बैंकिंग में AI की नई उड़ान, SBI चेयरमैन बोले-
खबर सार :-
SBI चेयरमैन सीएस शेट्टी के मुताबिक एजेंटिक AI बैंकिंग की दक्षता बढ़ाने और ग्राहकों को व्यक्तिगत वित्तीय सेवाएं देने में बड़ा बदलाव ला सकता है। हालांकि, AI के फैसलों को लागू करने की क्षमता बढ़ने के साथ जोखिम और जवाबदेही भी बढ़ेगी। इसलिए बैंकों को AI एजेंट्स की पहचान, प्रमाणीकरण, ग्राहक सहमति और लेनदेन सीमाओं के लिए स्पष्ट नियम बनाना जरूरी होगा, ताकि तकनीक सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से आगे बढ़ सके।
खबर विस्तार : -
Global Fintech Fest 2026: मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने बैंकिंग क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अहम बात कही है। उन्होंने कहा कि एजेंटिक AI बैंकों की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ हजारों ग्राहकों को बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। हालांकि, इस तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ AI एजेंट्स के लिए स्पष्ट और मजबूत ढांचा तैयार करना भी जरूरी होगा।
शेट्टी के मुताबिक बैंक अब AI अपनाने के अगले चरण में प्रवेश कर रहे हैं। अभी तक वित्तीय संस्थान मुख्य रूप से AI और मशीन लर्निंग (ML) का इस्तेमाल विश्लेषण, अनुमान और सिफारिशों के लिए करते रहे हैं। लेकिन एजेंटिक AI के जरिए तकनीक अब इससे आगे बढ़कर कुछ फैसलों को लागू करने की दिशा में जा रही है। ऐसे में बैंकिंग व्यवस्था में जवाबदेही, नियंत्रण और ग्राहक सुरक्षा का महत्व और बढ़ जाएगा।
मानव क्षमता बढ़ाने वाला होना चाहिए AI
SBI चेयरमैन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्देश्य मानव संसाधनों की क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए। उनके अनुसार AI को इस तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिससे बैंक कर्मचारियों की उत्पादकता बेहतर हो और ग्राहकों को ज्यादा तेज, सुविधाजनक और व्यक्तिगत सेवाएं मिल सकें। उन्होंने यह भी बताया कि एजेंटिक AI को लागू करने की शुरुआती स्थिर लागत अधिक हो सकती है। हालांकि, जब इस तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू होगा तो प्रति अतिरिक्त उपयोगकर्ता या सेवा की लागत कम हो सकती है। इससे लंबे समय में बैंकों की आर्थिक और परिचालन दक्षता बढ़ने की संभावना है।
पर्सनलाइज्ड बैंकिंग को मिलेगा बढ़ावा
शेट्टी ने कहा कि AI एजेंट्स बैंकों को बड़ी संख्या में ग्राहकों की अलग-अलग वित्तीय जरूरतों को समझने और उनके अनुरूप सेवाएं देने में मदद कर सकते हैं। इससे पर्सनलाइज्ड बैंकिंग को नया विस्तार मिल सकता है। उनके अनुसार, AI में रणनीतिक क्षमताएं विकसित करने के लिए बुनियादी AI मॉडल तैयार करना भी महत्वपूर्ण है। मजबूत तकनीकी आधार के जरिए बैंक अपने कारोबार की जरूरतों के मुताबिक AI समाधानों को विकसित और तैनात कर सकते हैं। हालांकि, बैंकिंग क्षेत्र के सामने चुनौती यह है कि वित्तीय सेवाओं का बाजार काफी विविध और जटिल है। अलग-अलग ग्राहकों की जरूरतें, जोखिम, नियम और लेनदेन की प्रकृति अलग हो सकती है। इसलिए एजेंटिक AI को लागू करते समय केवल तकनीकी क्षमता पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।
SBI पहले से AI-ML का कर रहा इस्तेमाल
सीएस शेट्टी ने बताया कि SBI बैंकिंग क्षेत्र में AI और ML को शुरुआती दौर में अपनाने वाले संस्थानों में रहा है। बैंक पहले से क्रेडिट आकलन और कैश फ्लो आधारित ऋण देने जैसे क्षेत्रों में पारंपरिक AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। उनकी बात से संकेत मिलता है कि बैंकिंग में AI का इस्तेमाल कोई बिल्कुल नया प्रयोग नहीं है। नया चरण उस समय शुरू होगा, जब AI सिस्टम केवल डेटा का विश्लेषण या सिफारिश करने के बजाय कुछ प्रक्रियाओं और निर्णयों को खुद आगे बढ़ाने में सक्षम होंगे।
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डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना भारत की ताकत
शेट्टी ने AI के विस्तार में भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए भरोसा कायम किया और फिर उसी भरोसे को बड़े पैमाने पर विस्तार में बदला है। उनके मुताबिक यही डिजिटल आधार वित्तीय सेवाओं में नई तकनीकों को अपनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम के कारण बैंकिंग सेवाओं को तेजी से नए ग्राहकों तक पहुंचाने और तकनीक आधारित समाधान विकसित करने में मदद मिल सकती है।
AI एजेंट्स के लिए स्पष्ट नियम जरूरी
शेट्टी ने कहा कि जैसे-जैसे एजेंटिक AI बैंकिंग का अभिन्न हिस्सा बनता जाएगा, वित्तीय संस्थानों को कुछ बुनियादी नियम स्पष्ट करने होंगे। इनमें AI एजेंट्स की पहचान और प्रमाणीकरण, ग्राहकों की सहमति तथा लेनदेन की सीमाओं को नियंत्रित करने वाले प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने जोर दिया कि AI सिस्टम जब सिर्फ सिफारिशें देंगे तो जोखिम और जवाबदेही का स्तर अलग होगा, लेकिन जब वही सिस्टम वास्तविक फैसलों को लागू करने लगेंगे तो जिम्मेदारी कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। यानी बैंकिंग में AI की अगली क्रांति केवल तकनीक की क्षमता पर निर्भर नहीं करेगी। इसकी सफलता इस बात पर भी तय होगी कि बैंक सुरक्षा, पारदर्शिता, ग्राहक की सहमति और जवाबदेही के साथ AI एजेंट्स को किस तरह अपनाते हैं। स्पष्ट नियमों और मजबूत निगरानी के साथ एजेंटिक AI बैंकिंग सेवाओं को अधिक कुशल, व्यक्तिगत और व्यापक बनाने का बड़ा माध्यम बन सकता है।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...
1.बैंकिंग सेक्टर में AI से क्या फायदा होगा?
AI बैंकों की दक्षता बढ़ाने और ग्राहकों को अधिक तेज व व्यक्तिगत वित्तीय सेवाएं देने में मदद कर सकता है।
2.एजेंटिक AI क्या बदलाव ला सकता है?
यह AI को सिर्फ सिफारिश देने से आगे बढ़ाकर कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लागू करने में सक्षम बना सकता है।
3.AI एजेंट्स के लिए नियम क्यों जरूरी हैं?
पहचान, प्रमाणीकरण, ग्राहक की सहमति और लेनदेन की सीमाओं को स्पष्ट करने के लिए मजबूत नियम जरूरी हैं।
4.SBI पहले से AI का इस्तेमाल कहां कर रहा है?
SBI क्रेडिट आकलन और कैश फ्लो आधारित ऋण देने जैसे क्षेत्रों में AI और मशीन लर्निंग तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है।
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