सेबी का साइबर कवच मजबूत: दो नए पोर्टल लॉन्च, अब हर घटना की होगी तेज रिपोर्टिंग

खबर सार :-

सेबी के दो नए पोर्टल प्रतिभूति बाजार में साइबर सुरक्षा को संस्थागत और सामूहिक रूप देने की दिशा में अहम कदम हैं। संशोधित रिपोर्टिंग पोर्टल घटनाओं की सूचना को व्यवस्थित करेगा, जबकि साइबर सुरक्षा पोर्टल चेतावनियों और अनुभवों के आदान-प्रदान में मदद करेगा। हालांकि, इन पहलों की सफलता संस्थानों की सक्रिय भागीदारी, समय पर रिपोर्टिंग और साझा जिम्मेदारी निभाने पर निर्भर करेगी।
सेबी के साइबर कवच को मिली मजबूती, दो नए पोर्टल लॉन्च

खबर विस्तार : -

Sebi Cyber Security New Portals: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने प्रतिभूति बाजार के पूरे इकोसिस्टम में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को साइबर डिफेंस पर आयोजित एक सेमिनार में दो नई पहलों की घोषणा की। इनमें संशोधित इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल और नया साइबर सुरक्षा पोर्टल शामिल हैं। दोनों प्लेटफॉर्म का मकसद साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग को अधिक प्रभावी बनाना और बाजार से जुड़े संस्थानों के बीच जरूरी सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।

साइबर खतरे की कोई सीमा नहीं

सेबी चेयरमैन ने कहा कि साइबर खतरे किसी एक संगठन, नियामकीय व्यवस्था या देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहते। एक संस्थान से शुरू हुआ साइबर हमला उसके वेंडर, टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर या दूसरे जुड़े संस्थानों तक पहुंच सकता है। ऐसे में किसी एक संगठन की सुरक्षा मजबूत होना पर्याप्त नहीं है। पूरे वित्तीय इकोसिस्टम की साइबर रेजिलिएंस बढ़ाना जरूरी है। पांडे के मुताबिक, वित्तीय संस्थानों के बीच बढ़ती डिजिटल कनेक्टिविटी ने साइबर हमलों के संभावित प्रभाव को भी व्यापक बनाया है। इसलिए किसी एक संस्था को निशाना बनाने वाली घटना दूसरे संस्थानों के लिए भी खतरे का संकेत हो सकती है। ऐसी स्थिति में समय पर जानकारी साझा करना हमले के प्रभाव को सीमित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

रिपोर्टिंग पोर्टल में बड़ा बदलाव

सेबी का संशोधित इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने के लिए तैयार किया गया है। यह पोर्टल वित्तीय स्थिरता बोर्ड (एफएसबी) के फायर (FIRE) यानी फाइनेंशियल इंसिडेंट रिपोर्टिंग एक्सचेंज प्रारूप के अनुरूप है। इस व्यवस्था से साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग में एकरूपता बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, अलग-अलग क्षेत्रों और देशों के बीच साइबर घटनाओं से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान में आने वाली दिक्कतों को कम करने में मदद मिलेगी। एक समान प्रारूप में जानकारी मिलने से घटनाओं का विश्लेषण और उन पर प्रतिक्रिया देना भी आसान हो सकता है।

दूसरा पोर्टल बनेगा साइबर सूचना का केंद्र

सेबी ने इसके साथ नया साइबर सुरक्षा पोर्टल भी लॉन्च किया है। यह हितधारकों के बीच साइबर सुरक्षा से संबंधित सूचनाएं साझा करने के लिए एक केंद्रीय मंच के तौर पर काम करेगा। इसके जरिए साइबर खतरों और कमजोरियों से जुड़ी चेतावनियां, सुरक्षा उपाय, नीतिगत जानकारी और साइबर घटनाओं से मिली सीख साझा की जा सकेगी। इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि साइबर हमलों के तरीके लगातार बदल रहे हैं। किसी एक संस्था पर सामने आई नई कमजोरी या हमले का तरीका दूसरे संगठनों के लिए चेतावनी बन सकता है। समय पर सूचना मिलने से दूसरे संस्थान अपने सिस्टम में जरूरी सुरक्षा उपाय लागू कर सकते हैं।

सिर्फ पोर्टल नहीं, साझा जिम्मेदारी

पांडे ने स्पष्ट किया कि ये दोनों पहल केवल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म नहीं हैं। इनकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बाजार से जुड़े संस्थान इनका इस्तेमाल कितनी प्रभावी तरीके से करते हैं। संस्थानों को घटनाओं की समय पर रिपोर्टिंग करने के साथ-साथ उनसे मिली सीख और जरूरी सुरक्षा जानकारी भी साझा करनी होगी। उन्होंने कहा कि एक संस्थान पर हुए साइबर हमले से मिली सीख दूसरे संस्थानों की सुरक्षा मजबूत करने में इस्तेमाल होनी चाहिए। इसी तरह किसी नियामक या दूसरे देश की ओर से विकसित प्रभावी साइबर सुरक्षा व्यवस्था का लाभ पूरे वित्तीय इकोसिस्टम को मिलना चाहिए।

तेज प्रतिक्रिया पर जोर

सेबी की इन दोनों पहलों का व्यापक लक्ष्य साइबर घटनाओं के प्रति बाजार की सामूहिक तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना है। बेहतर रिपोर्टिंग से घटना की पहचान और सूचना साझा करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है, जबकि केंद्रीय साइबर सुरक्षा पोर्टल संस्थानों को संभावित खतरों के बारे में समय रहते सतर्क करने में मदद कर सकता है। डिजिटल तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के दौर में वित्तीय बाजार की स्थिरता के लिए साइबर सुरक्षा अब केवल आईटी विभाग की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। सेबी की नई पहल इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पूरे प्रतिभूति बाजार को एक साझा साइबर सुरक्षा ढांचे में जोड़ने की कोशिश है।

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