बोफा का भारतीय शेयर बाजार पर भरोसा बढ़ा, दिसंबर 2026 तक 26,200 पहुंच सकता है निफ्टी, तीन जोखिम बरकरार

खबर सार :-

बोफा सिक्योरिटीज का भारतीय शेयर बाजार पर बदला रुख निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है। आठ में पांच पुराने जोखिमों के बाजार में शामिल हो जाने के बाद ब्रोकरेज ने निफ्टी के लिए 26,200 का लक्ष्य दिया है। हालांकि, भारी आईपीओ गतिविधि, अमेरिकी फेड की संभावित दर वृद्धि और एआई का रोजगार पर असर अब भी चुनौती हैं। अक्टूबर तक अस्थिरता के बाद नवंबर से बाजार में टिकाऊ सुधार की उम्मीद बोफा के आकलन को खास बनाती है।
बोफा का भरोसा बढ़ा, दिसंबर तक 26,200 पहुंच सकता है निफ्टी

खबर विस्तार : -

Stock Market Updates: बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) सिक्योरिटीज ने करीब दो वर्षों तक भारतीय शेयर बाजार को लेकर सतर्क रहने के बाद अब अपना रुख सकारात्मक कर लिया है। ब्रोकरेज फर्म ने अनुमान लगाया है कि दिसंबर 2026 तक निफ्टी 50 का स्तर 26,200 तक पहुंच सकता है। मौजूदा स्तरों की तुलना में यह करीब 12 फीसदी की संभावित तेजी का संकेत देता है।

बोफा ने अपनी नवीनतम रणनीति रिपोर्ट में कहा कि वह अगस्त 2024 से भारतीय शेयरों को लेकर सतर्क था। उस समय ब्रोकरेज ने बाजार के लिए आठ प्रमुख जोखिमों की पहचान की थी। अब इनमें से पांच जोखिम या तो सामने आ चुके हैं या बाजार के मौजूदा मूल्यांकन में काफी हद तक शामिल हो चुके हैं। इसी वजह से भारतीय इक्विटी को लेकर उसका नजरिया पहले की तुलना में अधिक आशावादी हुआ है।

अक्टूबर तक जोखिम, नवंबर से सुधार की उम्मीद

बोफा का मानना है कि अभी बचे तीन प्रमुख जोखिम अक्टूबर 2026 तक अपने चरम पर पहुंच सकते हैं। इसके बाद नवंबर से बाजार में अधिक टिकाऊ सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, नकारात्मक परिदृश्य में इन जोखिमों के चलते निफ्टी 50 में करीब 7 फीसदी तक की गिरावट संभव है। कच्चे तेल की कीमत लंबे समय से बाजार के लिए प्रमुख चिंता रही है। 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने का जोखिम बोफा की पुरानी आशंकाओं में शामिल था। हालांकि, ब्रोकरेज ने चौथी तिमाही 2026 के लिए कच्चे तेल का अनुमान 81 डॉलर प्रति बैरल रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सात महीनों में तेल की कीमतें सात बार 100 डॉलर के स्तर से नीचे वापस आ चुकी हैं। रुपये को लेकर भी तस्वीर बदली है। बोफा के अनुसार हाल में करीब 136 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह भारतीय मुद्रा को समर्थन दे सकता है। इसलिए ब्रोकरेज रुपये को लेकर अपना मजबूत रुख बनाए हुए है।

ये भी पढ़ें...सोना-चांदी में तेज गिरावट, डॉलर की मजबूती से बढ़ा दबाव; अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर निवेशकों की नजर

मानसून और धातुओं की तेजी भी अब बड़ी चिंता नहीं

कमजोर मानसून भी पहले बोफा की जोखिम सूची में था। इस समय बारिश की कमी करीब 13 फीसदी है, जो ब्रोकरेज के 15 फीसदी के सबसे खराब अनुमान के काफी करीब है। इसके बावजूद यह जोखिम अब पहले जितना बड़ा नहीं माना जा रहा। एल्यूमीनियम और तांबे की कीमतों में भी बोफा को आगे बहुत अधिक तेजी की संभावना सीमित नजर आ रही है। मौद्रिक नीति के मोर्चे पर ब्रोकरेज के अर्थशास्त्री का अनुमान है कि आरबीआई दिसंबर 2026 तक रेपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके मुकाबले स्वैप बाजार करीब 45 आधार अंकों की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहा है।

तीन जोखिम अब भी बरकरारः बोफा

बोफा के मुताबिक पहला बड़ा जोखिम भारतीय प्राथमिक बाजार में भारी पूंजी जुटाने की गतिविधि है। सितंबर से दिसंबर के बीच करीब 30 अरब डॉलर के नए इश्यू आने की संभावना है और अक्टूबर में इसकी रफ्तार सबसे तेज रह सकती है। दूसरा जोखिम अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़ा है। यदि फेड उम्मीद से ज्यादा दरें बढ़ाता है तो उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है। बोफा का अनुमान है कि फेड कुल 75 आधार अंक तक दरें बढ़ा सकता है, जबकि बाजार फिलहाल करीब 35 आधार अंकों की बढ़ोतरी को ही मूल्यांकन में शामिल कर रहा है। तीसरा और दीर्घकालिक जोखिम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है। बोफा के अनुसार एआई आधारित बदलावों का भारत के रोजगार बाजार पर लंबे समय में असर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को तकनीकी बदलावों और उसके रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव पर नजर रखनी होगी।

ये भी पढ़ें....अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा बढ़ी महंगाई; ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से सोने-चांदी पर दबाव

अन्य प्रमुख खबरें