52,000 करोड़ की रक्षा खरीद से Defense शेयरों में धमाका, BEL-HAL समेत कई स्टॉक्स ने भरी उड़ान
खबर सार :-
डीएसी द्वारा 52,000 करोड़ रुपये की रक्षा खरीद को मंजूरी मिलने से डिफेंस सेक्टर में नई ऊर्जा देखने को मिली है। सरकारी निवेश, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और संभावित नए ऑर्डर की उम्मीद ने बीईएल, एचएएल, मझगांव डॉक और अन्य कंपनियों के शेयरों में तेजी ला दी। आने वाले समय में यह फैसला रक्षा उद्योग और निवेशकों दोनों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।
खबर विस्तार : -
₹52,000 Crore Defense Deal: भारतीय रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार के बड़े फैसले का असर शेयर बाजार में भी साफ दिखाई दिया। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) द्वारा सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए लगभग 52,000 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों और हथियारों की खरीद को मंजूरी मिलने के बाद सोमवार को डिफेंस सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। इस फैसले से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और कई प्रमुख रक्षा कंपनियों के शेयरों ने शानदार तेजी दर्ज की।
डिफेंस सेक्टर में सबसे ज्यादा चर्चा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के शेयरों की रही। बीएसई (BSE) पर कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर 2.84 प्रतिशत की तेजी के साथ 429.90 रुपये तक पहुंच गया। दोपहर करीब एक बजे यह 1.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 424.10 रुपये पर कारोबार कर रहा था। सरकारी रक्षा ऑर्डर मिलने की उम्मीद और मजबूत ऑर्डर बुक के कारण निवेशकों ने इस शेयर में जमकर खरीदारी की।
HAL के शेयरों में तेजी, मुनाफावसूली का जोर
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। कारोबार के दौरान शेयर 1.55 प्रतिशत चढ़कर 4,497 रुपये तक पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली और यह 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,449 रुपये पर कारोबार करता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर सरकार का बढ़ता जोर एचएएल जैसी कंपनियों के लिए लंबे समय में सकारात्मक साबित होगा। मिश्र धातु निगम (मिधानी) के शेयरों ने भी निवेशकों को आकर्षित किया। कंपनी का शेयर कारोबार के दौरान 3.32 प्रतिशत उछलकर 441.70 रुपये तक पहुंच गया। खबर लिखे जाने तक यह 1.85 प्रतिशत की मजबूती के साथ 435 रुपये पर कारोबार कर रहा था। रक्षा उपकरणों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली विशेष धातुओं की बढ़ती मांग का लाभ कंपनी को मिलने की उम्मीद है।
जहाज निर्माण क्षेत्र की कंपनियों में भी उत्साह
भारतीय शेयर बाजार में जहाज निर्माण क्षेत्र की कंपनियों में भी सोमवार को काफी उत्साह देखने को मिला। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड का शेयर इंट्राडे कारोबार में 2,582 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचा। बाद में यह 0.99 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,568 रुपये पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स के शेयर भी 1.69 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,793.30 रुपये तक पहुंचे। कारोबार के दौरान इसमें हल्की मुनाफावसूली हुई और यह 2,751 रुपये के स्तर पर बना रहा। यही नहीं, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। कंपनी का शेयर कारोबार के दौरान 1,542 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। निवेशकों का मानना है कि नौसेना के लिए प्रस्तावित नई परियोजनाओं का लाभ जहाज निर्माण कंपनियों को आने वाले वर्षों में मिल सकता है।
Defense Procurement से जुड़े इन प्रस्तावों को मिली मंजूरी
दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में करीब 52,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत रक्षा खरीद प्रस्तावों को 'एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी' (एओएन) के तहत मंजूरी दी गई। डीएसी देश में रक्षा खरीद से जुड़े मामलों पर फैसला लेने वाली सर्वोच्च संस्था है और इसकी मंजूरी को रक्षा परियोजनाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। मंजूर किए गए प्रस्तावों में सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों की खरीद शामिल है। इनमें एंटी-ड्रोन सिस्टम, विभिन्न प्रकार की मिसाइलें, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम, बहुत कम दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम, कामिकेज ड्रोन, नेवल अनमैन्ड एरियल सिस्टम तथा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी रखने वाले आधुनिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
रक्षा उत्पादन में बढ़ रही Indigenous Companies की भागीदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' नीति के तहत रक्षा उत्पादन में स्वदेशी कंपनियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बीईएल, एचएएल, मझगांव डॉक, गार्डन रीच, कोचीन शिपयार्ड और मिधानी जैसी कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना मजबूत हुई है। यही वजह है कि निवेशकों ने इन कंपनियों के शेयरों में भरोसा जताया। रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सरकारी निवेश से न केवल कंपनियों की आय बढ़ने की संभावना है, बल्कि भारत की रक्षा क्षमता को भी नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही घरेलू रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में भी यह फैसला अहम माना जा रहा है।
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