विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और सोने की मजबूत खरीदारी से भारत का फॉरेक्स रिजर्व रिकॉर्ड 729.33 अरब डॉलर पर पहुंचा

खबर सार :-

भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार 12.4 अरब डॉलर की भारी बढ़त के साथ 729.33 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और गोल्ड रिजर्व में आई तेजी ने इस ऐतिहासिक वृद्धि में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 729.33 अरब डॉलर के नए रिकॉर्ड पर

खबर विस्तार : -

New Delhi : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 21 अगस्त 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.4 अरब डॉलर की बड़ी छलांग लगाकर 729.33 अरब डॉलर के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इससे पहले देश का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी 2026 में 728.5 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, जिसे अब पार कर लिया गया है। इस हालिया बढ़ोतरी में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और स्वर्ण भंडार का सबसे बड़ा योगदान रहा है। पूंजी प्रवाह में आई तेजी और केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए वित्तीय कदमों के कारण देश की बाहरी आर्थिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत होकर उभरी है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और गोल्ड रिजर्व में जोरदार उछाल

फॉरेक्स रिजर्व में हुई इस कुल वृद्धि में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) का हिस्सा सबसे अधिक रहा। यह घटक कुल मुद्रा भंडार का सबसे मुख्य आधार माना जाता है। समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 9.482 अरब डॉलर बढ़कर 591.333 अरब डॉलर के स्तर पर आ गईं। इसके साथ ही देश के स्वर्ण भंडार (गोल्ड रिजर्व) के मूल्य में भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई है। इस दौरान भारत का सोना भंडार 2.801 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के साथ 114.218 अरब डॉलर हो गया, जिससे रिजर्व बैंक के पास मौजूद संपत्तियों का ढांचा और अधिक मजबूत हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के पास रखे भारत के कोष में भी सुधार देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) होल्डिंग 112 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.852 अरब डॉलर हो गई है। वहीं, आईएमएफ में भारत की रिजर्व ट्रेंच पोजीशन में भी 26 मिलियन डॉलर का इजाफा दर्ज किया गया, जिससे यह बढ़कर 4.925 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गई। ये सभी घटक मिलकर देश की कुल वित्तीय ताकत को प्रदर्शित करते हैं।

आरबीआई के नीतिगत उपाय और विदेशी पूंजी का आगमन

इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल के महीनों में उठाए गए महत्वपूर्ण वित्तीय कदम माने जा रहे हैं। जून 2026 की शुरुआत में केंद्रीय बैंक ने देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुछ विशेष घोषणाएं की थीं। इनमें गैर-आवासीय भारतीयों (एनआरआई) के लिए विशेष जमा योजनाएं शामिल थीं। इन नीतियों के प्रभावी होने से 21 अगस्त तक देश के भीतर कुल 72.8 अरब डॉलर का भारी विदेशी निवेश आया। इस बड़े पैमाने पर आए धन ने भारत के भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) को काफी राहत दी है। इससे देश को लगातार तीसरे साल संभावित वित्तीय घाटे से उबारने में मदद मिली है। विदेश से आए मजबूत डॉलर प्रवाह और आरबीआई के समय पर किए गए प्रबंधन के चलते फॉरेक्स रिजर्व को यह नया ऐतिहासिक स्तर हासिल हुआ है।

रुपये को मिलेगी मजबूती, लेकिन परिचालन लागत की चुनौती भी बरकरार

 

मुद्रा स्थिरता और आयात क्षमता

विदेशी मुद्रा भंडार के इस स्तर पर पहुंचने से रिजर्व बैंक को बाजार में भारतीय रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए अधिक वित्तीय क्षमता मिलेगी। मई 2026 में अपने सबसे निचले स्तर पर जाने के बाद से भारतीय रुपये में अब तक लगभग 1.7 प्रतिशत तक की वापसी देखी गई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी भारतीय मुद्रा पर दबाव डाल रही हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।

लागत और जोखिम का गणित

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए लागू की गई योजनाओं की अपनी एक लागत भी होती है। आरबीआई को वाणिज्यिक बैंकों के लिए हेजिंग लागत का एक हिस्सा वहन करना पड़ता है। वर्ष 2013 के समय की तुलना में इस समय अमेरिका में ब्याज दरें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे ऐसे कार्यक्रमों को चलाने की कुल लागत में बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद, यह बड़ा रिजर्व किसी भी अचानक पैदा होने वाले अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट के समय ढाल की तरह काम करेगा।

भारत की आयात क्षमता को कई महीनों के लिए सुरक्षित करता है विदेशी मुद्रा भंडार

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के पास उपलब्ध वह कुल विदेशी मुद्रा और संपत्ति होती है, जिसका उपयोग वह अंतरराष्ट्रीय देनदारियों को चुकाने, आवश्यक वस्तुओं के आयात का भुगतान करने और अपनी राष्ट्रीय मुद्रा के मूल्य में आ रही अस्थिरता को थामने के लिए करता है। भारत के फॉरेक्स रिजर्व में मुख्य रूप से चार चीजें शामिल होती हैं: विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (जैसे डॉलर, यूरो, पाउंड आदि), स्वर्ण भंडार, आईएमएफ में एसडीआर और रिजर्व ट्रेंच पोजीशन। अगर बीते कुछ वर्षों के रुझान को देखें तो भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरता रहा है। वैश्विक महामारी और उसके बाद उपजे वैश्विक तनावों के कारण जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमोडिटीज और ईंधन के दाम तेजी से बढ़े थे, तब आयात बिल बढ़ने से रिजर्व पर दबाव देखा गया था। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक ने बाजार में जरूरत के हिसाब से डॉलर बेचकर रुपये में बहुत अधिक गिरावट को रोकने का प्रयास किया।

इसके बाद, जब वैश्विक वित्तीय बाजारों में स्थिति धीरे-धीरे संभलने लगी और भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति (मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स) मजबूत हुई, तो विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों में पुनः पैसा लगाना शुरू किया। चालू वर्ष 2026 में फरवरी के महीने में फॉरेक्स रिजर्व 728.5 अरब डॉलर के अपने पिछले उच्चतम स्तर पर पहुंचा था। हालांकि बाद के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण इसमें थोड़ी गिरावट देखी गई थी, लेकिन जून 2026 में रिजर्व बैंक द्वारा एनआरआई जमा और पूंजी आकर्षित करने के विशेष उपायों के बाद स्थिति तेजी से बदली। नतीजतन, 21 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह तक भारत ने 729.33 अरब डॉलर का आंकड़ा छूकर नया इतिहास रच दिया। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विशाल भंडार न केवल भारत की आयात क्षमता को कई महीनों के लिए सुरक्षित करता है, बल्कि वैश्विक रेटिंग एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच भारत की साख तथा भरोसे को भी काफी बढ़ाता है।

यह भी पढ़ेंः- प्याज की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा कदम, 35 रुपये किलो में शुरू हुई खुदरा बिक्री

अन्य प्रमुख खबरें