लेनदेन की संख्या ने बनाया नया रिकॉर्ड, सालाना आधार पर वैल्यू 20% और ट्रांजैक्शन 22% बढ़े

खबर सार :-

अगस्त 2026 में यूपीआई ने लेनदेन की संख्या के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया। 2,451 करोड़ ट्रांजैक्शन के साथ कुल भुगतान मूल्य 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल से 20 फीसदी अधिक है। यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता भारत के डिजिटल भुगतान विस्तार को दिखाती है। 11 देशों में इसकी स्वीकार्यता और एक दशक में 4,000 गुना से अधिक बढ़ा लेनदेन मूल्य इसकी मजबूत वैश्विक पहचान दर्शाता है।
UPI ने रचा नया रिकॉर्ड! अगस्त में 2,451 करोड़ ट्रांजैक्शन

खबर विस्तार : -

UPI Record Transaction: भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। अगस्त 2026 में यूपीआई के जरिए 29.82 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए। यह आंकड़ा इस साल मई और जुलाई में दर्ज करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब है। वहीं, ट्रांजैक्शन की संख्या ने नया रिकॉर्ड कायम किया है।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में यूपीआई के जरिए कुल 2,451 करोड़ लेनदेन हुए। जुलाई में यह आंकड़ा 2,366 करोड़ था। यानी एक महीने में ट्रांजैक्शन की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून में 2,272 करोड़ और मई में 2,320 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए थे।

सालाना आधार पर 20% बढ़ा लेनदेन मूल्य

अगस्त 2026 में यूपीआई लेनदेन का कुल मूल्य पिछले साल के मुकाबले भी तेजी से बढ़ा। अगस्त 2025 में यूपीआई के जरिए 24.85 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे। इस लिहाज से इस साल अगस्त में लेनदेन मूल्य में करीब 20 फीसदी की सालाना वृद्धि हुई है। ट्रांजैक्शन की संख्या में भी मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली। अगस्त 2025 में यूपीआई से 1,963 करोड़ लेनदेन हुए थे, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 2,451 करोड़ हो गए। इस तरह सालाना आधार पर लेनदेन की संख्या में करीब 22 फीसदी का इजाफा हुआ।

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ट्रांजैक्शन वॉल्यूम ने बनाया नया रिकॉर्ड

यूपीआई की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक अगस्त में लेनदेन की संख्या का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना है। जुलाई में 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन के बाद अगस्त में यह संख्या बढ़कर 2,451 करोड़ हो गई। इससे पता चलता है कि देश में छोटे-बड़े भुगतान के लिए डिजिटल माध्यमों पर लोगों की निर्भरता लगातार बढ़ रही है। मई में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 2,320 करोड़ और जून में 2,272 करोड़ रही थी। अगस्त के आंकड़े इन दोनों महीनों के मुकाबले भी ज्यादा हैं। हालांकि, कुल लेनदेन मूल्य के मामले में मई और जुलाई का 29.9 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा अब भी मामूली अंतर से आगे है।

11 देशों में स्वीकार किया जा रहा UPI

भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब देश की सीमाओं से बाहर भी अपनी पहचान बना चुका है। यूपीआई को वर्तमान में 11 देशों में स्वीकार किया जाता है। उज्बेकिस्तान इसमें शामिल होने वाला सबसे नया देश है। इसके अलावा सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और यूनान में भी यूपीआई को भुगतान के लिए स्वीकार किया जाता है। विदेशों में यूपीआई की स्वीकार्यता बढ़ना भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल की अंतरराष्ट्रीय पहुंच को दर्शाता है।

10 साल में 4 हजार गुना से ज्यादा बढ़ा मूल्य

यूपीआई की शुरुआत भारत में 25 अगस्त 2016 को हुई थी। इसके बाद इसने देश के डिजिटल भुगतान के तरीके को बड़े स्तर पर बदल दिया। यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन का मूल्य वित्त वर्ष 2016-17 में महज 0.07 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी लगभग एक दशक में यूपीआई के लेनदेन मूल्य में 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

रियल टाइम भुगतान ने बदली तस्वीर

NPCI, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और भारतीय बैंक संघ (IBA) की संयुक्त पहल के तहत विकसित भुगतान ढांचे का अहम हिस्सा है। NPCI भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए शीर्ष संस्थाओं में शामिल है और यूपीआई का संचालन करता है। यूपीआई के जरिए लोग एक-दूसरे को या दुकानदारों और अन्य व्यापारियों को रियल टाइम भुगतान कर सकते हैं। आसान प्रक्रिया, तेज भुगतान और व्यापक स्वीकार्यता ने इसे देश में रोजमर्रा के डिजिटल लेनदेन का प्रमुख माध्यम बना दिया है। अगस्त के ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार अभी भी तेज गति से जारी है।

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