कच्चे तेल की महंगाई से सहमा दुनिया का शेयर बाजार! एशिया में भारी बिकवाली, अमेरिका से यूरोप तक लाल निशान का दबदबा

खबर सार :-

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की आशंकाओं ने फिलहाल वैश्विक शेयर बाजारों का माहौल कमजोर कर दिया है। अमेरिका, यूरोप और एशिया में जारी बिकवाली से निवेशकों की सतर्कता बढ़ी है। आने वाले दिनों में तेल की कीमतें, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और वैश्विक आर्थिक संकेतक बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को सोच-समझकर निवेश संबंधी फैसले लेने चाहिए।
कच्चे तेल की महंगाई से सहमा दुनिया का शेयर बाजार! एशिया में भारी बिकवाली, अमेरिका से यूरोप तक लाल निशान का दबदबा

खबर विस्तार : -

Crude Oil Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने वैश्विक शेयर बाजारों का माहौल बिगाड़ दिया है। बढ़ती महंगाई की आशंका, निवेशकों की सतर्कता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका, यूरोप और एशिया के अधिकांश प्रमुख बाजार गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। वॉल स्ट्रीट से मिले कमजोर संकेतों का असर एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया, जहां लगभग सभी प्रमुख सूचकांक लाल निशान में रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार की दिशा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर रहेगी।

कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। तेल महंगा होने की वजह से उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे महंगाई तेज हो सकती है। इसी आशंका के कारण दुनियाभर के निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी। वह  इसका सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ा और अधिकांश प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

अमेरिकी बाजार में बिकवाली का दबाव जारी

वॉल स्ट्रीट में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान लगातार बिकवाली देखने को मिली। डाउ जॉन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 506.93 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ 51,711.65 अंक पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 इंडेक्स 90.66 अंक यानी 1.21 प्रतिशत टूटकर 7,408.30 अंक पर पहुंच गया। टेक शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा, जिसके चलते नैस्डैक 553.21 अंक यानी 2.15 प्रतिशत फिसलकर 25,137.69 अंक पर बंद हुआ। शुक्रवार को डाउ जॉन्स फ्यूचर्स में भी हल्की कमजोरी बनी रही और यह लगभग 0.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। इससे निवेशकों की सतर्कता और बढ़ गई।

महंगाई की आशंका ने बढ़ाया दबाव

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका में महंगाई बढ़ने के संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यदि ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं। इससे कंपनियों की लागत बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

Global market-Crude oil-Wall Street-European markets

यूरोपीय बाजार भी कमजोरी की चपेट में

यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र के दौरान दबाव बना रहा। ब्रिटेन का एफटीएसई इंडेक्स 0.73 प्रतिशत गिरकर 10,639.17 अंक पर बंद हुआ। फ्रांस का सीएसी इंडेक्स 1.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 8,299.09 अंक पर पहुंच गया। वहीं जर्मनी का डीएएक्स इंडेक्स 392.29 अंक यानी 1.58 प्रतिशत टूटकर 24,763.12 अंक पर बंद हुआ। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक जोखिमों का असर यूरोपीय निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा।

एशियाई बाजारों में चौतरफा बिकवाली का जोर

एशिया के लगभग सभी प्रमुख शेयर बाजार शुक्रवार को लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। गिफ्ट निफ्टी 167 अंक यानी 0.70 प्रतिशत गिरकर 23,695.50 अंक पर पहुंच गया। सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स भी 0.41 प्रतिशत कमजोर रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स सबसे अधिक दबाव में रहा और 5.70 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 6,692.27 अंक पर कारोबार करता दिखा। जापान का निक्केई इंडेक्स 2,032.60 अंक यानी 3.06 प्रतिशत टूटकर 64,390 अंक तक पहुंच गया। ताइवान वेटेड इंडेक्स भी 2.31 प्रतिशत गिरकर 45,812.61 अंक पर कारोबार करता नजर आया।

हांगकांग, चीन और इंडोनेशिया में भी दबाव

इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 2.28 प्रतिशत लुढ़क गया। वहीं हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 1.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी 1.20 प्रतिशत कमजोर रहा, जबकि थाईलैंड का सेट कंपोजिट इंडेक्स हल्की गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। इससे साफ है कि एशियाई बाजारों में निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है असर

वैश्विक बाजारों में जारी कमजोरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। विदेशी निवेशकों की रणनीति, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी आर्थिक संकेतक घरेलू बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव बना रहता है तो भारतीय बाजार में भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़े और कंपनियों के बेहतर नतीजे बाजार को कुछ हद तक सहारा दे सकते हैं।

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FAQ...

1-वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट की मुख्य वजह क्या है?

वैश्विक बाजारों में गिरावट की प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, महंगाई बढ़ने की आशंका और निवेशकों की बढ़ती सतर्कता है।

2-अमेरिकी शेयर बाजार में कौन-कौन से प्रमुख इंडेक्स गिरे?

पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जॉन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक तीनों प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई, जिसमें नैस्डैक में सबसे अधिक 2.15 प्रतिशत की कमजोरी रही।

3-एशियाई बाजारों में सबसे ज्यादा गिरावट किस इंडेक्स में रही?

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स सबसे अधिक प्रभावित रहा, जिसमें करीब 5.70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

4-कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से शेयर बाजार पर क्या असर पड़ता है?

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ती है और निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ने के कारण शेयर बाजार में बिकवाली देखने को मिलती है।

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