EV की रफ्तार बदलेगी भारत की तस्वीर! 2030 तक 20% हिस्सेदारी से आयात बिल में ₹1 लाख करोड़ की बचत संभव
खबर सार :-
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार केवल परिवहन क्षेत्र का बदलाव नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अहम कदम है। यदि चार्जिंग नेटवर्क, सरकारी प्रोत्साहन और उपभोक्ता विश्वास इसी गति से बढ़ते रहे तो 2030 तक ईवी क्रांति देश का आयात बिल घटाने, प्रदूषण कम करने और सतत विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
खबर विस्तार : -
SBI Research EV market growth: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का बढ़ता इस्तेमाल आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यदि वर्ष 2030 तक देश में ईवी की बाजार हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, तो भारत के आयात बिल में करीब एक लाख करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ा है। इससे न केवल ईंधन आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को भी मजबूती मिलेगी।
ईवी बाजार में तेजी से बढ़ रही हिस्सेदारी
एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान समय में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी बेहतर है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की नीतियां, सब्सिडी, चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार और उपभोक्ताओं की बढ़ती जागरूकता इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं। रिसर्च में अनुमान लगाया गया है कि मौजूदा गति जारी रही तो वर्ष 2026 में देश में कुल ईवी पंजीकरण 25 लाख के आंकड़े को पार कर सकता है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारतीय बाजार तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है।
पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ी मांग
रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका-ईरान युद्ध 28 फरवरी से शुरू होने के बाद भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। मार्च से जून के बीच देश में औसतन 2.3 लाख ईवी प्रति माह पंजीकृत हुए, जबकि वर्ष 2025 में यह औसत केवल 1.3 लाख प्रति माह था। कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता और ईंधन खर्च बढ़ने की आशंका ने लोगों को वैकल्पिक परिवहन की ओर आकर्षित किया।
पूर्ण इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ रही स्वीकार्यता
रिपोर्ट के मुताबिक केवल हाइब्रिड ही नहीं बल्कि पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2024 में कुल वाहन पंजीकरण में पूर्ण ईवी का हिस्सा 2 प्रतिशत से भी कम था, लेकिन 2026 में यह बढ़कर 8 प्रतिशत से अधिक हो गया है। कई राज्यों में यह हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच चुकी है। इससे संकेत मिलता है कि उपभोक्ता अब इलेक्ट्रिक वाहनों को व्यवहारिक विकल्प के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।

चार्जिंग नेटवर्क बनेगा सबसे बड़ा आधार
एसबीआई रिसर्च ने कहा है कि ईवी की सफलता काफी हद तक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। फिलहाल भारत में 29,151 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं। हालांकि इनमें से लगभग 35 प्रतिशत केवल कर्नाटक और महाराष्ट्र में स्थित हैं। रिपोर्ट के अनुसार देशभर में समान रूप से चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना बेहद जरूरी होगा ताकि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़ सके।
दिल्ली की नई ईवी नीति बनी मिसाल
रिपोर्ट में दिल्ली सरकार की नई ईवी नीति की विशेष सराहना की गई है। इसके तहत अगले चार वर्षों में 32,000 नए चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने की योजना बनाई गई है। साथ ही दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर पहले तीन वर्षों में कुल 60,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा। तीनपहिया ईवी के लिए यह प्रोत्साहन 1.20 लाख रुपये तक होगा, जबकि एन1 श्रेणी के कमर्शियल ट्रकों को पहले वर्ष में 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और एकमुश्त रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट भी दी जा रही है।
2030 तक बड़ा बदलाव संभव
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 तक भारत में लगभग 2.86 करोड़ वाहन पंजीकृत थे। यह संख्या वर्ष 2030 तक बढ़कर करीब 4 करोड़ होने का अनुमान है। इनमें यदि 20 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की होती है तो इससे पेट्रोल और डीजल की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी। परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा की बचत होगी, आयात बिल घटेगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। साथ ही कार्बन उत्सर्जन कम होने से पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
अन्य प्रमुख खबरें
-
अमेरिका-ईरान तनाव से सोना-चांदी धड़ाम
2026-08-14
-
चिप से एआई तक, टेक पावर बन रहा भारत
2026-08-14
-
वैश्विक तनाव में बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 300 अंक टूटा
2026-08-14
-
93.90 करोड़ का IPO: क्रेडेंट कनेक्ट को पहले ही दिन मिला जोरदार रिस्पॉन्स
2026-08-13
-
वैश्विक चुनौतियों के बीच चमका भारतीय आभूषण बाजार, निर्यात 9.17 अरब डॉलर के पार
2026-08-13
-
UPI से पेमेंट सेक्टर को बूस्ट, 371 फंडिंग राउंड में जुटे $5.8 अरब
2026-08-13
-
SBI का ग्लोबल जलवा! 50 करोड़ डॉलर के बॉन्ड पर निवेशकों ने लगाया दांव
2026-08-13
-
कैब बाजार में भारत टैक्सी की धूम, 8.48 लाख ड्राइवर जुड़े
2026-08-13
-
वैश्विक दबाव में बाजार की चाल बिगड़ी, सेंसेक्स 180 अंक टूटा
2026-08-13
-
अदरक-लहसुन और चांदी की ज्वेलरी ने बढ़ाई महंगाई
2026-08-12
-
वैश्विक बाजार में बढ़ाएं ‘मेक इन इंडिया’ की ताकत: पीयूष गोयल
2026-08-12
-
सेंसेक्स फिसला, महंगाई पर निवेशकों की नजर
2026-08-12
-
तनाव में चमका सोना-चांदी, कीमतों में जोरदार उछाल
2026-08-12
-
महंगे तेल से बाजार बेहाल, सेंसेक्स-निफ्टी लाल
2026-08-12
-
SEBI की सख्ती का असर, F&O घाटा 18% घटा!
2026-08-11