सीमा शुल्क से बैंकिंग तक बड़े सुधार की तैयारी, ‘विकसित भारत 2047’ को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार
खबर सार :-
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सीमा शुल्क और बैंकिंग सुधारों को ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में अहम कदम बताया है। रिस्क आधारित आयात स्क्रीनिंग से हाई-रिस्क माल की जांच मजबूत और कम जोखिम वाले कंसाइनमेंट की मंजूरी तेज हो सकती है। बैंकिंग सेक्टर पर हाई-लेवल कमेटी भविष्य की जरूरतों पर सुझाव देगी। सरकार ने अनुपालन बोझ घटाने के लिए 1,000 से अधिक कानून हटाने और 40,000 नियम सरल बनाने की बात कही है।
खबर विस्तार : -
Viksit Bharat 2047: भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत केंद्र सरकार सुधारों के अगले चरण पर तेजी से काम कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार नए सीमा शुल्क और बैंकिंग सुधारों के जरिए कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित बदलावों में रिस्क आधारित आयात स्क्रीनिंग, ऑटोमैटिक क्लीयरेंस और बैंकिंग सेक्टर की भूमिका को मजबूत करना प्रमुख है।
हाई-रिस्क आयात पर बढ़ेगी नजर
जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक से इतर एक विशेष इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कराधान के क्षेत्र में सरकार पहले ही कई महत्वपूर्ण बदलाव कर चुकी है। अब सीमा शुल्क व्यवस्था में सुधारों का अगला चरण आगे बढ़ाया जाएगा। सीतारमण ने कहा कि भारतीय बंदरगाहों से आयातित सामान की आवाजाही को ज्यादा सुगम बनाने पर सरकार का विशेष ध्यान है। इसके लिए ऐसे स्कैनर लगाने का प्रस्ताव है, जिनकी मदद से सिर्फ ज्यादा जोखिम वाले आयात की विस्तृत जांच की जा सकेगी।
बाकी कंसाइनमेंट को मिलेगी तेज मंजूरी
प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा कम जोखिम वाले आयात को हो सकता है। सरकार की योजना के तहत हाई-रिस्क कंसाइनमेंट को स्कैनर और जांच प्रक्रिया से गुजारा जाएगा, जबकि कम जोखिम वाले माल को ऑटोमैटिक तरीके से मंजूरी देने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे सीमा शुल्क अधिकारियों को अपने संसाधनों का इस्तेमाल ज्यादा जोखिम वाले आयात पर केंद्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही कारोबारियों के लिए क्लीयरेंस में लगने वाला समय कम हो सकता है और बंदरगाहों पर माल की भीड़ घटाने में भी मदद मिल सकती है। वित्त मंत्री ने कहा कि सीमा शुल्क के क्षेत्र में कई सुधार किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्कैनर लगाने या ऑटोमैटिक मंजूरी की प्रस्तावित व्यवस्था लागू करने के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई।
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बैंकिंग सेक्टर के लिए बनेगी नई दिशा
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने बैंकिंग सिस्टम और देश के विकास लक्ष्यों के बीच बेहतर तालमेल पर विचार करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी गठित की है। यह कमेटी बैंकिंग क्षेत्र की मौजूदा व्यवस्था का आकलन करने के साथ भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सुझाव देगी। वित्त मंत्री के मुताबिक कमेटी अपनी रिपोर्ट भी सौंपेगी, हालांकि रिपोर्ट जमा करने की तारीख के बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी।
जरूरत के हिसाब से लागू होगा सुधारों का अगला चरण
सरकार के व्यापक सुधार कार्यक्रम के अगले चरण के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार परिस्थितियों और जरूरत के मुताबिक आगे कदम उठाएगी। उनका संकेत है कि सुधारों को एक निश्चित समय में पूरा करने के बजाय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का जोर सिर्फ टैक्स और सीमा शुल्क व्यवस्था तक सीमित नहीं है। कारोबारी माहौल को सरल बनाने और नागरिकों तथा कंपनियों पर अनुपालन का बोझ घटाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।
1,000 से ज्यादा कानून हटाने का दावा
वित्त मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने अनुपालन का बोझ कम करने के लिए कानूनों में बदलाव, नियमों को आसान बनाने और पुराने कानूनों को हटाने पर काम किया है। उन्होंने बताया कि 1,000 से ज्यादा कानून हटाए गए हैं, जबकि करीब 40,000 नियमों को सरल बनाया गया है। सरकार के मुताबिक ऐसे कदम कारोबारियों और आम नागरिकों के लिए नियामकीय प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे कंपनियों के लिए कारोबार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं कम होने की उम्मीद है।
7.8% GDP ग्रोथ के बीच सुधारों पर जोर
प्रस्तावित सीमा शुल्क और बैंकिंग सुधार ऐसे समय में सामने आए हैं, जब भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। पहली तिमाही के प्रदर्शन में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज क्षेत्र की मजबूत गतिविधियों का अहम योगदान रहा। सरकार अब आर्थिक वृद्धि की इस रफ्तार को संरचनात्मक सुधारों के जरिए बनाए रखने पर जोर दे रही है। तेज क्लीयरेंस, बेहतर बैंकिंग व्यवस्था और कम अनुपालन बोझ से निवेश तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
‘विकसित भारत’ के लिए लंबी अवधि की तैयारी
सीमा शुल्क व्यवस्था में जोखिम आधारित जांच और बैंकिंग सेक्टर की भूमिका पर हाई-लेवल समीक्षा को सरकार की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें सुरक्षा और निगरानी से समझौता किए बिना कारोबार की गति बढ़ाई जा सके। वहीं, बैंकिंग सुधारों के जरिए वित्तीय क्षेत्र को भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए तैयार करने पर जोर है। इन कदमों के प्रभाव का आकलन इनके लागू होने के बाद ही किया जा सकेगा, लेकिन सरकार ने सुधारों की दिशा स्पष्ट कर दी है।
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