F&O में रिटेल निवेशकों का घाटा घटा, SEBI के कदमों से 18% कम हुआ नुकसान
खबर सार :-
सेबी की सख्ती के बाद एफएंडओ में रिटेल निवेशकों की संख्या और कुल नुकसान दोनों घटे हैं। वित्त वर्ष 2026 में कुल घाटा 91,685 करोड़ रुपये रहा, लेकिन औसत नुकसान बढ़ना चिंता का संकेत है। आगे नियामकीय निगरानी, एक्सपायरी नियम और जोखिम प्रबंधन से बाजार में संतुलन बढ़ सकता है। फिर भी एफएंडओ में निवेश करने वालों के लिए जोखिम और नुकसान की संभावना बनी रहेगी।
खबर विस्तार : -
Retail Investor Loss: एफएंडओ यानी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में रिटेल निवेशकों के लिए सेबी के सख्त नियमों का असर अब आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। सरकार ने मंगलवार को संसद में बताया कि वित्त वर्ष 2026 में इक्विटी डेरिवेटिव्स में निवेशकों का कुल नुकसान 18 प्रतिशत घटकर 91,685 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, नुकसान कम होने के बावजूद प्रति निवेशक औसत घाटा बढ़कर 1.16 लाख रुपये से अधिक पहुंच गया है।
SEBI के कदमों का दिखा असर
इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में रिटेल निवेशकों के बढ़ते नुकसान को नियंत्रित करने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की ओर से किए गए नियामकीय उपायों का असर सामने आया है। सरकार ने मंगलवार को संसद में बताया कि वित्त वर्ष 2026 में एफएंडओ कारोबार में रिटेल निवेशकों का कुल नुकसान घटकर 91,685 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले 1,11,788 करोड़ रुपये था। राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नवंबर 2024 से लागू किए गए नियामकीय बदलावों के बाद इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में यूनिक निवेशकों की संख्या और कारोबार दोनों में कमी दर्ज की गई है।
98.1 लाख से घटकर 78.6 लाख हुए निवेशक
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में एफएंडओ सेगमेंट में यूनिक रिटेल निवेशकों की संख्या 98.1 लाख थी। वित्त वर्ष 2026 में यह संख्या करीब 20 प्रतिशत घटकर 78.6 लाख रह गई। यानी एक साल में लगभग 19.5 लाख यूनिक रिटेल निवेशक इस सेगमेंट से कम हुए। सरकार के अनुसार, नियामकीय बदलावों के बाद निवेशकों की भागीदारी में आई कमी के साथ उनके कुल नुकसान में भी गिरावट आई। वित्त वर्ष 2025 में जहां कुल नुकसान 1,11,788 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह 91,685 करोड़ रुपये रह गया।
कुल घाटा घटा, लेकिन प्रति निवेशक नुकसान बढ़ा
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण आंकड़ा भी सामने आया है। कुल नुकसान कम होने के बावजूद प्रति निवेशक औसत नुकसान बढ़ गया। वित्त वर्ष 2025 में प्रति निवेशक औसत नुकसान 1,13,913 रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 1,16,654 रुपये हो गया। इससे संकेत मिलता है कि एफएंडओ बाजार से बाहर हुए निवेशकों की संख्या घटने के बावजूद सक्रिय रहने वाले निवेशकों में नुकसान का औसत स्तर बढ़ा है। इसलिए कुल नुकसान में कमी को सीधे तौर पर हर निवेशक के जोखिम में कमी के रूप में नहीं देखा जा सकता।
F&O टर्नओवर भी हुआ कम
सरकारी आंकड़ों में इक्विटी डेरिवेटिव्स के कुल टर्नओवर में भी गिरावट दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025 में एफएंडओ सेगमेंट का कुल टर्नओवर 213 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर 202 लाख करोड़ रुपये रह गया। निवेशकों की संख्या और कुल टर्नओवर में गिरावट को नवंबर 2024 से लागू किए गए नियामकीय बदलावों के प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इन बदलावों का उद्देश्य खासतौर पर अत्यधिक सट्टेबाजी, जोखिम और छोटे निवेशकों के नुकसान को नियंत्रित करना था।
SEBI ने कौन-कौन से कदम उठाए?
सेबी ने इक्विटी डेरिवेटिव्स में जोखिम कम करने के लिए कई अहम बदलाव किए। इनमें साप्ताहिक और मासिक इंडेक्स डेरिवेटिव्स प्रोडक्ट्स को सुव्यवस्थित करना शामिल है। इसके अलावा इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाया गया, जिससे छोटे निवेशकों के लिए अत्यधिक लीवरेज वाले कारोबार में प्रवेश कठिन हो सकता है। ऑप्शंस की एक्सपायरी के दिन टेल-रिस्क को कवर करने के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए गए। साथ ही ऑप्शन खरीदारों से प्रीमियम की अग्रिम वसूली, एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाना और पोजीशन लिमिट की इंट्राडे निगरानी जैसे कदम भी लागू किए गए।
एक्सपायरी और रिस्क मॉनिटरिंग पर भी फोकस
मई 2025 में बाजार नियामक ने एक्सचेंजों पर एक्सपायरी के दिनों को सुव्यवस्थित करने और एफएंडओ सेगमेंट में जोखिम निगरानी तथा डिस्क्लोजर को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त उपाय भी शुरू किए। इन बदलावों का उद्देश्य बाजार में अत्यधिक ट्रेडिंग गतिविधि और जोखिम को नियंत्रित करना है। खासकर एक्सपायरी के दिनों में होने वाली तेज गतिविधियों को लेकर नियामक लंबे समय से सावधानी बरतता रहा है। रिटेल निवेशकों के नुकसान को कम करना इन उपायों का प्रमुख लक्ष्य है।
सरकार की STT से बंपर कमाई
एफएंडओ कारोबार में गिरावट के बीच सरकार की सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से होने वाली कमाई में भारी उछाल आया। पंकज चौधरी के मुताबिक, एफएंडओ ट्रेड्स पर एसटीटी से सरकार की आय वित्त वर्ष 2025 के 7,893 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 27,695 करोड़ रुपये हो गई। यानी एफएंडओ कारोबार में कुल टर्नओवर घटने के बावजूद इस सेगमेंट से एसटीटी संग्रह में कई गुना वृद्धि हुई। यह बदलाव बाजार में नियामकीय और कर संबंधी परिवर्तनों के व्यापक प्रभाव को भी दिखाता है।
रिटेल निवेशकों के लिए क्या संदेश?
आंकड़ों से साफ है कि नियामकीय सख्ती के बाद एफएंडओ में रिटेल निवेशकों की संख्या और कुल नुकसान दोनों में कमी आई है। लेकिन प्रति निवेशक औसत नुकसान का बढ़ना बताता है कि इस बाजार में जोखिम अब भी काफी ऊंचा है। एफएंडओ में सीमित पूंजी के साथ बड़े दांव और तेज उतार-चढ़ाव निवेशकों के नुकसान को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में सेबी के उपायों के बावजूद निवेशकों के लिए जोखिम को समझना और अपनी क्षमता के मुताबिक ही कारोबार करना अहम बना हुआ है।
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