सेंसेक्स 154 अंक चढ़ा, निफ्टी 24 हजार के करीब; एफआईआई खरीदारी और वैश्विक संकेतों से बाजार को मिला सपोर्ट

खबर सार :-

भारतीय शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में खरीदारी, व्यापक बाजार में तेजी और वैश्विक संकेतों का समर्थन फिलहाल सकारात्मक माहौल दिखा रहा है। हालांकि आईटी, एफएमसीजी और फार्मा जैसे सेक्टरों में दबाव बना हुआ है। आगे बाजार की दिशा विदेशी निवेश, डॉलर-रुपया चाल, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक संकेतकों से तय होगी। निवेशकों को उतार-चढ़ाव के बीच सावधानी बरतनी चाहिए।
शेयर बाजार में लौटी रौनक, बैंकिंग स्टॉक्स ने संभाली कमान

खबर विस्तार : -

Stock Market Rally: भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ की। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी ने बाजार की तेजी को सहारा दिया। निवेशकों की नजर अब वैश्विक बाजारों के रुख, रुपये की चाल और विदेशी निवेश के आंकड़ों पर बनी हुई है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 154.60 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,724.95 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 83.50 अंक यानी 0.36 प्रतिशत मजबूत होकर 23,997.95 पर कारोबार कर रहा था। बाजार में खरीदारी का रुझान व्यापक रहा और लार्जकैप के साथ मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी दिखाई दी।

बैंकिंग शेयरों ने दिखाया दम

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय शेयर निवेशकों के पसंदीदा बने रहे। निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज शुरुआती कारोबार के प्रमुख बढ़त वाले इंडेक्स रहे। इसके अलावा निफ्टी मीडिया, निफ्टी मेटल, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी कमोडिटीज में भी मजबूती देखी गई। दूसरी ओर, कुछ प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे। निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी कंजप्शन लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों का रुझान सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं है।

मिडकैप-स्मॉलकैप में भी खरीदारी

व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 166 अंक यानी 0.26 प्रतिशत बढ़कर 63,165 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 168 अंक यानी 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 19,981 पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, एक्सिस बैंक, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, भारती एयरटेल, इटरनल, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक और ट्रेंट बढ़त में रहे। इन शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को ऊपर बनाए रखने में मदद की। हालांकि दूसरी तरफ टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इंडिगो, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, टीसीएस, टाइटन, आईटीसी, एचयूएल और एशियन पेंट्स में कमजोरी देखने को मिली। खास तौर पर आईटी शेयरों पर दबाव ने बाजार की कुल तेजी को कुछ हद तक सीमित किया।

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एशियाई बाजारों से भी मिला सहारा

भारतीय बाजार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सकारात्मक संकेत मिले। ज्यादातर प्रमुख एशियाई बाजारों में गुरुवार को तेजी का माहौल रहा। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, जकार्ता और सोल के बाजार हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि हांगकांग में गिरावट देखी गई। इससे पहले अमेरिकी बाजार भी बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुआ था। डाउ जोन्स में 0.56 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.45 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने वैश्विक इक्विटी बाजारों की धारणा को समर्थन दिया।

एफआईआई खरीदारी से बढ़ा भरोसा

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स में गिरावट से उभरते बाजारों के लिए माहौल बेहतर हुआ है। भारत के संदर्भ में विदेशी पूंजी का प्रवाह भी महत्वपूर्ण है। एफसीएनआर (बी) जमा में रिकॉर्ड 136 अरब डॉलर का निवेश आने से रुपये को डॉलर के मुकाबले समर्थन मिलने की उम्मीद है। इससे विदेशी निवेशकों का भारत के प्रति भरोसा मजबूत हो सकता है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की ओर से करीब 9,500 करोड़ रुपये की खरीदारी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश का यह रुझान आगे भी कायम रहता है, तो भारतीय शेयर बाजार को मजबूती मिल सकती है। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और वैश्विक घटनाक्रम बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकते हैं।

अब आगे के संकेतों पर निवेशकों की नजर

गुरुवार की मजबूत शुरुआत के बावजूद बाजार के सामने कई अहम कारक हैं। डॉलर-रुपया विनिमय दर, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेश का रुख और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की दिशा आने वाले सत्रों में कारोबार को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में जारी खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है, लेकिन कमजोर सेक्टरों में दबाव और वैश्विक अनिश्चितता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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