Gold स्थिर, Silver में कमजोरी: घरेलू बाजार सुस्त, लेकिन Global Market से मिल रहे तेजी के संकेत

खबर सार :-

घरेलू बाजार में सप्ताह की शुरुआत भले ही सोने में स्थिरता और चांदी में कमजोरी के साथ हुई हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहे सकारात्मक संकेत भविष्य में तेजी की उम्मीद बनाए हुए हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट भी लंबी अवधि में सोने के पक्ष में दिखाई देती है। ऐसे में निवेशकों के लिए वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखना अहम रहेगा।
Gold स्थिर, Silver में कमजोरी: घरेलू बाजार सुस्त, लेकिन Global Market से मिल रहे तेजी के संकेत

खबर विस्तार : -

Gold Silver Price Today: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की चाल अलग-अलग रही। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जहां सोने की शुरुआत लगभग सपाट रही, वहीं चांदी में शुरुआती कारोबार के दौरान आधा प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं में मजबूत तेजी देखने को मिली, जिससे आने वाले दिनों में घरेलू बाजार की दिशा पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।

5 अगस्त को डिलीवरी वाला सोने का वायदा अनुबंध 1,47,378 रुपये प्रति 10 ग्राम

एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोने का वायदा अनुबंध पिछली क्लोजिंग 1,47,378 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,47,135 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। शुरुआती कारोबार में सोना सीमित दायरे में बना रहा। सुबह 9:52 बजे यह 101 रुपये या 0.07 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 1,47,277 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सोने ने 1,47,135 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर और 1,47,509 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऊपरी स्तर छुआ। इससे स्पष्ट है कि फिलहाल निवेशक किसी बड़े संकेत का इंतजार कर रहे हैं और बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।

चांदी में शुरुआती कारोबार के दौरान दबाव

वहीं दूसरी ओर, चांदी में शुरुआती कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला। 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछली क्लोजिंग 2,37,410 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2,36,393 रुपये प्रति किलोग्राम पर हुई। यह शुरुआती स्तर पर 1,017 रुपये या 0.42 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। इसके बाद चांदी में कमजोरी और बढ़ी तथा सुबह के कारोबार में यह 1,267 रुपये या 0.53 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,36,143 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान चांदी ने 2,36,001 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम स्तर और 2,37,676 रुपये प्रति किलोग्राम का उच्चतम स्तर दर्ज किया।

घरेलू बाजार में सुस्ती, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेशकों की रुचि

घरेलू बाजार में सुस्ती के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं की ओर बना रहा। कॉमेक्स (COMEX) पर सोना 1.15 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,173.24 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, चांदी में और भी मजबूत तेजी रही तथा इसकी कीमत 2.02 प्रतिशत बढ़कर 62.29 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने और चांदी की ओर आकर्षित कर रहे हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमतों को लगातार समर्थन मिल रहा है।

गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में सोने के प्रति सकारात्मक संकेत

हाल ही में जारी वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट भी सोने के प्रति सकारात्मक संकेत देती है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं, लेकिन यदि वैश्विक आर्थिक जोखिम और भू-राजनीतिक तनाव बने रहते हैं तो कीमतों में और तेजी आने की संभावना मजबूत होगी। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि जुलाई से दिसंबर 2026 के दौरान सोने की कीमतें लगभग 4,100 डॉलर प्रति औंस के आसपास रह सकती हैं, जिसमें करीब 5 प्रतिशत तक का उतार-चढ़ाव संभव है। यह अनुमान बताता है कि बाजार में फिलहाल तेजी की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। यदि पिछले एक वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। डॉलर के आधार पर सोने की कीमतों में लगभग 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि चांदी ने इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए करीब 67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। इसी कारण निवेशकों की दिलचस्पी अब भी इन दोनों कीमती धातुओं में बनी हुई है।

 बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, वैश्विक ब्याज दरों की दिशा और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम सोने और चांदी की कीमतों की अगली चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के साथ-साथ वैश्विक संकेतों पर भी नजर बनाए रखनी चाहिए।

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