G20 में चीन अलग-थलग, भारत समेत 19 देशों ने व्यापार असंतुलन पर कसा शिकंजा

खबर सार :-

G20 बैठक में चीन का व्यापार असंतुलन और गैर-बाजार नीतियों पर अलग रुख सामने आया, जबकि भारत समेत 19 सदस्यों ने वैश्विक आर्थिक संतुलन पर चेयरमैन के बयान का समर्थन किया। दूसरी ओर, भारत ने विश्व बैंक के साथ सहयोग को नई दिशा देते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और निजी पूंजी पर फोकस बढ़ाया है। इससे वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक और रणनीतिक भूमिका मजबूत होने का संकेत मिलता है।
G20 में चीन को झटका, 19 देशों के साथ भारत ने बढ़ाया दबाव

खबर विस्तार : -

G20 meeting:  वैश्विक व्यापार में बढ़ते असंतुलन और चीन की निर्यात-केंद्रित आर्थिक नीतियों को लेकर जी20 के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, चीन ने जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में ऐसे प्रस्तावों पर सहमति बनने से रोक दिया, जिनका मकसद लगातार बढ़ते व्यापार असंतुलन और गैर-बाजार आर्थिक तौर-तरीकों को संबोधित करना था। हालांकि, चीन को छोड़कर बाकी 19 सदस्यों ने चेयरमैन के बयान का समर्थन किया। भारत भी इन देशों में शामिल रहा।

नॉर्थ कैरोलिना के एशविले में दो दिन चली बैठक के बाद मंगलवार को बेसेंट ने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ा और लगातार बना हुआ करंट अकाउंट सरप्लस रखने वाला देश चीन इस मुद्दे पर सहमत नहीं था। उन्होंने कहा कि बाकी 19 देशों का समर्थन इस बात का संकेत है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में असंतुलन को लेकर चिंता अब व्यापक हो चुकी है।

चीन की आपत्ति के बावजूद 19 देशों की सहमति

चेयरमैन के बयान में कहा गया कि बहुत अधिक और लंबे समय तक बने रहने वाले बाहरी असंतुलन वैश्विक बाजारों को बिगाड़ सकते हैं। इससे सप्लाई चेन कमजोर होने के साथ दूसरी अर्थव्यवस्थाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बयान में देशों से ऐसी गैर-बाजार नीतियों और तौर-तरीकों को खत्म करने की अपील की गई, जो इन असंतुलनों को और बढ़ावा देते हैं। बयान के मुताबिक, जिन देशों में बाहरी सरप्लस बहुत ज्यादा है, उन्हें उन नीतिगत कमियों को दूर करना चाहिए जो घरेलू खपत को सीमित करती हैं और आर्थिक वृद्धि के लिए निर्यात पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता पैदा करती हैं। दूसरी ओर, लगातार बाहरी घाटे वाले देशों से घरेलू बचत बढ़ाने और सरकारी खर्च तथा कर्ज को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया। भारत का चेयरमैन के बयान के समर्थन में खड़ा होना इस लिहाज से अहम है कि नई दिल्ली लंबे समय से वैश्विक व्यापार व्यवस्था में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और बाजार आधारित आर्थिक गतिविधियों की वकालत करता रहा है।

एनर्जी ट्रेड से IMF तक, इन मुद्दों पर चीन ने जताई आपत्ति

बैठक में चीन ने चार प्रमुख हिस्सों पर आपत्ति जताई। इनमें एनर्जी ट्रेड और होर्मुज जलडमरूमध्य, वैश्विक आर्थिक असंतुलन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF की निगरानी और सरकारी कर्ज के पुनर्गठन से जुड़े मुद्दे शामिल थे। बेसेंट ने कहा कि अन्य सदस्यों के बीच बनी सहमति उन अर्थव्यवस्थाओं को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता को दर्शाती है, जो सब्सिडी वाले उत्पादन और निर्यात पर बहुत अधिक निर्भर हैं। उनका कहना था कि गैर-बाजार आधारित अर्थव्यवस्थाओं से सस्ते उत्पादों का लगातार वैश्विक बाजार में आना लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। हालांकि, बेसेंट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जी20 के अन्य देश चीन की नीतियों के जवाब में टैरिफ या अन्य व्यापारिक सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करेंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि हर देश आगे की रणनीति खुद तय करेगा।

IMF से वैश्विक असंतुलन पर ज्यादा निगरानी की मांग

जी20 सदस्यों ने IMF से वैश्विक आर्थिक असंतुलन के कारणों की जांच को और मजबूत करने को कहा है। इसमें घरेलू आर्थिक नीतियों की कमियों और उनके दूसरे देशों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन शामिल है। सदस्य देशों ने यह भी कहा कि अगर असंतुलन को दूर करने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो संभावित नुकसान का अधिक विस्तृत विश्लेषण किया जाना चाहिए। बेसेंट के अनुसार, बैठक में आम सहमति न बन पाने के बावजूद परिणामों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। उनके मुताबिक, 19 देशों को किसी महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दे पर एक साथ सहमत करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। बैठक में निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाली आर्थिक वृद्धि, सरकारी कर्ज, वित्तीय साक्षरता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वित्तीय नियमन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बेसेंट के मुताबिक, जी20 के फाइनेंस ट्रैक के इतिहास में पहली बार बिजनेस लीडर्स को वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के साथ चर्चा में शामिल किया गया।

