टाटा संस के बोर्ड की हरी झंडीः अगले पांच साल तक चेयरमैन बने रहेंगे एन चंद्रशेखरन, लिस्टिंग को दी गई मंजूरी

खबर सार :-

टाटा संस बोर्ड ने चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल बढ़ाने और लिस्टिंग को मंजूरी दी, जिसका टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने कड़ा विरोध किया है। बोर्ड सदस्यों के समर्थन के बावजूद, नोएल टाटा ने अपने वीटो अधिकार का उपयोग कर इन दोनों फैसलों पर रोक लगा दी। यह विवाद आरबीआई द्वारा टाटा संस को लिस्टिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश देने के बाद सामने आया।
एन चंद्रशेखरन के मामले में टाटा ट्रस्ट और टाटा संस आमने-सामने

खबर विस्तार : -

TATA SONS Board Clash: टाटा संस के बोर्ड ने गुरुवार को चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल का समर्थन किया। साथ ही, कंपनी की लिस्टिंग को भी मंजूरी दे दी। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। वहीं दूसरी तरफ टाटा ट्रस्ट्स ने एन.चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को 'गैर-कानूनी' बताया है और चेयरमैन नोएल टाटा ने अपनी नाराजगी दर्ज कराई है।   

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल का विरोध किया है, जबकि अन्य बोर्ड सदस्यों ने इसका समर्थन दिया। रिपोर्ट के अनुसार, ‘सूत्रों से पता चला है कि नोएल टाटा, जिनके पास टाटा ट्रस्ट्स की ओर से बोर्ड में वीटो का अधिकार है, दोनों प्रस्तावों से सहमत नहीं थे और उन्होंने प्रस्तावों को रोकने के लिए अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल किया है।’ यह फैसला रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा टाटा संस को लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिए जाने के कुछ हफ्ते बाद आया है।  

लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता भी खत्म

आरबीआई ने टाटा संस को 'अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी' के तौर पर वर्गीकृत किया था, जिसके तहत उसे 2022 में तीन साल के भीतर लिस्ट होना जरूरी था। बोर्ड के इस फैसले से कंपनी की लीडरशिप को लेकर महीनों से चली आ रही अनिश्चितता भी खत्म हो गई है। चंद्रशेखरन फरवरी 2017 से टाटा संस की कमान संभाले हुए हैं और 2022 में दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया गया था, जो 20 फरवरी, 2027 को खत्म होने वाला है। हालांकि टाटा ट्रस्ट्स ने 2025 में तीसरे कार्यकाल का समर्थन किया था, लेकिन इस साल की शुरुआत में एयर इंडिया और टाटा डिजिटल जैसे व्यवसायों के प्रदर्शन और पूंजी आवंटन को लेकर नोएल टाटा की चिंताओं के कारण बातचीत रुक गई थी।

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चंद्रशेखरन ने पहले ही दिए थे संकेत

इससे पहले एन. चंद्रशेखरन ने अगस्त 2026 में संकेत दिया था कि वह अगला कार्यकाल नहीं चाहते हैं और बोर्ड को अपने फैसले के बारे में सार्वजनिक रूप से बता दिया था। उन्होंने कहा है कि मैंने टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं। मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने के बेहद संतोषजनक अवसर के लिए आभारी हूं। पिछले दशक में टाटा संस का नेतृत्व करना एक बड़ा सम्मान और एक बड़ी जिम्मेदारी रही है।

टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को बताया 'गैरकानूनी'

टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन.चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को टाटा ट्रस्ट्स ने 'गैर-कानूनी' बताया है और चेयरमैन नोएल टाटा ने अपनी नाराजगी दर्ज कराई है।  टाटा ट्रस्ट्स की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि नियमों के तहत चेयरमैन की नियुक्ति या फिर पुनर्नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर्स के बहुलता में वोट पक्ष में आने जरूरी है। यह भी कहा गया कि टाटा संस का बोर्ड कानूनी रूप से चेयरमैन की नियुक्ति या फिर पुनर्नियुक्ति तब तक बैठक नहीं बुला सकता है, जब तक टाटा ट्रस्ट्स के दोनों नॉमिनी डायरेक्टर्स मौजूद न हो और इस दौरान किसी भी प्रस्ताव को पास नहीं किया जा सकता है।

नोएल टाटा ने वीटो का किया इस्तेमाल

रिलीज के मुताबिक, नोएल टाटा, टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर्स में से एक हैं और उन्होंने इस प्रस्ताव का विरोध किया है, तो यह पुनर्नियुक्ति गैर-कानूनी है और इसका कोई आधार नहीं है। बयान में कहा गया कि, आज बोर्ड मीटिंग में एन. चंद्रशेखरन को फिर से नियुक्त करने के लिए जो प्रस्ताव लाया गया था,जिसमें चार डायरेक्टरों ने पक्ष में और नोएल टाटा ने विरोध में वोट दिया, वह टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के नियमों के हिसाब से कानूनी रूप से अमान्य था। 'ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टरों में से एक, नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया, इसलिए यह प्रस्ताव कानूनी रूप से अमान्य और बिना किसी आधार के हो गया। नोएल एन. टाटा ने ट्रस्ट्स के रुख की सही होने के बारे में जस्टिस डॉ. डी.वाई. चंद्रचूड़ (भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश) से ली गई कानूनी राय भी पेश की। यह फैसला रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के उस निर्देश के कुछ हफ्ते बाद आया है जिसमें उसने टाटा संस को लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए कहा था। इसके अलावा, आरबीआई ने 2022 में टाटा संस को 'अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी' के तौर पर वर्गीकृत किया था, जिसके तहत उसे तीन साल के भीतर लिस्ट होना जरूरी था।

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