जन्माष्टमी पर बाजार में कृष्ण-रंग, 40 हजार करोड़ पार होगा कारोबार; लोकल उत्पादों की बढ़ी मांग
खबर सार :-
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष आस्था के साथ कारोबार को भी नई रफ्तार देती दिख रही है। 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के संभावित व्यापार से छोटे कारोबारियों, कारीगरों, किसानों, डेयरी उत्पादकों और सेवा क्षेत्र को फायदा मिल सकता है। धार्मिक पर्यटन, डिजिटल कॉमर्स और लोकल उत्पादों की बढ़ती मांग इस आर्थिक गतिविधि को और मजबूत कर रही है। जन्माष्टमी भारतीय त्योहारों की व्यापक आर्थिक ताकत का बड़ा उदाहरण बन रही है।
खबर विस्तार : -
Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियों के बीच देशभर के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। घरों और मंदिरों की सजावट से लेकर पूजा सामग्री, मिठाइयों, डेयरी उत्पादों और भगवान कृष्ण से जुड़े सामानों की खरीदारी तेज हो गई है। इस बार जन्माष्टमी केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि कारोबार के लिहाज से भी बड़ा अवसर बनने जा रही है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के अनुमान के मुताबिक, इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार होने की उम्मीद है।
सीएआईटी के अनुसार, यह अनुमान अलग-अलग क्षेत्रों में होने वाली संभावित बिक्री, घरों और धार्मिक आयोजनों के लिए खरीदारी, मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों पर होने वाले खर्च, बड़े पैमाने पर होने वाले उत्सव और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखकर लगाया गया है।
तीन साल में कारोबार में बड़ा उछाल
जन्माष्टमी के कारोबार में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। सीएआईटी के मुताबिक, 2024 में जन्माष्टमी के दौरान व्यापार करीब 25 हजार करोड़ रुपये रहा था। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया। अब 2026 में इसमें करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है और कारोबार 40 हजार करोड़ रुपये के पार जाने की उम्मीद है। ग्राहकों की बढ़ती मांग, उत्पादों और सेवाओं की कीमतों में बदलाव, त्योहारों के बड़े होते आयोजन, धार्मिक पर्यटन में तेजी और मॉडर्न रिटेल तथा डिजिटल कॉमर्स के विस्तार को इस वृद्धि की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
बैंकिंग नहीं, इस बार त्योहार बाजार की 'कमाई'
सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव केवल भक्ति और आस्था का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों का अनोखा संगम है। उनके मुताबिक जन्माष्टमी ऐसा पर्व है, जहां धार्मिक आस्था सीधे तौर पर व्यापार और रोजगार के अवसरों में बदलती दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' आह्वान का असर त्योहारों से जुड़े बाजारों में दिखाई दे रहा है। ग्राहक भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई को फायदा मिल रहा है।
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माखन-मिश्री से मुकुट तक बढ़ी मांग
जन्माष्टमी के मौके पर इस साल कई तरह के उत्पादों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इनमें माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद, मिठाइयां, फल, सूखे मेवे और पूजा सामग्री प्रमुख हैं। इसके अलावा फूलों की मालाएं, सजावटी तोरण, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी, मोर पंख, आभूषण और त्योहार से जुड़े खास कपड़ों की भी अच्छी बिक्री होने की संभावना है। मंदिरों और घरों की सजावट के लिए इस्तेमाल होने वाले स्थानीय उत्पादों की मांग से छोटे कारोबारियों और कारीगरों को भी फायदा मिलेगा।
त्योहार से जुड़ी लाखों आजीविकाएं
जन्माष्टमी का आर्थिक असर सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं है। इस त्योहार से किसान, डेयरी उत्पादक, फूल उत्पादक, मिठाई कारोबारी, कपड़ा व्यापारी, मूर्तिकार, कारीगर और महिला उद्यमी सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े हैं। इसके साथ ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, होटल और रेस्टोरेंट संचालक तथा विभिन्न सेवा प्रदाताओं के लिए भी यह कमाई का महत्वपूर्ण अवसर बनता है। त्योहार के दौरान होने वाला खर्च अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है। यही वजह है कि सीएआईटी भारतीय त्योहारों को जमीनी और विकेंद्रीकृत 'सनातन अर्थव्यवस्था' का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।
धार्मिक पर्यटन से कारोबार को अतिरिक्त बूस्टर
जन्माष्टमी पर धार्मिक पर्यटन भी आर्थिक गतिविधियों को गति देता है। मथुरा-वृंदावन, द्वारका और नाथद्वारा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के अलावा दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद, इंदौर और देश के अन्य हिस्सों में भी बड़े आयोजन होते हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से होटल, परिवहन, रेस्टोरेंट, प्रसाद, फूल, पूजा सामग्री, स्थानीय हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ती है। इससे धार्मिक स्थलों के आसपास के छोटे कारोबारियों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं की आय में भी इजाफा हो सकता है।
त्योहारों से बनता है बड़ा आर्थिक नेटवर्क
खंडेलवाल के मुताबिक भारतीय त्योहारों को केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन मानना इनके व्यापक प्रभाव को सीमित करके देखने जैसा है। दिवाली, होली, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, करवा चौथ और छठ पूजा जैसे पर्व लाखों व्यापारियों, कारीगरों, किसानों, महिला उद्यमियों और स्वरोजगार करने वालों के लिए आर्थिक अवसर पैदा करते हैं। त्योहारों पर होने वाला खर्च केवल उपभोग नहीं है। यह उत्पादन, बिक्री, परिवहन, पर्यटन और सेवाओं के जरिए समाज के विभिन्न वर्गों तक आय और रोजगार पहुंचाता है। इसी कारण जन्माष्टमी का बढ़ता कारोबार भारतीय धार्मिक अर्थव्यवस्था के विस्तार का एक अहम संकेत माना जा रहा है।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)…
1. इस साल जन्माष्टमी पर कितने कारोबार की उम्मीद है?
इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार का अनुमान है।
2. जन्माष्टमी पर किन सामानों की मांग सबसे ज्यादा है?
माखन-मिश्री, दूध-दही, मिठाइयां, पूजा सामग्री, फूल, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी और सजावटी सामान की मांग अधिक रहने की उम्मीद है।
3. जन्माष्टमी से किन कारोबारियों को फायदा होता है?
किसानों, डेयरी उत्पादकों, मिठाई कारोबारियों, कारीगरों, फूल विक्रेताओं, दुकानदारों, होटल-रेस्टोरेंट और परिवहन क्षेत्र को जन्माष्टमी से आर्थिक लाभ मिलता है।
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