UPI पर MDR की एंट्री से खुलेंगे कमाई के नए रास्ते, इंडस्ट्री को 20,600 करोड़ तक फायदा संभव

खबर सार :-

UPI में MDR लागू होने से डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए कमाई का नया मॉडल बन सकता है। अलग-अलग ब्रोकरेज के अनुमान के अनुसार, सालाना रेवेन्यू पूल 10,000 करोड़ से 20,600 करोड़ रुपये तक हो सकता है। बैंकों को इसका बड़ा हिस्सा मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि फिनटेक, UPI ऐप प्रोवाइडर्स और पेमेंट एग्रीगेटर्स भी लाभान्वित हो सकते हैं। वास्तविक आय लेनदेन और रेवेन्यू-शेयरिंग पर निर्भर करेगी।
UPI पर MDR की एंट्री, इंडस्ट्री को मिल सकता है 20,000 करोड़ का फायदा

खबर विस्तार : -

UPI MDR Industry Revenue: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भुगतान व्यवस्था में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए कमाई का नया रास्ता खुल सकता है। अलग-अलग ब्रोकरेज फर्मों के अनुमानों के मुताबिक, UPI पर MDR से इंडस्ट्री का सालाना रेवेन्यू पूल करीब 10,000 करोड़ रुपये से लेकर 20,600 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि, अलग-अलग ब्रोकरेज ने यह अनुमान अलग-अलग धारणाओं और बाजार हिस्सेदारी के आधार पर लगाया है।

UPI का संचालन करने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने का ऐलान किया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने की बात कही गई है। प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये निर्धारित की गई है। खास बात यह है कि इस शुल्क का भुगतान ग्राहक नहीं, बल्कि मर्चेंट करेगा।

बैंकों के लिए आय का नया जरिया

ब्रोकरेज फर्म UBS के अनुमान के मुताबिक, MDR लागू होने के बाद बैंकों और पेमेंट कंपनियों के लिए सालाना रेवेन्यू पूल 10,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस अतिरिक्त आय में बैंकों की हिस्सेदारी करीब 60-70 प्रतिशत रह सकती है, जबकि शेष हिस्सा भुगतान कंपनियों के पास जा सकता है। इस बदलाव से बैंकों को UPI इकोसिस्टम में बढ़ते डिजिटल लेनदेन से सीधे आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। अभी तक UPI की तेज स्वीकार्यता और व्यापक इस्तेमाल के बावजूद इस सिस्टम से प्रत्यक्ष कमाई का दायरा सीमित रहा है। MDR के लागू होने से यह स्थिति बदल सकती है।

फिनटेक कंपनियों की कमाई पर कितना असर?

मॉर्गन स्टेनली ने UPI MDR व्यवस्था के प्रभाव को लेकर फिनटेक कंपनियों पर खास ध्यान दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, MDR से फिनटेक कंपनियों की कमाई पर अपेक्षाकृत ज्यादा असर पड़ सकता है। UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स और पेमेंट कंपनियां इस व्यवस्था में रेवेन्यू शेयर हासिल कर सकती हैं, लेकिन उन्हें बैंकिंग संस्थानों के साथ शुल्क का हिस्सा बांटना होगा। इससे डिजिटल पेमेंट कंपनियों के लिए एक ओर आय का नया अवसर बनेगा, वहीं दूसरी ओर रेवेन्यू शेयरिंग और लागत ढांचे का महत्व बढ़ सकता है। बाजार में प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियों के कारोबार मॉडल पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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Goldman Sachs का अनुमान सबसे बड़ा

Goldman Sachs के अनुमान के मुताबिक, UPI MDR से इंडस्ट्री का संभावित सालाना रेवेन्यू पूल 20,600 करोड़ रुपये तक हो सकता है। यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब आधा हिस्सा 40 बेसिस पॉइंट यानी 0.4 प्रतिशत MDR के दायरे में आ सकता है। हालांकि, वास्तविक रेवेन्यू इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने लेनदेन MDR के दायरे में आते हैं और शुल्क संरचना व्यवहार में किस तरह लागू होती है। इसलिए अलग-अलग ब्रोकरेज के अनुमानों में अंतर दिखाई दे रहा है।

JPMorgan और Citi ने भी जताया बड़ा अवसर

JPMorgan के मुताबिक, UPI MDR से अधिकतम रेवेन्यू पूल करीब 17,000 करोड़ रुपये हो सकता है। इसमें इश्यूइंग और एक्वायरिंग बैंकों के लिए लगभग 11,700 करोड़ रुपये का हिस्सा शामिल है। ब्रोकरेज के अनुसार, यह राशि वित्त वर्ष 2026 में सूचीबद्ध कमर्शियल बैंकों के अनुमानित शुद्ध मुनाफे का करीब 2.1 प्रतिशत बैठती है। वहीं, Citi ने सालाना इंडस्ट्री रेवेन्यू पूल का अनुमान 16,000-17,000 करोड़ रुपये लगाया है। उसके आकलन के अनुसार, इसमें करीब 60 प्रतिशत हिस्सा बैंकों, 25 प्रतिशत UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स और 15 प्रतिशत नॉन-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को मिल सकता है।

MDR से बदल सकता है UPI का कमाई मॉडल

UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया है और अब MDR की व्यवस्था इसके बिजनेस मॉडल में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। बैंकों, फिनटेक कंपनियों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और UPI ऐप प्रोवाइडर्स के बीच रेवेन्यू का बंटवारा इस बदलाव का अहम हिस्सा होगा। हालांकि, MDR से संभावित कमाई का वास्तविक आकार लेनदेन की संख्या, पात्र ट्रांजैक्शन, शुल्क की प्रभावी वसूली और विभिन्न भागीदारों के बीच राजस्व बंटवारे पर निर्भर करेगा। ऐसे में ब्रोकरेज अनुमानों को संभावित रेवेन्यू अवसर के रूप में देखा जा रहा है, न कि निश्चित आय के तौर पर।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...

1. UPI पर MDR क्या है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट से लिया जाता है। प्रस्तावित व्यवस्था में 2,000 रुपये से अधिक के P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR की बात कही गई है।

2. UPI MDR से किसे फायदा हो सकता है?

ब्रोकरेज अनुमानों के मुताबिक, बैंकों और पेमेंट कंपनियों के लिए अतिरिक्त रेवेन्यू का रास्ता खुल सकता है। UPI ऐप प्रोवाइडर्स और नॉन-बैंक पेमेंट एग्रीगेटर्स को भी रेवेन्यू शेयर मिलने की संभावना है।

3. UPI MDR से कितनी कमाई का अनुमान है?

अलग-अलग ब्रोकरेज के अनुमान के अनुसार, UPI MDR से इंडस्ट्री का सालाना रेवेन्यू पूल करीब 10,000 करोड़ से 20,600 करोड़ रुपये तक हो सकता है।

 

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