में बायोमेट्रिक आधारित यूपीआई भुगतान का दायरा और बढ़ेगा। अधिक बैंक, फिनटेक कंपनियां और डिजिटल भुगतान एप इस सुविधा को अपनाएंगी, जिससे डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत होगा। सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच यह तकनीक डिजिटल वित्तीय समावेशन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अन्य प्रमुख खबरें
-
2026-07-17
-
2026-07-17
-
कमाई में 96% गिरावट से सिएट के शेयरों में बड़ी टूट, निवेशकों ने दिखाई नाराजगी
2026-07-17
-
वैश्विक तनाव के बीच सोना-चांदी की चाल सुस्त, सीमित दायरे में कारोबार से निवेशकों की बढ़ी सतर्कता
2026-07-17
-
2026-07-15
-
पश्चिम एशिया तनाव के बीच संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स 130 अंक चढ़ा; निवेशकों ने दिखाई सतर्क खरीदारी
2026-07-15
-
2026-07-15
-
2026-07-15
-
हरियाणा से दौड़ेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, रेलवे के हरित भविष्य की ओर ऐतिहासिक कदम
2026-07-15
-
2026-07-15
-
आईबीएम सीईओ ने मानी गलती, एआई खर्च आकलन को लेकर हुई बड़ी चूक, 25 प्रतिशत गिरे शेयर
2026-07-15
-
2026-07-15
-
2026-07-15
-
मध्य पूर्व तनाव का असर: सोना-चांदी फिसले, अब डॉलर और ग्लोबल बाजार पर निवेशकों की नजर
2026-07-15
-
2026-07-14