ईरान-अमेरिका तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1,677 अंक टूटा; निवेशकों के ₹8 लाख करोड़ डूबे

खबर सार :-

अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार की भी धारणा कमजोर कर दी है। निवेशकों की नजर अब भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और केंद्रीय बैंकों के संकेतों पर रहेगी। हालात सामान्य होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
ईरान-अमेरिका तनाव से शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 1,677 अंक टूटा; निवेशकों के ₹8 लाख करोड़ डूबे

खबर विस्तार : -

Indian Stock Market Crashed: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक निवेशकों की सतर्कता के चलते घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के अंत में दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके साथ ही पिछले कई कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला भी थम गया।

बीएसई सेंसेक्स में 2.15 प्रतिशत की गिरावट

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15 प्रतिशत टूटकर 76,503.60 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी-50 भी 516.65 अंक यानी 2.12 प्रतिशत फिसलकर 23,882.05 पर आ गया। दोनों सूचकांकों का यह प्रदर्शन पिछले तीन महीनों में सबसे कमजोर माना जा रहा है। कारोबार की शुरुआत भी कमजोरी के साथ हुई थी। सेंसेक्स अपने पिछले बंद 78,180.72 के मुकाबले 364.27 अंक नीचे 77,816.45 पर खुला और दिन के दौरान 1,921.69 अंक टूटकर 76,259.03 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह निफ्टी भी 24,259.55 पर खुलने के बाद दिन के कारोबार में 23,805.20 तक लुढ़क गया, जो कारोबार के दौरान इसका सबसे निचला स्तर रहा।

बिकवाली का बाजार पर व्यापक असर

बाजार में बिकवाली केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार भी दबाव में रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.7 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों ने लगभग सभी वर्गों के शेयरों में मुनाफावसूली और जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। सबसे अधिक दबाव बैंकिंग शेयरों पर दिखाई दिया। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 2.56 प्रतिशत और निफ्टी बैंक 2.40 प्रतिशत टूट गया। इसके अलावा प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी, मीडिया, ऑयल एंड गैस, ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भी दो प्रतिशत के आसपास गिरावट दर्ज की गई। हालांकि फार्मा और मेटल सेक्टर में अपेक्षाकृत कम गिरावट देखने को मिली।

Nifty-50 और BSE  के प्रमुख शेयरों की स्थिति

निफ्टी-50 के प्रमुख शेयरों में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, इंटरग्लोब एविएशन, श्रीराम फाइनेंस, मारुति सुजुकी और हिंदुस्तान यूनिलीवर सबसे अधिक नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर, ओएनजीसी, बजाज ऑटो, हिंडाल्को और कोल इंडिया जैसे कुछ शेयर गिरते बाजार में भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे। बाजार में आई इस तेज गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक ही दिन में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। मंगलवार को जहां बीएसई का कुल मार्केट कैप लगभग 480.20 लाख करोड़ रुपये था, वहीं बुधवार को यह घटकर करीब 471.44 लाख करोड़ रुपये रह गया।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव बड़ी वजह

विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में घबराहट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम समाप्त हो चुका है, हालांकि बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है। दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में छह प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।

ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल

ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.52 प्रतिशत बढ़कर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) भी छह प्रतिशत से अधिक उछलकर लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। तेल महंगा होने से भारत जैसे आयातक देशों पर लागत का दबाव बढ़ने की आशंका है। विदेशी घटनाक्रम का असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिला। रुपया डॉलर के मुकाबले 58 पैसे कमजोर होकर 95.55 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। मुद्रा में आई इस कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

एक्सपर्ट्स की राय

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 23,780 से 23,750 का स्तर बेहद अहम रहेगा। यदि सूचकांक इस दायरे से नीचे टिकता है तो गिरावट बढ़कर 23,600 और 23,450 तक जा सकती है। वहीं, 24,020 से 24,050 के ऊपर मजबूती मिलने पर बाजार में रिकवरी की संभावना बन सकती है।

अन्य प्रमुख खबरें