वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का दावाः “भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, डर नहीं विश्वास जरूरी”
खबर सार :-
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है। घरेलू मांग, जीएसटी संग्रह, निवेश और एमएसएमई क्षेत्र में वृद्धि सकारात्मक संकेत दे रही है। सरकार नीतिगत सुधारों से आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने का प्रयास लगातार कर रही है। भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतें चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। फिर भी भारत की बुनियाद मजबूत और विकास जारी है।
खबर विस्तार : -
Indian Economy Strong: नई दिल्ली में सोमवार को सिडबी के फाउंडेशन डे कार्यक्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है और कुछ लोग जानबूझकर डर और निराशा का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार ऐसे प्रयास जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं जबकि वास्तविक आंकड़े एक अलग और सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं।
वित्त मंत्री ने यह संकेत भी दिया कि सरकार का प्रयास केवल आंकड़ों को प्रस्तुत करना नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना है। उनके अनुसार, आम नागरिकों की भागीदारी और उद्यमशीलता ही भारत की विकास यात्रा को गति दे रही है।
घरेलू मांग और आर्थिक संकेतकों में मजबूती
वित्त मंत्री ने कहा कि उच्च आवृत्ति वाले सभी संकेतक यह दिखाते हैं कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। सितंबर 2025 में दरों में कटौती के बावजूद जीएसटी संग्रह में मजबूती दर्ज की गई है। खुदरा बाजार, कृषि क्षेत्र और एमएसएमई सेक्टर में वाहन बिक्री और ऋण वृद्धि स्वस्थ गति से आगे बढ़ रही है। सीआईआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में निजी क्षेत्र के व्यय में सालाना आधार पर 67 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही मार्च तिमाही में कंपनियों का लाभ मार्जिन अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो आर्थिक स्थिरता का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में मांग का विस्तार भारत की आर्थिक मजबूती का प्रमाण है और सरकार लगातार नीतिगत सुधारों के माध्यम से इसे और स्थिर करने का प्रयास कर रही है। डिजिटल लेनदेन, निवेश प्रवाह और औद्योगिक उत्पादन में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहे हैं।
वैश्विक चुनौतियों और भू-राजनीतिक दबाव का असर
उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। इससे ईंधन की कीमतों में वृद्धि, शिपिंग लागत में इजाफा और निर्यात में बाधाएं उत्पन्न होने की संभावना है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसे भू-राजनीतिक तनावों से व्यवसायों के कार्यशील पूंजी चक्र पर दबाव पड़ सकता है और निर्यात ऑर्डर को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वैश्विक तनावों के बावजूद भारत की आंतरिक मांग और मजबूत वित्तीय प्रणाली अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकती है। सरकार भी निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए नए व्यापार समझौतों पर काम कर रही है।
एमएसएमई सेक्टर के लिए नई योजनाएं और समर्थन
सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदमों की घोषणा की है। इसमें सिडबी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के बीच को-लेंडिंग प्लेटफॉर्म शामिल है, जिसका उद्देश्य छोटे उद्यमों तक ऋण पहुंच को आसान बनाना है। इसके अलावा सीजीटीएमएसई योजना के तहत विशेष माइक्रो क्रेडिट कार्ड शुरू किया गया है, जिससे उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत एमएसएमई बिना गारंटी के 5 लाख रुपये तक का ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इन योजनाओं से विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों को वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है, जिससे रोजगार सृजन और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि एमएसएमई सेक्टर को अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाया जाए। बैंकिंग प्रणाली में सुधार और डिजिटल लोन प्रोसेसिंग को भी तेजी से लागू किया जा रहा है। सरकार ने ईसीएलजीएस 5.0 को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत 2.55 लाख करोड़ रुपये तक के ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
राजस्व नीति और ऊर्जा कीमतों का प्रभाव
सीतारमण ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से उपभोक्ताओं और व्यवसायों को राहत देने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की है। इससे वित्त वर्ष 2027 में सरकार को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि राजस्व में संभावित कमी के बावजूद यह कदम दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ता कल्याण के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए ऐसी नीतियां आवश्यक मानी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य आम जनता और उद्योगों को महंगाई के दबाव से बचाना है, भले ही इसके लिए राजस्व में कमी स्वीकार करनी पड़े। कुल मिलाकर सरकार का संदेश स्पष्ट है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बीच भी मजबूत स्थिति में है और नीति स्तर पर निरंतर सुधार जारी रहेंगे तथा विकास की गति बनी रहेगी।
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