एफटीए से खुल रहे निर्यात के नए दरवाजे, भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच को मिली रफ्तार

खबर सार :-

मुक्त व्यापार समझौतों का असर अब भारत के निर्यात आंकड़ों और बाजार पहुंच में साफ दिखाई देने लगा है। यूएई और ऑस्ट्रेलिया की सफलता के बाद ईएफटीए और ओमान जैसे नए साझेदार भी संभावनाएं बढ़ा रहे हैं। मूल प्रमाणपत्रों का बढ़ता इस्तेमाल बताता है कि कंपनियां शुल्क रियायतों को अपनाने लगी हैं। सरल प्रक्रियाएं, डिजिटल सुविधाएं और नए बाजार आने वाले वर्षों में निर्यात वृद्धि को मजबूत आधार दे सकते हैं।
एफटीए से भारतीय एक्सपोर्ट को मिली नई उड़ान

खबर विस्तार : -

FTA Boosts India Exports: भारत के हालिया मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) अब देश के निर्यात को नई गति देने लगे हैं। केंद्र सरकार की मंगलवार को जारी फैक्टशीट के मुताबिक, नए एफटीए साझेदार देशों के साथ भारतीय निर्यात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही भारतीय कंपनियां समझौतों के तहत मिलने वाली शुल्क रियायतों का लाभ लेने के लिए प्रेफरेंशियल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं। इससे भारतीय उत्पादों की नए और बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मजबूत हो रही है।

सरकार के अनुसार, हाल के व्यापार समझौतों के बाद भारत के साझेदार देशों के साथ कारोबारी गतिविधियों में स्पष्ट विस्तार देखने को मिला है। निर्यात में शुरुआती बढ़त के साथ अलग-अलग उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ी है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय कारोबारी एफटीए के तहत उपलब्ध अवसरों को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं।

रिकॉर्ड निर्यात से मजबूत हुई तस्वीर

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसमें 441.8 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात शामिल रहा। निर्यात की यह सकारात्मक गति चालू वित्त वर्ष में भी बनी हुई है। अप्रैल-जून 2026 के दौरान भारत का संयुक्त निर्यात 232.73 अरब डॉलर रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 11.37 प्रतिशत अधिक है। सरकार का कहना है कि कुल निर्यात प्रदर्शन में एफटीए साझेदार देशों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। शुरुआती सफलता केवल निर्यात मूल्य में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि शुल्क रियायतों के इस्तेमाल और निर्यात किए जाने वाले उत्पादों की बढ़ती विविधता में भी दिखाई दे रही है।

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यूएई और ऑस्ट्रेलिया बने बड़ी मिसाल

हालिया व्यापार समझौतों से लाभ पाने वाले देशों में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया प्रमुख हैं। यूएई को भारत का निर्यात 37.35 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। वहीं ऑस्ट्रेलिया को भारतीय निर्यात 7.28 अरब डॉलर के स्तर को पार कर गया है। दोनों बाजारों में यह प्रदर्शन संबंधित व्यापार समझौतों की शुरुआती सफलता को दर्शाता है। भारत और यूएई के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) तथा भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (ईसीटीए) वर्ष 2022 से लागू हैं। इन समझौतों के तहत बड़ी संख्या में प्रेफरेंशियल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। इससे पता चलता है कि निर्यातक कम या शून्य सीमा शुल्क के फायदे को हासिल करने के लिए एफटीए का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।

मूल प्रमाणपत्र से मिलता है शुल्क लाभ

किसी एफटीए का फायदा केवल समझौते पर हस्ताक्षर होने से नहीं मिलता। निर्यातक को यह साबित करना होता है कि उसका उत्पाद संबंधित समझौते में तय मूल नियमों (रूल्स ऑफ ओरिजिन) को पूरा करता है। इसके लिए प्रेफरेंशियल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह प्रमाणित करता है कि उत्पाद एफटीए की निर्धारित शर्तों के अनुरूप है और आयातक देश में उसे रियायती या शून्य सीमा शुल्क का लाभ मिल सकता है।

नए समझौतों में भी दिखे सकारात्मक संकेत

सरकार की फैक्टशीट के मुताबिक, भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते (ईएफटीए-टीईपीए) के अक्टूबर 2025 में लागू होने के बाद अब तक 7,885 मूल प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। इसी तरह ओमान के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के जून 2026 में लागू होने के बाद 783 मूल प्रमाणपत्र जारी हुए हैं। सरकार का मानना है कि इन प्रमाणपत्रों की बढ़ती संख्या एफटीए के वास्तविक इस्तेमाल का महत्वपूर्ण संकेत है। निर्यातकों को नए बाजारों तक पहुंच दिलाने और उपलब्ध रियायतों का लाभ लेने में मदद के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है।

डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रिया भी आसान हुई है। इन पहलों का लाभ खासतौर पर छोटे और मध्यम उद्यमों को मिल सकता है। एफटीए के जरिए उन्हें विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने, नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने और लागत कम करने के अवसर मिल रहे हैं। आने वाले समय में जैसे-जैसे भारतीय कंपनियां नियमों और शुल्क रियायतों को बेहतर ढंग से समझेंगी, वैसे-वैसे एफटीए भारत के निर्यात विस्तार का और मजबूत आधार बन सकते हैं।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...

1. भारत के निर्यात को एफटीए से क्या फायदा हो रहा है?

एफटीए के तहत शुल्क रियायत मिलने से भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी होती है और नए विदेशी बाजारों में उनकी पहुंच बढ़ती है।

2. प्रेफरेंशियल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन क्या है?

यह प्रमाणपत्र बताता है कि निर्यात किया गया उत्पाद एफटीए के तय मूल नियमों को पूरा करता है। इसके आधार पर आयातक देश में कम या शून्य सीमा शुल्क का लाभ मिल सकता है।

3. किन एफटीए साझेदार देशों में भारत को शुरुआती सफलता मिली है?

यूएई और ऑस्ट्रेलिया प्रमुख उदाहरण हैं। इसके अलावा ईएफटीए और ओमान के साथ नए समझौतों में भी मूल प्रमाणपत्रों के बढ़ते इस्तेमाल से सकारात्मक संकेत मिले हैं।

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