एक्सपायरी पर ‘CAS’ का असर, सेबी जल्द ला सकता है कंसल्टेशन पेपर, डेरिवेटिव्स सेटलमेंट में बदलाव संभव
खबर सार :-
सेबी का संभावित कंसल्टेशन पेपर CAS व्यवस्था के भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है। नियामक इसे खत्म करने के बजाय एक्सपायरी वाले दिनों में सेटलमेंट प्राइस तय करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और स्थिर बनाने पर जोर दे सकता है। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो इससे सीमित ऑर्डर के कारण होने वाले असामान्य उतार-चढ़ाव पर लगाम लग सकती है और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग अधिक अनुमानित हो सकती है।
खबर विस्तार : -
SEBI CAS Settlement: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS फ्रेमवर्क को लेकर जल्द कंसल्टेशन पेपर जारी कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार नियामक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने की मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव का प्रस्ताव रख सकता है। हालांकि, सेबी की योजना CAS व्यवस्था को वापस लेने की नहीं है। उसका फोकस खासतौर पर एक्सपायरी वाले दिनों में ऑक्शन मैकेनिज्म के तहत सेटलमेंट प्राइस की गणना को बेहतर बनाने पर है।
NDTV Profit की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव पर 24 सितंबर को होने वाली सेबी बोर्ड की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य बाजार प्रतिभागियों की उन चिंताओं को दूर करना है, जो नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के तहत एक्सपायरी वाले दिन डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस की गणना को लेकर सामने आई हैं। बाजार से जुड़े पक्षों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में कम ऑर्डर और सीमित भागीदारी के कारण क्लोजिंग प्राइस में असामान्य उतार-चढ़ाव की गुंजाइश बढ़ जाती है।
CAS हटेगा नहीं, प्रक्रिया में सुधार पर जोर
सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि CAS फ्रेमवर्क बाजार में बना रहेगा। उनका कहना रहा है कि नियामक बाजार प्रतिभागियों की ओर से उठाई गई चिंताओं की जांच कर उन्हें दूर करने की कोशिश कर रहा है। इससे संकेत मिलता है कि सेबी का रुख पूरी व्यवस्था को खत्म करने के बजाय उसमें जरूरी सुधार करने का है।
ये भी पढ़ें....NSE IPO की राह में F&O की चुनौती, घटता ऑप्शंस मार्केट शेयर और सख्त नियमों से बढ़ी चिंता
3 अगस्त से लागू है नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन
नया CAS फ्रेमवर्क 3 अगस्त से लागू है। इसके तहत फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O के लिए पात्र शेयरों में लगातार ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे समाप्त हो जाती है। इसके बाद इन सिक्योरिटीज को करीब 20 मिनट के ऑक्शन में भेजा जाता है। इस दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर का मिलान किया जाता है और इसके आधार पर आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता है। दूसरी ओर, गैर-F&O शेयरों में ट्रेडिंग शाम 3:30 बजे तक जारी रहती है। वहीं, स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग शाम 3:40 बजे तक चलती है। इस अलग-अलग टाइमिंग के कारण बाजार में क्लोजिंग प्राइस और डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस के बीच संबंध को लेकर भी निवेशकों और ट्रेडर्स की निगाहें बनी हुई हैं।
एक्सपायरी वाले दिन बढ़ी अस्थिरता
नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार में खासतौर पर डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी वाले दिनों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पिछले सप्ताह एक कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स का इंडिकेटिव क्लोज कुछ समय के लिए करीब 2.5 प्रतिशत गिर गया। इस दौरान क्लोजिंग ऑक्शन में सेंसेक्स के पुट ऑप्शंस के प्रीमियम में 400-500 प्रतिशत तक उछाल देखा गया। इसी तरह मंगलवार को भी एक्सपायरी वाले दिन निफ्टी के पुट ऑप्शंस में कई गुना तेजी देखने को मिली। इन घटनाओं ने CAS व्यवस्था के तहत क्लोजिंग प्राइस की प्रक्रिया और उसके डेरिवेटिव्स पर असर को लेकर बहस तेज कर दी है।
सिस्टमेटिक ऑप्शंस स्ट्रैटेजी के लिए चुनौती
विश्लेषकों के मुताबिक, CAS ने एक्सपायरी वाले दिन सिस्टमेटिक ऑप्शंस स्ट्रैटेजी के लिए ट्रेडिंग को पहले की तुलना में कम अनुमानित बना दिया है। उनका तर्क है कि क्लोजिंग ऑक्शन में भागीदारी सीमित होने की स्थिति में कुछ ही बड़े या छोटे ऑर्डर अंतिम क्लोजिंग प्राइस पर बड़ा असर डाल सकते हैं। यही वजह है कि बाजार प्रतिभागी सेबी से ऐसी व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें क्लोजिंग प्राइस अधिक पारदर्शी, स्थिर और व्यापक बाजार गतिविधि को बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित करे। यदि सेबी कंसल्टेशन पेपर जारी करता है, तो इसमें प्रस्तावित बदलावों पर बाजार प्रतिभागियों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जा सकती हैं। कुल मिलाकर, CAS को लेकर सेबी का मौजूदा रुख यह संकेत देता है कि नियामक क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था को बनाए रखते हुए उसकी कमियों को दूर करना चाहता है। आने वाले समय में प्रस्तावित बदलावों से यह स्पष्ट हो सकता है कि एक्सपायरी वाले दिनों में डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाने के लिए किस तरह की नई व्यवस्था लागू की जाती है।
ये भी पढ़ें......रक्सन ट्रांसफॉर्मर्स IPO खुला, 273 रुपये तक भाव; पहले दिन 49% सब्सक्राइब, 18 सितंबर को लिस्टिंग संभव
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...
1. CAS क्या है?
CAS यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन, जिसमें ऑक्शन के जरिए शेयरों का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस तय किया जाता है।
2. सेबी CAS में क्या बदलाव कर सकता है?
सेबी एक्सपायरी वाले दिनों में डेरिवेटिव्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने का प्रस्ताव दे सकता है।
3. क्या सेबी CAS को खत्म करेगा?
नहीं। मौजूदा संकेतों के मुताबिक सेबी CAS को हटाने के बजाय इसकी प्रक्रिया में सुधार करने पर विचार कर रहा है।
अन्य प्रमुख खबरें
-
₹1 लाख करोड़ की बॉन्ड बिक्री से RBI का बड़ा ‘कैश कंट्रोल’ प्लान
2026-09-12
-
रक्सन ट्रांसफॉर्मर्स IPO खुला, 273 रुपये तक भाव; 18 सितंबर को लिस्टिंग संभव
2026-09-11
-
ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी टेंशन
2026-09-11
-
शेयर बाजार में भूचाल! सेंसेक्स 707 अंक टूटा, निफ्टी 23,300 के नीचे
2026-09-11
-
सोना-चांदी धड़ाम! डॉलर की तेजी से टूटा बाजार, महंगाई पर नजर
2026-09-11
-
BIS की बड़ी कार्रवाई, 804 ग्राम बिना हॉलमार्क सोना जब्त; ज्वेलर पर शिकंजा
2026-09-10
-
NSE IPO पर F&O की मार, घटता मार्केट शेयर और सख्त नियम बने चुनौती
2026-09-10
-
BSE में तकनीकी गड़बड़ी, F&O कीमतें अटकीं; Zerodha यूजर्स परेशान
2026-09-10
-
सोना चमका, चांदी फिसली; अब अमेरिकी महंगाई डेटा पर टिकी बाजार की नजर
2026-09-10
-
बैंकिंग में AI की नई उड़ान, SBI चेयरमैन बोले-
2026-09-10
-
क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार, सपाट बाजार, दबाव में ऑटो कंज्यूमर के शेयर
2026-09-10
-
सोना चमका, चांदी 2.40 लाख के पार; निवेशकों में बढ़ी खरीदारी
2026-09-09
-
सेंसेक्स 533 अंक टूटा, निफ्टी 23,500 के नीचे; बाजार में हलचल
2026-09-09
-
कनोहर इलेक्ट्रिकल्स IPO खुलते ही फोकस में, एंकर निवेशकों से जुटाए ₹317 करोड़
2026-09-08
-
सैमसंग इंडिया में छंटनी से मचा हड़कंप, TV-होम अप्लायंसेज बिजनेस पर असर
2026-09-08