DSP Report: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को आर्थिक बढ़त, ग्रोथ आउटलुक हुआ और अधिक मजबूत
खबर सार :-
डीएसपी की रिपोर्ट बताती है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, मजबूत मैक्रो संकेतक, एफपीआई निवेश में सुधार और आरबीआई की सहयोगी नीतियां भारतीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं। यदि मांग, निवेश और कॉरपोरेट आय में अपेक्षित सुधार जारी रहता है तो भारत की विकास दर और बाजार प्रदर्शन आने वाले वर्षों में उभरते देशों के मुकाबले अधिक मजबूत रहने की संभावना बनी हुई है।
खबर विस्तार : -
India Growth Outlook DSP Report: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत लेकर आई है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की निकासी में कमी, रुपए में निवेश वाली परिसंपत्तियों का आकर्षक मूल्यांकन और बेहतर आर्थिक संकेतकों ने देश की विकास संभावनाओं को और मजबूत किया है। डीएसपी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में भारत का ग्रोथ आउटलुक पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक नजर आ रहा है। रिपोर्ट का मानना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं तो भारतीय अर्थव्यवस्था को मध्यम अवधि में इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।
RBI Policy: पर्याप्त बैंकिंग तरलता और वित्तीय प्रणाली को समर्थन
रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आगे भी विकास को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों पर कायम रह सकता है। पर्याप्त बैंकिंग तरलता बनाए रखने और वित्तीय प्रणाली को समर्थन देने के चलते बॉन्ड यील्ड में धीरे-धीरे गिरावट देखने को मिल सकती है। इससे उद्योगों के लिए पूंजी जुटाने की लागत कम होगी और निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। डीएसपी का कहना है कि देश में फिलहाल अतिरिक्त उत्पादन क्षमता उपलब्ध है और मांग में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। यही कारण है कि आर्थिक विकास दर में आगे और मजबूती आने की संभावना बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार यदि नॉमिनल ग्रोथ तेज होती है तो कॉरपोरेट कंपनियों की बिक्री में तेजी आएगी और उनके मुनाफे में भी सुधार देखने को मिलेगा। इससे रोजगार, निवेश और औद्योगिक उत्पादन को भी सकारात्मक समर्थन मिलेगा।
FY2026-27: भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट को मिली बड़ी मजबूती
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट को भी बड़ी मजबूती बताया गया है। पहले इसे बाजार की चिंता माना जा रहा था, लेकिन अब बदलती वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू आर्थिक सुधारों के चलते यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक कारक बन सकता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी वित्तीय स्थिरता को भी मजबूती मिलने की संभावना है। डीएसपी के अनुसार रुपए में निवेश वाली परिसंपत्तियों पर बेहतर रिटर्न, रुपए का रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (आरईईआर) आकर्षक स्तर पर पहुंचना, बड़ी कंपनियों के शेयरों का अपेक्षाकृत कम मूल्यांकन और एफपीआई के डेट निवेश में बढ़ोतरी जैसे कारकों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर को पहले से अधिक मजबूत बनाया है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि मई 2026 में भारत का वास्तविक प्रभावी विनिमय दर यानी Real Effective Exchange Rate 88 से नीचे आ गया, जो सामान्य परिस्थितियों में बेहद कम देखने को मिलता है। साथ ही भारत और अमेरिका के बीच महंगाई का अंतर भी कम हुआ है। इससे लंबे समय में रुपए के अत्यधिक कमजोर होने की आशंका घटती दिखाई दे रही है, जो निवेशकों के लिए भरोसा बढ़ाने वाला संकेत माना जा रहा है।
लार्ज-कैप कंपनियां सबसे आकर्षक निवेश विकल्प
शेयर बाजार के संदर्भ में डीएसपी ने लार्ज-कैप कंपनियों को सबसे आकर्षक निवेश विकल्प बताया है। रिपोर्ट के अनुसार यदि कंपनियों की आय और राजस्व में सुधार जारी रहता है तो बड़ी कंपनियों के शेयर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। मजबूत आर्थिक गतिविधियां बैंकिंग क्षेत्र में क्रेडिट ग्रोथ को गति देंगी, जिससे उद्योगों और उपभोक्ता मांग दोनों को लाभ मिलेगा। निर्माण गतिविधियों में तेजी आने की संभावना को देखते हुए रिपोर्ट ने सीमेंट उद्योग के लिए भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। लंबे समय से दबाव झेल रहे इस क्षेत्र में परिचालन प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और रियल एस्टेट गतिविधियों में तेजी आने पर सीमेंट कंपनियों की मांग बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
IT सेक्टर को लेकर रिपोर्ट में दृष्टिकोण संतुलित
हालांकि आईटी सेक्टर को लेकर रिपोर्ट ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। निफ्टी आईटी कंपनियों के शेयर फिलहाल मूल्यांकन के हिसाब से सस्ते माने जा रहे हैं, लेकिन उनकी भविष्य की आय वृद्धि को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अनिश्चितता और मांग में संभावित सुस्ती इस सेक्टर के लिए चुनौती बनी रह सकती है। डीएसपी ने यह भी कहा कि उभरते बाजारों में मौजूदा तेजी मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी कंपनियों पर आधारित है। दक्षिण कोरिया और ताइवान की टेक कंपनियों का उभरते बाजारों के सूचकांकों में दबदबा बढ़ने से इन इंडेक्स में अत्यधिक केंद्रीकरण देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल में भारत एक संतुलित और अपेक्षाकृत बेहतर निवेश गंतव्य के रूप में उभर सकता है, जहां विविध क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं मौजूद हैं।
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