राजकोषीय मोर्चे पर मजबूत शुरुआत: अप्रैल-मई में घाटा लक्ष्य का सिर्फ 9.6%, सरकार की वित्तीय स्थिति दिखी संतुलित
खबर सार :-
वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में सामने आए आंकड़े संकेत देते हैं कि सरकार राजकोषीय अनुशासन और विकास के बीच संतुलन बनाने में सफल रही है। कर संग्रह, गैर-कर राजस्व और पूंजीगत निवेश में सुधार के साथ राजकोषीय घाटा नियंत्रण में बना हुआ है। यदि यही रफ्तार जारी रहती है तो सरकार के लिए 4.3 प्रतिशत फिस्कल डेफिसिट लक्ष्य हासिल करना आसान हो सकता है।
खबर विस्तार : -
India's fiscal deficit CGA report: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों में राजकोषीय प्रबंधन के मोर्चे पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (सीजीए) द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-मई 2026 के दौरान देश का राजकोषीय घाटा 1.624 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के लिए निर्धारित 16.96 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य का केवल 9.6 प्रतिशत है। शुरुआती आंकड़े संकेत देते हैं कि सरकार तय राजकोषीय लक्ष्य हासिल करने की दिशा में संतुलित वित्तीय रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है।
GDP के 4.3 प्रतिशत तक राजकोषीय घाटा सीमित रखने का लक्ष्य
सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत तक राजकोषीय घाटा सीमित रखने का लक्ष्य रखा है। इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि लगातार राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने से आर्थिक स्थिरता मजबूत होगी और विकास को गति मिलेगी। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में सरकार की कुल प्राप्तियां 2.13 लाख करोड़ रुपये रहीं, जबकि व्यय 5.75 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसके कारण पहले महीने में लगभग 3.62 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा हुआ। हालांकि, मई में स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला और सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपये का राजकोषीय अधिशेष दर्ज किया। पिछले वर्ष मई में यह अधिशेष 1.73 लाख करोड़ रुपये था, जिससे स्पष्ट है कि सरकारी आय में सुधार हुआ है।
गैर-कर राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। मई 2026 में गैर-कर राजस्व 3.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 2.90 लाख करोड़ रुपये था। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2026 के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष हस्तांतरण की मंजूरी मिलने का सकारात्मक प्रभाव भी इन आंकड़ों में दिखाई दिया है।
मई में 61,200 करोड़ रुपये रहा पूंजीगत खर्च
पूंजीगत व्यय के मोर्चे पर भी सरकार ने निवेश की रफ्तार बनाए रखी है। मई में पूंजीगत खर्च 61,200 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 61,600 करोड़ रुपये के लगभग बराबर है। वहीं अप्रैल-मई की संयुक्त अवधि में पूंजीगत व्यय बढ़कर 2.51 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 2.21 लाख करोड़ रुपये था। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की अपनी रणनीति जारी रखे हुए है।
कर संग्रह में भी सुधार
आंकड़ों के अनुसार, कर संग्रह में भी सुधार देखने को मिला। अप्रैल-मई के दौरान कुल कर राजस्व 5.25 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 5.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। मजबूत कर संग्रह और बढ़े हुए गैर-कर राजस्व ने सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूती प्रदान की है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, राजकोषीय घाटे में नियंत्रण से सरकार की उधारी कम होती है। इसका लाभ बैंकिंग क्षेत्र को मिलता है, क्योंकि बैंकों के पास उद्योगों और उपभोक्ताओं को ऋण देने के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होते हैं। इससे निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
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