OIl Crisis के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था पर IMF का भरोसा, 2027 में तेज रफ्तार से बढ़ेगी ग्रोथ
खबर सार :-
आईएमएफ की ताजा रिपोर्ट बताती है कि मध्य पूर्व संकट और महंगे कच्चे तेल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है। 2026 के लिए ग्रोथ अनुमान में मामूली कटौती की गई है, लेकिन 2027 के लिए बेहतर वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। मजबूत घरेलू मांग, आर्थिक गतिविधियां और तकनीकी निवेश भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी स्थिर विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
खबर विस्तार : -
IMF Report: मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में माना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। हालांकि, ऊर्जा कीमतों में तेजी के कारण आईएमएफ ने वर्ष 2026 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर (जीडीपी ग्रोथ) के अनुमान में मामूली कटौती की है, लेकिन 2027 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाते हुए अर्थव्यवस्था की मजबूत संभावनाओं पर भरोसा जताया है।
आईएमएफ ने अपनी नई रिपोर्ट में वर्ष 2026 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.4 प्रतिशत रखा है। यह अप्रैल में जारी अनुमान से 0.1 प्रतिशत अंक कम है। इसके विपरीत, वर्ष 2027 के लिए विकास दर के अनुमान में 0.2 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की गई है। संस्था का मानना है कि अगले वर्ष ऊर्जा से जुड़े दबाव कम होने के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था और अधिक गति पकड़ सकती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत
आईएमएफ के अनुसार भारत की मजबूत घरेलू मांग, बेहतर आर्थिक गतिविधियां और उपभोक्ता खर्च देश की विकास यात्रा को लगातार समर्थन दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के महीनों में सामने आए आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। आईएमएफ के रिसर्च विभाग की प्रमुख डेनिज इगन ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत के लिए विकास दर के अनुमान में केवल मामूली बदलाव किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 के लिए अनुमान 6.4 प्रतिशत किया गया है, जबकि 2027 के लिए इसे बढ़ाया गया है। उनके अनुसार, अप्रैल तक उपलब्ध हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतकों ने यह दिखाया है कि देश में आर्थिक गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं और विकास की गति अपेक्षा से बेहतर है।
2027 तक ऊर्जा संकट का असर कम होने की उम्मीद
हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस वर्ष ऊर्जा कीमतों में आई तेजी ने आर्थिक गति पर कुछ दबाव डाला है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिसका असर ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर पड़ा है। भारत भी अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा प्रभाव देश की महंगाई, चालू खाते के घाटे और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है। आईएमएफ का मानना है कि वर्ष 2027 तक ऊर्जा संकट का असर धीरे-धीरे कम हो जाएगा। इसके बाद भारत की आर्थिक वृद्धि फिर से मजबूत होगी और मध्यम अवधि में विकास दर लगभग 6.5 प्रतिशत के आसपास बनी रह सकती है। संस्था के अनुसार भारत की आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा आधार घरेलू मांग, निवेश और उत्पादन गतिविधियों में निरंतर सुधार है।
वैश्विक विकास दर का अनुमान
रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था का भी आकलन किया गया है। आईएमएफ ने वर्ष 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान 3 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.4 प्रतिशत बरकरार रखा है। संस्था का कहना है कि शुरुआती आशंकाओं के विपरीत दुनिया की अर्थव्यवस्था ने मध्य पूर्व संकट का अब तक अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से सामना किया है। हालांकि, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता अभी भी वैश्विक आर्थिक जोखिम बनी हुई है। आईएमएफ ने वैश्विक महंगाई के अनुमान में भी संशोधन किया है। संस्था ने वर्ष 2026 के लिए वैश्विक हेडलाइन महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024 की शुरुआत से महंगाई में गिरावट का जो रुझान देखने को मिल रहा था, वह अब धीमा पड़ गया है। ऊर्जा कीमतों में तेजी और वैश्विक आपूर्ति संबंधी चुनौतियां इसके प्रमुख कारण हैं।
एआई और नई तकनीकों में तेजी से हो रहा निवेश
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नई तकनीकों में तेजी से हो रहे निवेश ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को कुछ राहत दी है। एआई आधारित निवेश ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से होने वाले आर्थिक नुकसान की आंशिक भरपाई कर रहा है। इससे विशेष रूप से वे देश लाभान्वित हो रहे हैं जो वैश्विक टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन का हिस्सा हैं। भारत भी डिजिटल अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगातार मजबूत स्थिति बना रहा है, जिससे दीर्घकालिक विकास को समर्थन मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होती है तो भारत के आयात बिल में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे ईंधन की घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ने के साथ महंगाई में भी तेजी आ सकती है। बावजूद इसके, मजबूत घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक सुधार भारत को वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम बना रहे हैं।
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