भारत-आसियान व्यापार ने रचा नया रिकॉर्ड: 128 अरब डॉलर के पार पहुंचा द्विपक्षीय कारोबार, आर्थिक साझेदारी को मिली नई रफ्तार
खबर सार :-
भारत और आसियान के बीच 128 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एआईटीआईजीए की समीक्षा पूरी होने के बाद व्यापारिक प्रक्रियाएं और सरल होंगी, जिससे निर्यात, निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।
खबर विस्तार : -
India-ASEAN Agreement: भारत और आसियान (ASEAN) देशों के बीच आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 128 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि न केवल क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते व्यापारिक प्रभाव का भी संकेत देती है। बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
भारत के व्यापार में आसियान की 11% हिस्सेदारी
मंत्रालय के अनुसार, आसियान भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। भारत के कुल वैश्विक व्यापार में आसियान देशों की हिस्सेदारी करीब 11 प्रतिशत है। व्यापार में आई यह वृद्धि बताती है कि दोनों पक्षों के बीच निवेश, निर्यात, आयात और आपूर्ति श्रृंखला को लेकर सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी भविष्य में क्षेत्रीय आर्थिक विकास और निवेश के नए अवसर भी पैदा करेगी। भारत और आसियान के बीच व्यापारिक संबंधों को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 6 से 10 जुलाई तक 13वीं आसियान-भारत ट्रेड इन गुड्स एग्रीमेंट (AITIGA) संयुक्त समिति (Joint Committee) और उससे जुड़ी विभिन्न बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य एआईटीआईजीए की समीक्षा के तहत चल रही बातचीत की प्रगति का मूल्यांकन करना और लंबित मुद्दों पर सहमति बनाना है।
समीक्षा प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करना प्राथमिकता
आधिकारिक बयान के अनुसार, संयुक्त समिति की बैठक में विभिन्न उप-समितियों को उनके कार्यक्षेत्र से जुड़े विषयों पर रणनीतिक दिशा-निर्देश दिए गए। साथ ही उनसे समझौते की समीक्षा के अंतर्गत शेष बचे अध्यायों पर जल्द से जल्द सहमति बनाकर प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया गया। मंत्रालय का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करना दोनों पक्षों की प्राथमिकता है। बयान में यह भी कहा गया कि बातचीत की गति बनाए रखने के लिए सभी उप-समितियों को तय समय-सीमा के भीतर अपना कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें आपसी सहयोग के साथ ठोस और व्यावहारिक परिणाम हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है ताकि समझौते को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल बनाया जा सके।
मंत्रालय के मुताबिक, 13वीं एआईटीआईजीए संयुक्त समिति की बैठक के दौरान आठ उप-समितियों में से तीन प्रमुख उप-समितियों की बैठकें समानांतर रूप से आयोजित की जा रही हैं। इनमें कस्टम्स प्रक्रियाओं एवं व्यापार सुगमता (SC-CPTF), नेशनल ट्रीटमेंट एवं मार्केट एक्सेस (SC-NTMA) तथा रूल्स ऑफ ओरिजिन (SC-ROO) से संबंधित उप-समितियां शामिल हैं। इन समितियों का उद्देश्य व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाना और वस्तुओं की उत्पत्ति से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट एवं प्रभावी बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एआईटीआईजीए की समीक्षा सफलतापूर्वक पूरी होती है तो भारत और आसियान देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलेगी। इससे भारतीय निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच, सरल व्यापार प्रक्रियाएं और निवेश के अधिक अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला भी पहले से अधिक मजबूत हो सकेगी।
भारत और आसियान के बीच सहयोग को मिलेगी नई दिशा
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि ये बैठकें भारत और आसियान के बीच सहयोग को नई दिशा देने, आपसी विश्वास को मजबूत करने तथा रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हो रही हैं। दोनों पक्षों का लक्ष्य व्यापारिक संबंधों को अधिक संतुलित, समावेशी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है। 13वीं एआईटीआईजीए संयुक्त समिति की बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव नितिन कुमार यादव और मलेशिया के निवेश, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की डिप्टी सेक्रेटरी जनरल (ट्रेड) मस्तुरा अहमद मुस्तफा ने की। दोनों अधिकारियों ने समीक्षा प्रक्रिया को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने और व्यापारिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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