कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से शेयर बाजार पस्त, सेंसेक्स-निफ्टी में 0.34% तक गिरावट
खबर सार :-
आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से तय होगी। फिलहाल महंगा तेल और भू-राजनीतिक जोखिम सेंसेक्स-निफ्टी पर दबाव बनाए हुए हैं। हालांकि, मजबूत जीडीपी वृद्धि की उम्मीद और कंपनियों की बेहतर आय की संभावना बाजार के लिए सकारात्मक आधार तैयार कर रही है।
खबर विस्तार : -
Stock Market Crashed: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल बिगाड़ दी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ खुले, लेकिन जल्द ही बिकवाली के दबाव में आ गए। इस दौरान सेंसेक्स 273 अंक और निफ्टी 81 अंक तक टूट गया। महंगे तेल, वैश्विक अनिश्चितता और कमजोर विदेशी संकेतों ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला है।
शुरुआती बढ़त के बाद दबाव में आया बाजार
सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 78,154.25 से 109.08 अंक यानी 0.13 प्रतिशत बढ़कर 78,263.33 पर खुला। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 भी 0.75 अंक की मामूली बढ़त के साथ 24,472.45 पर खुला। हालांकि, शुरुआती मजबूती ज्यादा देर कायम नहीं रह सकी। बाद के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट बढ़ी। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 131 अंक यानी 0.16 प्रतिशत नीचे 78,040 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 0.15 प्रतिशत फिसलकर 24,435 के आसपास पहुंच गया। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 273 अंक यानी 0.34 प्रतिशत टूटकर 77,881 के निचले स्तर तक गया। निफ्टी 50 भी 81 अंक यानी 0.33 प्रतिशत गिरकर 24,390 के दिन के निचले स्तर पर पहुंचा।
मेटल और पीएसयू बैंक में मजबूती, दबाव में एफएमसीजी-आईटी
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.09 प्रतिशत कमजोर रहा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.07 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज हुई। सेक्टोरल प्रदर्शन में निफ्टी मेटल इंडेक्स 0.86 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा। निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.60 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.23 प्रतिशत की मजबूती रही। इसके उलट एफएमसीजी इंडेक्स 0.64 प्रतिशत, रियल्टी 0.58 प्रतिशत और हेल्थकेयर 0.41 प्रतिशत तक कमजोर रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स में भी 0.38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी50 के प्रमुख कमजोर शेयरों में मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट, अपोलो हॉस्पिटल, बजाज फिनसर्व, टाटा कंज्यूमर, डॉ. रेड्डीज और टाइटन शामिल रहे।
89 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। ऊपरी स्तरों पर लगातार बिकवाली और ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतें बाजार की तेजी में बड़ी बाधा बन रही हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 89.87 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.14 प्रतिशत चढ़कर 84.14 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितता तेल बाजार के लिए अहम जोखिम बनी हुई है। यदि तनाव लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकता है।
8% GDP ग्रोथ का अनुमान दे रहा बाजार को उम्मीद
महंगे तेल के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से सकारात्मक संकेत बाजार को कुछ सहारा दे रहे हैं। एसबीआई रिसर्च ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक का अनुमान 6.7 प्रतिशत है। बाजार जानकारों के मुताबिक यदि अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत की दर से बढ़ती है, तो कंपनियों की आय में अपेक्षा से बेहतर सुधार संभव है। इससे मौजूदा वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार को मध्यम अवधि में मजबूती मिल सकती है।
एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख
एशियाई बाजारों में बुधवार को मिश्रित कारोबार हुआ। जापान का निक्केई मामूली बढ़त में रहा, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग करीब 1 प्रतिशत कमजोर हुआ। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4 प्रतिशत से अधिक उछला। इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही थी। नैस्डैक 0.6 प्रतिशत और एसएंडपी 500 करीब 0.32 प्रतिशत गिरकर बंद हुए थे।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)....
1. बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट आई?
सेंसेक्स दिन के निचले स्तर पर 273 अंक यानी 0.34% गिरा, जबकि निफ्टी 81 अंक यानी 0.33% तक फिसला।
2. शेयर बाजार में गिरावट की मुख्य वजह क्या रही?
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत प्रमुख कारण रहे।
3. ब्रेंट क्रूड की कीमत कितनी पहुंच गई?
ब्रेंट क्रूड करीब 1% बढ़कर 89.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
4. क्या भारतीय बाजार के लिए कोई सकारात्मक संकेत भी हैं?
हां। एसबीआई रिसर्च ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8% रहने का अनुमान जताया है, जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।
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