वैश्विक तनाव का असर, सातवें दिन भी बाजार पर दबाव जारी; IT शेयरों ने संभाला मोर्चा
खबर सार :-
पश्चिम एशिया का तनाव, महंगा कच्चा तेल और ऊंची बॉन्ड यील्ड फिलहाल भारतीय शेयर बाजार की चाल पर हावी हैं। लगातार सातवें दिन सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव बना रहा, हालांकि आईटी शेयरों ने गिरावट सीमित की। विशेषज्ञों के मुताबिक घरेलू आर्थिक मजबूती, बेहतर कॉरपोरेट आय और घरेलू निवेश बाजार को सहारा दे सकते हैं। फिर भी निकट अवधि में अस्थिरता बने रहने की आशंका है।
खबर विस्तार : -
Indian Stock Market: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार बुधवार को लगातार सातवें कारोबारी दिन दबाव में खुला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरुआती कारोबार में लगभग सपाट रहे, लेकिन बाद में बिकवाली बढ़ने से प्रमुख सूचकांक लाल निशान में चले गए। हालांकि, आईटी शेयरों में खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया और गिरावट को सीमित रखने में मदद की।
बीएसई सेंसेक्स में गिरावट, दबाव बढ़ा
बीएसई सेंसेक्स बुधवार को अपने पिछले बंद स्तर 77,235.46 के मुकाबले 17.41 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 77,218.05 पर खुला। कारोबार आगे बढ़ने के साथ दबाव बढ़ा और सेंसेक्स एक समय 244 अंक यानी 0.31 प्रतिशत फिसलकर 76,991.28 के इंट्रा-डे लो तक पहुंच गया। दिन के कारोबार में इसका उच्चतम स्तर 77,347.81 रहा। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 भी लगभग सपाट खुला। यह पिछले बंद 24,154.90 के मुकाबले 2.85 अंक यानी 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 24,152.05 पर खुला। बाद में सूचकांक में कमजोरी बढ़ी और यह करीब 90 अंक यानी 0.37 प्रतिशत टूटकर 24,065.10 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। निफ्टी का इंट्रा-डे हाई 24,172.85 रहा। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 222.87 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,012.59 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 भी 74 अंक यानी 0.31 प्रतिशत टूटकर 24,080.90 पर था। व्यापक बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.39 प्रतिशत और 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
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सेक्टोरल इंडेक्स में तेजी का असर
क्षेत्रवार प्रदर्शन में आईटी सेक्टर बाजार का मजबूत सहारा बना। निफ्टी आईटी सूचकांक 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में भी 0.59 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। एफएमसीजी सूचकांक 0.20 प्रतिशत चढ़ा, जबकि रियल्टी और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) से जुड़े सूचकांकों में करीब 0.20 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली। ऑयल एंड गैस में भी 0.08 प्रतिशत की मामूली तेजी रही। इसके उलट मेटल और ऑटो शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी मेटल 0.35 प्रतिशत नीचे आया, जबकि निफ्टी ऑटो में 0.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हेल्थकेयर, फार्मा और केमिकल्स से जुड़े सूचकांकों में भी हल्की कमजोरी रही।
क्रूड ऑय़ल की कीमतों में तेजी, ऊंचे स्तर पर बॉन्ड यील्ड
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा दबाव की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे जुड़ी अनिश्चितता ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है। इसका असर महंगाई की आशंकाओं और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर पड़ रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड वर्ष 2007 के बाद के ऊंचे स्तरों तक पहुंचने से वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार अन्य प्रमुख बाजारों की तुलना में अपेक्षाकृत मजबूती दिखा रहा है। इसकी वजह देश की मजबूत आर्थिक बुनियाद, जीडीपी वृद्धि की बेहतर संभावनाएं और घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी मानी जा रही है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो तीन सप्ताह का उच्चतम स्तर है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने के संकेत और अमेरिका द्वारा युद्धविराम अवधि बढ़ाने से इनकार के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ी है।
एक्सपर्ट्स की राय में बाजार का भविष्य
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य होने और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक भारतीय बाजार को बड़े नुकसान से बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए मौजूदा कमजोरी गुणवत्तापूर्ण और मजबूत वृद्धि क्षमता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश का अवसर भी बन सकती है।
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