IT शेयरों ने थामा बाजार का हाथ, विदेशी निवेश से लौटी उम्मीद; क्या इस सप्ताह बनेगा नया रिकॉर्ड?
खबर सार :-
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल संतुलित लेकिन सकारात्मक दौर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। विदेशी निवेशकों की वापसी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और आईटी सेक्टर की मजबूती बाजार के लिए अच्छे संकेत हैं। हालांकि वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजे आगे की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को इस सप्ताह चयनात्मक और सतर्क निवेश रणनीति अपनानी चाहिए।
खबर विस्तार : -
Stock market updates: भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कारोबारी सप्ताह के दूसरे दिन सपाट शुरुआत की, लेकिन शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुझान सकारात्मक दिखाई दिया। सुबह 9:17 बजे बीएसई सेंसेक्स 90 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,375 पर कारोबार कर रहा था, जबकि एनएसई निफ्टी-50 27 अंक यानी 0.11 प्रतिशत मजबूत होकर 24,457 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक खरीदारी आईटी शेयरों में देखने को मिली, जिससे बाजार को मजबूती मिली। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकेतों में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की वापसी ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है।
पिछले सप्ताह उतार-चढ़ाव के बाद लौटी स्थिरता
बीते एक सप्ताह के दौरान भारतीय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत में पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया। इसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि सप्ताह के दूसरे हिस्से में हालात बदलने लगे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तनाव कम होने, कच्चे तेल के दाम युद्ध-पूर्व स्तर के करीब लौटने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमने से बाजार में रिकवरी आई। इसके अलावा घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की लगातार खरीदारी ने भी बाजार को मजबूत आधार दिया। इसी वजह से सप्ताह के अंत तक प्रमुख सूचकांकों ने अधिकांश नुकसान की भरपाई कर ली।
IT Sector बना बाजार का सबसे बड़ा सहारा
आईटी शेयरों ने मंगलवार के शुरुआती कारोबार में शानदार प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग एक प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, ऑटो, रियल्टी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में भी सकारात्मक रुख रहा। दूसरी ओर मेटल, डिफेंस, मीडिया, मैन्युफैक्चरिंग, पीएसई और कमोडिटी इंडेक्स दबाव में कारोबार करते दिखे।
Midcap और Smallcap में मिला-जुला रुख
बाजार की शुरुआत में लार्जकैप शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निफ्टी स्मॉलकैप-100 लगभग सपाट रहा, जबकि निफ्टी मिडकैप-100 में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल बड़े शेयरों में अधिक भरोसा जता रहे हैं और छोटे शेयरों में चयनात्मक निवेश कर रहे हैं।
Asian Market: वैश्विक संकेतों का भी दिखा असर
एशियाई बाजारों में मंगलवार को मिश्रित रुख देखने को मिला। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल के बाजार गिरावट में रहे, जबकि जकार्ता में तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे। डाओ जोंस में 0.29 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में 1.12 प्रतिशत की बढ़त ने भारतीय आईटी शेयरों का मनोबल बढ़ाया।
बाजार की चाल बदलने के पीछे ये हैं प्रमुख वजहें
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में भारतीय बाजार पर दबाव डालने वाले दो प्रमुख कारण अब कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। पहला, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है, जिससे महंगाई और आयात बिल को लेकर चिंता घटी है। दूसरा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगातार बिकवाली के बाद दोबारा खरीदारी शुरू की है। सोमवार को एफपीआई ने 243.03 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जबकि डीआईआई ने 3,791.42 करोड़ रुपये का निवेश किया। यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी आने वाले दिनों में जारी रहती है तो बाजार को और समर्थन मिल सकता है।
इस सप्ताह कैसी रह सकती है बाजार की दिशा?
विश्लेषकों के अनुसार इस सप्ताह बाजार की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़े संकेत, वैश्विक बाजारों का रुख, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। यदि आईटी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बनी रहती है तथा एफपीआई का निवेश जारी रहता है तो निफ्टी 24,600-24,700 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। हालांकि वैश्विक बाजारों में अचानक बढ़ी अस्थिरता या किसी नकारात्मक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है।
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