​​​​​​​अमेरिका में टैरिफ की आशंका से तांबा की सप्लाई का रुख बदला, दुनिया के दूसरे बाजारों में घटने लगी उपलब्धता

खबर सार :-

अमेरिकी टैरिफ की आशंका ने तांबे के वैश्विक कारोबार का समीकरण बदल दिया है। अमेरिका की ओर सप्लाई बढ़ने से LME नेटवर्क में उपलब्धता घटने और कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा है। रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बीच पुरानी खदानों से घटता उत्पादन और डेटा सेंटर, ऊर्जा व बिजली ग्रिड से बढ़ती मांग भी चिंता बढ़ा रही है। अब अमेरिकी टैरिफ पर अंतिम फैसला तांबे की अगली दिशा तय करने में अहम होगा।
टैरिफ की आहट से तांबा हुआ ‘लाल’, LME पर ऑल-टाइम हाई पर पहुंची कीमत

खबर विस्तार : -

Copper price:  अमेरिका की ओर से रिफाइंड तांबे पर टैरिफ लगाए जाने की आशंका ने वैश्विक कॉपर मार्केट में हलचल बढ़ा दी है। कारोबारियों द्वारा संभावित शुल्क से पहले तांबे की खेप अमेरिका भेजे जाने के कारण अन्य बाजारों में उपलब्धता घट रही है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा और लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तांबा रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। LME पर तीन महीने के वायदा अनुबंध में तांबे की कीमत 0.8 प्रतिशत बढ़कर 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। इसने जनवरी में दर्ज 14,527.50 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। तांबे की कीमतों में जारी तेजी इस साल के दौरान कमोडिटी बाजार में इसके मजबूत प्रदर्शन को दर्शाती है।

एक साल में करीब 47% चढ़ा तांबा

तांबे की कीमत में इस साल अब तक करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं, पिछले 12 महीनों में इसमें लगभग 47 प्रतिशत का उछाल आया है। यानी एक साल के भीतर औद्योगिक धातु के भाव में तेज बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका की टैरिफ नीति से जुड़ी अनिश्चितता ने इस तेजी को और हवा दी है। घरेलू बाजार में भी तांबे की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सितंबर डिलीवरी वाला तांबा वायदा सुबह 10:30 बजे तक 1.21 प्रतिशत यानी 16.8 रुपये की तेजी के साथ 1,403.50 रुपये प्रति किलोग्राम के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया।

अमेरिका की ओर मुड़ रही तांबे की सप्लाई

बाजार में मौजूदा तेजी का एक बड़ा कारण तांबे की सप्लाई का भौगोलिक रूप से बदलता प्रवाह है। कारोबारियों को आशंका है कि अमेरिका रिफाइंड तांबे पर टैरिफ लगा सकता है। ऐसे में संभावित शुल्क से पहले अमेरिका में तांबा भेजने की होड़ बढ़ी है। इससे अमेरिकी बाजार में स्टॉक बढ़ रहा है, जबकि LME के नेटवर्क से उपलब्ध तांबे की मात्रा कम होती जा रही है। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर तांबे का कुल भंडार अपेक्षाकृत ऊंचा होने के बावजूद बाजार में उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। तांबे का स्टॉक अमेरिका में केंद्रित होने से दूसरे बाजारों में तत्काल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।

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डिमांड से ज्यादा सप्लाई फ्लो ने बढ़ाए भाव

विशेषज्ञों के मुताबिक तांबे में हालिया तेजी को केवल अंतिम उपभोक्ताओं की मांग में अचानक आई वृद्धि से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। मौजूदा उछाल में टैरिफ से जुड़ा सप्लाई फ्लो ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कारोबारियों की रणनीति और अमेरिकी बाजार में स्टॉक जमा होने से वैश्विक कॉपर मार्केट का संतुलन प्रभावित हुआ है। हाजिर तांबा अभी भी तीन महीने के वायदा भाव की तुलना में प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है। कमोडिटी बाजार में इस स्थिति को ‘बैकवर्डेशन’ कहा जाता है। आम तौर पर यह संकेत देता है कि निकट अवधि में किसी कमोडिटी की तत्काल उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है और खरीदार तत्काल डिलीवरी के लिए ज्यादा कीमत देने को तैयार हैं।

पुरानी खदानें और नई मांग बनी बड़ी चुनौती

तांबे की कीमतों में तेजी के पीछे केवल अमेरिका की टैरिफ ही नहीं, बल्कि लंबे समय से बना सप्लाई-डिमांड असंतुलन भी अहम है। दुनिया की कई पुरानी तांबा खदानों में उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। दूसरी तरफ डेटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और बिजली ग्रिड के विस्तार से तांबे की मांग बढ़ रही है। तांबा बिजली का बेहतरीन चालक होने के कारण इलेक्ट्रिफिकेशन, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीकी ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए भविष्य में इन क्षेत्रों से बढ़ने वाली मांग के मुकाबले नई खदानों से पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना उद्योग के लिए चुनौती बना हुआ है।

वैश्विक खदान उत्पादन में भी आई गिरावट

रिपोर्टों के मुताबिक 2026 की पहली छमाही में वैश्विक तांबा खदान उत्पादन करीब 1 प्रतिशत घटा, जबकि कॉन्संट्रेट उत्पादन में 2.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। उत्पादन में यह कमी ऐसे समय आई है, जब तांबे की मांग को लेकर दीर्घकालिक उम्मीदें मजबूत बनी हुई हैं। इस बीच अमेरिकी वाणिज्य विभाग को रिफाइंड तांबे पर टैरिफ लगाने की जरूरत को लेकर व्हाइट हाउस को सलाह देनी थी। इसके लिए 30 जून की समयसीमा तय की गई थी, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। बाजार अब इस फैसले का इंतजार कर रहा है। यदि अमेरिका की ओर से टैरिफ लागू किया जाता है, तो वैश्विक तांबा कारोबार में सप्लाई फ्लो और कीमतों पर और असर पड़ सकता है। फिलहाल रिकॉर्ड कीमतें बाजार में आपूर्ति की तात्कालिक चिंता और भविष्य की मजबूत मांग, दोनों को प्रतिबिंबित कर रही हैं।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...

1. तांबे की कीमत रिकॉर्ड हाई पर क्यों पहुंची?

अमेरिका द्वारा रिफाइंड तांबे पर टैरिफ लगाने की आशंका के कारण कारोबारी अमेरिका में सप्लाई बढ़ा रहे हैं। इससे अन्य बाजारों में उपलब्धता घटने से कीमतों को मजबूती मिली है।

2. LME पर तांबे की कीमत कितने स्तर पर पहुंची?

LME पर तीन महीने का तांबा वायदा 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया।

3. घरेलू बाजार में तांबे का भाव कितना बढ़ा?

MCX पर सितंबर तांबा वायदा 1.21 प्रतिशत यानी 16.8 रुपये बढ़कर 1,403.50 रुपये प्रति किलोग्राम के इंट्राडे हाई पर पहुंचा।

4. आगे तांबे की कीमतों पर किन कारकों का असर पड़ेगा?

अमेरिकी टैरिफ पर फैसला, वैश्विक तांबा उत्पादन, खदानों से सप्लाई, डेटा सेंटर और बिजली ग्रिड से मांग तथा वैश्विक बाजारों में उपलब्धता कीमतों की दिशा तय करने में अहम रहेंगे।

 

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