भारत की रेटिंग में बड़ा उछाल, JCR ने BBB+ से बढ़ाकर किया ‘A- स्टेबल’, अर्थव्यवस्था पर जताया भरोसा

खबर सार :-

JCR का भारत की रेटिंग को ‘A- स्टेबल’ करना अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद पर भरोसा बढ़ाता है। तेज GDP वृद्धि, मजबूत बैंकिंग सेक्टर, नियंत्रित महंगाई और नीतिगत सुधार इसके प्रमुख आधार हैं। पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत विकास दर ने भी भारत की आर्थिक क्षमता साबित की है। हालांकि वैश्विक तनाव और खाद्य महंगाई जैसी चुनौतियों पर आगे भी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
भारत की रेटिंग में बड़ा उछाल, JCR ने बढ़ाकर किया ‘A- स्टेबल’

खबर विस्तार : -

India Credit Rating: भारत के आर्थिक मोर्चे पर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (JCR) ने भारत की फॉरेन करेंसी लॉन्ग-टर्म इश्यूअर रेटिंग और लोकल करेंसी लॉन्ग-टर्म इश्यूअर रेटिंग को ‘BBB+’ से बढ़ाकर ‘A- स्टेबल’ कर दिया है। एजेंसी ने रेटिंग में इस सुधार के पीछे भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज और स्थिर विकास दर को प्रमुख वजह बताया है।

JCR ने अपने नोट में कहा कि भारत की आर्थिक विकास दर करीब 7 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। अर्थव्यवस्था को मुख्य रूप से निजी खपत और सरकारी निवेश से मजबूती मिल रही है। एजेंसी के मुताबिक, इन दोनों क्षेत्रों की मजबूत स्थिति ने घरेलू मांग को बनाए रखने के साथ आर्थिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभाई है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और GST से मजबूत हुई अर्थव्यवस्था

रेटिंग एजेंसी ने भारत सरकार की आर्थिक नीतियों की भी सराहना की है। JCR के अनुसार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के लागू होने से देश की आर्थिक नींव पहले की तुलना में मजबूत हुई है। इन सुधारों ने कारोबार और आर्थिक गतिविधियों के लिए अधिक एकीकृत माहौल तैयार किया है। JCR ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। वहीं, वित्त वर्ष 2027 में भी विकास दर 6 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है। एजेंसी के मुताबिक, इनकम टैक्स और GST में कटौती जैसे कदमों से आर्थिक गतिविधियों और खपत को अतिरिक्त सहारा मिल रहा है।

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महंगाई पर नजर, फिर भी लक्ष्य के भीतर

हालांकि, वैश्विक स्तर पर चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। JCR ने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण खाद्य उत्पादों की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इससे महंगाई में कुछ तेजी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद महंगाई फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित लक्ष्य के भीतर बनी हुई है। रेटिंग एजेंसी का यह आकलन भारत की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महंगाई को नियंत्रण में रखते हुए आर्थिक वृद्धि बनाए रखना देश की क्रेडिट प्रोफाइल के लिए सकारात्मक संकेत है।

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बैंकिंग सेक्टर की भी JCR ने की तारीफ

JCR ने भारत के बैंकिंग सेक्टर को भी मजबूत बताया है। एजेंसी के अनुसार, भारतीय बैंकों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और नॉन-परफॉर्मिंग लोन (NPL) अनुपात 2 प्रतिशत से नीचे आ गया है। इसके पीछे RBI की कड़ी निगरानी और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के लागू होने को महत्वपूर्ण कारण माना गया है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था से अर्थव्यवस्था में ऋण प्रवाह बेहतर रहने और निवेश को समर्थन मिलने की उम्मीद रहती है। ऐसे में बैंकिंग सेक्टर की सुधरी स्थिति भारत की क्रेडिट रेटिंग को मजबूती देने वाले कारकों में शामिल हो गई है।

पहली तिमाही में 7.8% की दमदार ग्रोथ

भारत की आर्थिक मजबूती का ताजा उदाहरण वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के आंकड़े भी हैं। अप्रैल-जून तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही। यह पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में दर्ज 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर से 0.9 प्रतिशत अधिक है। पहली तिमाही का यह प्रदर्शन RBI के अनुमान से भी बेहतर रहा। अगस्त की शुरुआत में मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की घोषणा करते हुए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 7 प्रतिशत रखा था। इस तरह वास्तविक वृद्धि अनुमान से 0.8 प्रतिशत अधिक रही। JCR की ओर से रेटिंग बढ़ाया जाना और उम्मीद से बेहतर GDP आंकड़े दोनों संकेत देते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत गति के साथ आगे बढ़ रही है।

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