43.81 अरब डॉलर पर पहुंचा निर्यात; व्यापार घाटा भी घटा, इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल सेक्टर बने प्रमुख ताकत
खबर सार :-
अगस्त में भारत का वस्तु निर्यात 26.1 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर पहुंचना देश के निर्यात क्षेत्र की मजबूती दर्शाता है। इंजीनियरिंग, पेट्रोलियम, केमिकल और टेक्सटाइल उत्पादों की मांग ने इसमें अहम योगदान दिया। व्यापार घाटे में कमी, सोने के आयात में गिरावट और रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार ने बाहरी क्षेत्र को अतिरिक्त मजबूती दी है। हालांकि वैश्विक कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों पर लगातार नजर जरूरी रहेगी।
खबर विस्तार : -
India Merchandise Exports : भारत के वस्तु निर्यात ने अगस्त में शानदार प्रदर्शन करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में देश का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 26.1 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हो गया। यह भारत के वस्तु निर्यात का अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन है। आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब वैश्विक बाजार में कई तरह की आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं।
निर्यात में इस तेज वृद्धि को देश के व्यापार क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, केमिकल और टेक्सटाइल की मजबूत मांग ने निर्यात को गति देने में अहम भूमिका निभाई। इन उत्पादों की मांग अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU) और ब्रिक्स देशों से खास तौर पर मजबूत रही।
व्यापार घाटे में भी आई कमी
निर्यात में तेज वृद्धि के साथ अगस्त में भारत के व्यापार घाटे में भी कमी दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में व्यापार घाटा 26.86 अरब डॉलर रहा, जबकि अगस्त 2025 में यह 27.22 अरब डॉलर था। यानी सालाना आधार पर व्यापार घाटे में मामूली सुधार हुआ है। जुलाई 2026 में देश का व्यापार घाटा करीब 32 अरब डॉलर रहा था। इस लिहाज से अगस्त में इसमें उल्लेखनीय मासिक कमी आई है। इससे संकेत मिलता है कि आयात में नरमी और निर्यात में मजबूत प्रदर्शन ने व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने में मदद की है।
आयात 72.67 अरब डॉलर पर
अगस्त में भारत का वस्तु आयात भी बढ़ा, लेकिन जुलाई के मुकाबले इसमें कमी आई। सालाना आधार पर अगस्त में वस्तु आयात 26 प्रतिशत बढ़कर 72.67 अरब डॉलर रहा। जुलाई में यह आंकड़ा 76.22 अरब डॉलर था। यानी महीने-दर-महीने आयात में लगभग 3.55 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई। दूसरी ओर, वस्तु निर्यात जुलाई के 44.24 अरब डॉलर से घटकर अगस्त में 43.81 अरब डॉलर रहा। हालांकि मासिक आधार पर हल्की गिरावट के बावजूद सालाना आधार पर 26.1 प्रतिशत की वृद्धि ने अगस्त के प्रदर्शन को खास बना दिया।
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इंजीनियरिंग और पेट्रोलियम ने बढ़ाया निर्यात
वाणिज्य मंत्रालय के सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक, निर्यात में वृद्धि मुख्य रूप से इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पादों, केमिकल और टेक्सटाइल की वजह से हुई। अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिक्स देशों से इन उत्पादों की मजबूत मांग ने भारतीय निर्यातकों को सहारा दिया। इंजीनियरिंग उत्पाद भारत के निर्यात बास्केट का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वहीं पेट्रोलियम उत्पादों में बेहतर निर्यात प्रदर्शन वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों से भी प्रभावित होता है। टेक्सटाइल और केमिकल क्षेत्र की मांग बढ़ना विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
सोने के आयात में बड़ी गिरावट
अगस्त के व्यापार आंकड़ों में सोने के आयात में आई तेज गिरावट भी महत्वपूर्ण रही। आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में सोने का आयात घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया, जबकि अगस्त 2025 में यह 5.4 अरब डॉलर था। यानी एक साल में सोने के आयात में आधे से भी अधिक की गिरावट दर्ज की गई। सोने के आयात में कमी का असर कुल आयात बिल और व्यापार घाटे पर पड़ सकता है। हालांकि भारत की ऊर्जा जरूरतों के कारण पेट्रोलियम और अन्य जरूरी वस्तुओं के आयात का स्तर व्यापार संतुलन के लिए लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।
चालू खाते पर भी नजर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के इस महीने की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) 4.2 अरब डॉलर रहा। यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 0.5 प्रतिशत था। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में CAD GDP का 0.4 प्रतिशत था। पश्चिमी एशिया में संकट के कारण वैश्विक बाजार में तेल, LPG और उर्वरक जैसी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के बावजूद चालू खाते का घाटा सीमित स्तर पर रहा। इससे बाहरी क्षेत्र के मोर्चे पर भारत की स्थिति को अपेक्षाकृत मजबूत माना जा सकता है।
विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड स्तर पर
भारत के बाहरी क्षेत्र की मजबूती का एक और संकेत विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड वृद्धि है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 44.9 अरब डॉलर बढ़कर 785.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा भंडार में इस तेज बढ़ोतरी में RBI की FCNR (B) जमा योजना से जुड़े डॉलर इनफ्लो की अहम भूमिका रही। इस वृद्धि के बाद भारत विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में रूस को पीछे छोड़कर दुनिया का चौथा सबसे बड़ा भंडार धारक देश बन गया। भारत से आगे चीन, जापान और स्विट्जरलैंड हैं। इस तरह निर्यात में रिकॉर्ड प्रदर्शन, व्यापार घाटे में कमी और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार ने देश के बाहरी क्षेत्र की तस्वीर को और मजबूत किया है।
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