E-25 Petrol पर केंद्र सरकार ने तोड़ी चुप्पी, कहा- फिलहाल नहीं होगा लागू; E-20 को लेकर भी दूर किए सभी भ्रम
खबर सार :-
केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल E-25 पेट्रोल लागू करने की कोई योजना नहीं है और देश में E-20 नीति ही जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि भविष्य में कोई भी बदलाव केवल वैज्ञानिक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और सुरक्षा मानकों के आधार पर ही किया जाएगा। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक सूचनाओं से बचने और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की जरूरत है।
खबर विस्तार : -
Ethanol-Blended Petrol: देश में E-25 पेट्रोल को जल्द लागू किए जाने की अटकलों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सरकार ने कहा है कि फिलहाल E-20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई प्रस्ताव या निर्णय नहीं लिया गया है। यदि भविष्य में E-25 या इससे अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को लागू करने पर विचार किया जाता है, तो वह केवल व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद ही संभव होगा।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने कहा कि आम लोगों और वाहन मालिकों को E-20 पेट्रोल को लेकर किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यह ईंधन पिछले ढाई वर्षों से अधिक समय से व्यापक परीक्षण और चरणबद्ध तरीके से देशभर में इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि मौजूदा नीति पूरी तरह वैज्ञानिक अध्ययनों और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित है।
E-25 पेट्रोलः वाहनों का माइलेज और इंजन की कार्यक्षमता
सरकार की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया जा रहा था कि जल्द ही देश में E-25 पेट्रोल लागू किया जा सकता है। इसके साथ ही कुछ पोस्ट में यह भी कहा जा रहा था कि अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन से वाहनों का माइलेज कम होगा और इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। सरकार ने इन आशंकाओं को भ्रामक बताते हुए कहा कि E-20 पेट्रोल के संबंध में सभी आवश्यक परीक्षण पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को पूरे देश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। वर्तमान में भारत में लगभग 20 करोड़ पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहन और करीब 20 लाख पेट्रोल आधारित चारपहिया वाहन एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह ईंधन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में है और इसके संचालन को लेकर लगातार निगरानी भी की जा रही है।
केंद्र सरकार ने जारी किया स्पष्टीकरण
केंद्र सरकार ने जुलाई की शुरुआत में एथेनॉल मिश्रण को लेकर 10 बिंदुओं वाला विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया था। इसमें कहा गया कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) पूरी तरह वैज्ञानिक शोध, वैश्विक अनुभव और नियामकीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि E-20 कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में लंबे समय से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
एथेनॉल बनाने में पानी की बर्बादी को नकारा
सरकार ने उन दावों को भी गलत बताया, जिनमें कहा जा रहा था कि एक लीटर एथेनॉल बनाने के लिए लगभग 10,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार आधुनिक एथेनॉल डिस्टिलरी में एक लीटर एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की जरूरत होती है। इसके अलावा अधिकांश आधुनिक इकाइयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक अपनाई जा रही है, जिससे पानी का पुनर्चक्रण किया जाता है और जल की बर्बादी को काफी हद तक रोका जाता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल वही अतिरिक्त चावल उपयोग में लाया जाता है, जो देश की खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद उपलब्ध रहता है। साथ ही एथेनॉल उत्पादन में अब मक्के की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और वर्तमान में कुल एथेनॉल आपूर्ति का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मक्का से तैयार किया जा रहा है।
धान की तुलना में मक्के की खेती में कम पानी
सरकार के अनुसार, धान की तुलना में मक्के की खेती में कम पानी की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि किसानों को मक्का उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी वृद्धि की गई है। इससे एक ओर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर एथेनॉल उत्पादन को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में भी काम हो रहा है। सरकार का कहना है कि भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम वैश्विक अनुभव, वैज्ञानिक परीक्षणों और ऊर्जा सुरक्षा की दीर्घकालिक रणनीति पर आधारित है। इसलिए E-25 को लेकर फिलहाल फैल रही अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।
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