कच्चे तेल की कीमतों और तनाव के बीच सरकार ने बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, इन तीन चीजों पर पड़ेगा असर
खबर सार :-
केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। सरकार का उद्देश्य घरेलू ईंधन आपूर्ति बनाए रखना और वैश्विक तेल बाजार की अस्थिरता का सामना करना है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उत्पन्न होने वाली अस्थिर परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर संशोधित शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। नई दरों के तहत इन तीनों प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर पहले की तुलना में अधिक कर देना होगा। सरकार का मानना है कि निर्यात पर शुल्क बढ़ाने से घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनी रहेगी और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज बदलाव का सीधा असर देश के उपभोक्ताओं पर कम पड़ेगा।
पेट्रोल पर बढ़ा निर्यात शुल्क
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। यानी अब पेट्रोल निर्यात करने वाली कंपनियों को प्रति लीटर एक रुपये अधिक कर देना होगा। सरकार के अनुसार, यह फैसला घरेलू बाजार में पेट्रोल की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और रिफाइनरियों द्वारा अत्यधिक निर्यात को संतुलित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
डीजल पर सबसे बड़ी बढ़ोतरी
संशोधित व्यवस्था के तहत डीजल पर लगने वाले कुल निर्यात शुल्क में सबसे अधिक वृद्धि की गई है। सरकार ने दो अलग-अलग करों को मिलाकर अब डीजल पर 25.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क निर्धारित किया है। इससे पहले यह शुल्क 15.5 रुपये प्रति लीटर था। यानी डीजल के निर्यात पर 10 रुपये प्रति लीटर की अतिरिक्त कर देनदारी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की घरेलू मांग लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। ऐसे में सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि रिफाइनिंग कंपनियां घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दें और अत्यधिक निर्यात के कारण देश में आपूर्ति प्रभावित न हो।
एटीएफ पर भी बढ़ा विंडफॉल टैक्स
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर भी सरकार ने शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। नई दरों के अनुसार अब एटीएफ के निर्यात पर 22 रुपये प्रति लीटर शुल्क देना होगा, जबकि पहले यह 14.5 रुपये प्रति लीटर था। संशोधित दरें सोमवार से लागू हो गई हैं। सरकार का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच विमानन ईंधन की घरेलू उपलब्धता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि इसका सीधा संबंध विमानन क्षेत्र और परिवहन सेवाओं से है।
पिछले महीने भी बदली थीं दरें
यह फैसला पिछले महीने किए गए संशोधनों के बाद आया है। तब केंद्र सरकार ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रिफाइनिंग मार्जिन में बढ़ोतरी को देखते हुए डीजल और एटीएफ पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाया था, जबकि पेट्रोल पर कुछ राहत दी गई थी। 16 जुलाई को जारी वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, डीजल पर निर्यात शुल्क 8.5 रुपये से बढ़ाकर 15.5 रुपये प्रति लीटर किया गया था। वहीं एटीएफ पर शुल्क 7.5 रुपये से बढ़ाकर 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। उसी संशोधन में सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 4 रुपये से घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया था, ताकि घरेलू और वैश्विक बाजार के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
जुलाई में भी हुआ था बड़ा बदलाव
इससे पहले जुलाई के शुरुआती संशोधन में सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को 1.5 रुपये से बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया था। वहीं डीजल पर यह शुल्क 14 रुपये से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 12.5 रुपये से घटाकर 7.5 रुपये प्रति लीटर किया गया था। इन लगातार संशोधनों से स्पष्ट है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की नियमित समीक्षा कर रही है तथा उसी के अनुरूप विंडफॉल टैक्स में बदलाव कर रही है।
क्यों लगाया जाता है विंडफॉल टैक्स?
विंडफॉल टैक्स वह अतिरिक्त कर है, जिसे सरकार तब लागू करती है जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल या पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में अचानक तेजी आने से तेल कंपनियों को सामान्य से अधिक लाभ होने लगता है। इस कर का उद्देश्य अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा सरकारी राजस्व में लाना, घरेलू ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करना और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना होता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता को देखते हुए सरकार आने वाले समय में भी विंडफॉल टैक्स की समय-समय पर समीक्षा करती रह सकती है। इससे घरेलू बाजार की जरूरतों और निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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