100 डॉलर पार कच्चा तेल, सपाट खुले सेंसेक्स-निफ्टी; ऑटो और कंज्यूमर शेयरों पर बढ़ा दबाव

खबर सार :-

भारतीय शेयर बाजार की सपाट शुरुआत के बीच महंगा कच्चा तेल निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर पार जाने से ऑटो और कंज्यूमर शेयरों पर दबाव बढ़ा है। निफ्टी के 23,500 से नीचे रहने और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने भी सेंटीमेंट कमजोर किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो GDP ग्रोथ और कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है।
क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार, सपाट बाजार, दबाव में ऑटो कंज्यूमर के शेयर

खबर विस्तार : -

Stock Market News: मुंबई में गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत करीब सपाट रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी मामूली गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। सुबह 9:23 बजे सेंसेक्स 36 अंक यानी 0.05 प्रतिशत फिसलकर 74,727.96 पर था। वहीं, निफ्टी 8.25 अंक यानी 0.01 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ 23,430.00 पर कारोबार कर रहा था। बाजार की शुरुआती चाल में सबसे ज्यादा दबाव ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों पर दिखाई दिया। दोनों सेक्टरों के सूचकांक शुरुआती कारोबार में टॉप लूजर्स में रहे। इसके अलावा निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, इंडिया डिफेंस, कंजप्शन, हेल्थकेयर, रियल्टी, इंफ्रा और मेटल इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

इन सेक्टरों में दिखी मजबूती

दूसरी ओर, कुछ प्रमुख सेक्टरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की। निफ्टी पीएसयू बैंक, ऑयल एंड गैस, पीएसई, एनर्जी, प्राइवेट बैंक और एफएमसीजी इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी चुनिंदा डिफेंसिव और ऊर्जा से जुड़े शेयरों में बनी हुई है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 114 अंक यानी 0.18 प्रतिशत गिरकर 62,479 पर था। इसके विपरीत निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 18 अंक की मामूली बढ़त के साथ 20,055 पर कारोबार कर रहा था।

ग्लोबल बाजारों की कमजोरी से भी दबाव

भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेतों का भी असर पड़ा। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता कमजोर नजर आए। इससे भारतीय निवेशकों के सेंटीमेंट पर दबाव बढ़ा। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। डाओ जोन्स में 0.77 प्रतिशत की कमजोरी रही, जबकि नैस्डैक 0.64 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ।

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23,500 का स्तर बना अहम चुनौती

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक निफ्टी का 23,500 के रेजिस्टेंस स्तर से नीचे आना तकनीकी रूप से कमजोरी का संकेत है। मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में आगे और गिरावट का जोखिम बना हुआ है। इसके साथ ही मैक्रोइकोनॉमिक संकेत भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची कीमतें देश के आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं। इसका असर महंगाई, मार्जिन और आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।

बॉन्ड यील्ड बढ़ने से ब्याज दरों की चिंता

अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.83 प्रतिशत हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची बॉन्ड यील्ड से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है। यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है और इक्विटी बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत की स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत है और चालू खाता घाटा भी नियंत्रण में है। हालांकि, यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो इसका असर भारत की GDP ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है। इस माहौल में निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक बाजारों और निफ्टी के 23,500 के स्तर पर रहेगी। आने वाले सत्रों में इन संकेतकों की दिशा बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)....

1.शेयर बाजार सपाट क्यों खुला?

ग्लोबल बाजारों की कमजोरी, महंगे कच्चे तेल और निफ्टी के 23,500 के नीचे रहने से बाजार पर दबाव रहा।

2.किन शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा?

शुरुआती कारोबार में ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयर टॉप लूजर्स में रहे।

3.महंगे कच्चे तेल से भारत पर क्या असर पड़ेगा?

तेल लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहने पर आयात बिल, कंपनियों की लागत, GDP ग्रोथ और कमाई पर दबाव बढ़ सकता है।

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