India G20-Scott Bessent-China trade imbalance

भारत-वर्ल्ड बैंक साझेदारी में नया अध्याय

इसी बैठक के दौरान भारत ने विश्व बैंक समूह के साथ अपनी साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एशविले में विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा से मुलाकात की। दोनों के बीच बातचीत में पारंपरिक कर्ज आधारित सहयोग से आगे बढ़कर इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और निजी पूंजी जुटाने पर फोकस बढ़ाने पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने भारत के साथ विश्व बैंक समूह के लगातार जुड़ाव का स्वागत किया। उन्होंने 1.5 अरब डॉलर के डेवलपमेंट पॉलिसी फाइनेंसिंग को तेजी से प्रोसेस करने के लिए आभार जताया। साथ ही, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन यानी IFC की ओर से SIDBI के जरिए MSME क्षेत्र को दिए जा रहे सहयोग की भी सराहना की गई।

ये भी पढ़ें....सीमा शुल्क से बैंकिंग तक बड़े सुधार की तैयारी, ‘विकसित भारत 2047’ को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार

इंफ्रास्ट्रक्चर और बॉन्ड मार्केट पर बड़ा फोकस

बैठक में भारत और विश्व बैंक समूह के बीच वित्तीय साधनों के ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भारत में मल्टीलेटरल इन्वेस्टमेंट गारंटी एजेंसी यानी MIGA की भूमिका बढ़ाने पर विचार किया। प्रस्तावित मॉडल के तहत गारंटी के व्यवस्थित इस्तेमाल के जरिए निजी पूंजी को आकर्षित करने और भारत के कॉरपोरेट, इंफ्रास्ट्रक्चर तथा म्युनिसिपल बॉन्ड बाजार को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सेक्टर आधारित और प्रोग्रामेटिक अप्रोच पर भी विचार हुआ। इसका उद्देश्य अलग-अलग परियोजनाओं के बजाय बड़े सेक्टरों को एक व्यापक कार्यक्रम के तहत वित्तीय और नीतिगत समर्थन देना है। अजय बंगा ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए देश की विकास महत्वाकांक्षाओं को समर्थन देने के लिए विश्व बैंक समूह के संसाधनों के अधिक इस्तेमाल की संभावनाओं पर चर्चा की।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और टूरिज्म पर साझेदारी

भारत ने ग्लोबल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर नॉलेज हब बनाने की दिशा में अपने प्रयासों की जानकारी भी दी। प्रस्तावित हब के जरिए कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और उसके विस्तार के तरीकों पर काम किया जाएगा। भारत को उम्मीद है कि इसे जल्द लॉन्च किया जा सकेगा। पर्यटन के क्षेत्र में भी नई साझेदारी का प्रस्ताव रखा गया। निर्मला सीतारमण ने नए भारत-वर्ल्ड बैंक कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी पर्यटन गंतव्यों के विकास का सुझाव दिया। इसके तहत IBRD से नीतिगत और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग, IFC से निजी क्षेत्र का निवेश और MIGA से गारंटी को एकीकृत करने की योजना है। इस मॉडल से भारत पर्यटन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और नीतिगत सुधारों को भी गति देना चाहता है।

G20 में भारत की भूमिका और बढ़ी

G20 में 19 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ शामिल हैं। इसके सदस्य देश वैश्विक आर्थिक उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और दुनिया की आबादी के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। संगठन में फैसले सामान्यतः आम सहमति के आधार पर लिए जाते हैं, हालांकि ये फैसले कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते। भारत ने 2023 में G20 की अध्यक्षता की थी। उस दौरान यूक्रेन युद्ध को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद नई दिल्ली में नेताओं का घोषणापत्र तैयार किया गया था। 2026 में अमेरिका G20 की अध्यक्षता कर रहा है और उसके फाइनेंस ट्रैक की प्राथमिकताओं में आर्थिक विकास, वैश्विक असंतुलन, सरकारी कर्ज और वित्तीय नवाचार जैसे विषय प्रमुख हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार और आर्थिक नीतियों को लेकर चीन और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है, भारत का 19 देशों के साथ आर्थिक असंतुलन पर बने बयान का समर्थन और विश्व बैंक के साथ रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश उसकी वैश्विक आर्थिक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा सकता है।

ये भी पढ़ें...मजबूत घरेलू मांग, निवेश और सेवा क्षेत्र ने दिया दम; इंडस्ट्री चैम्बर्स ने विकास की रफ्तार को बताया उत्साहजनक

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...

1.G20 बैठक में चीन ने किस मुद्दे पर आम सहमति का विरोध किया?

चीन ने व्यापार में लगातार बढ़ते असंतुलन और गैर-बाजार आधारित आर्थिक नीतियों से जुड़े प्रस्तावों पर आपत्ति जताई।

2.चीन के रुख के बावजूद कितने देशों ने बयान का समर्थन किया?

चीन को छोड़कर G20 के बाकी 19 सदस्यों ने चेयरमैन के बयान का समर्थन किया। भारत भी इनमें शामिल था।

3.भारत और वर्ल्ड बैंक के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा?

दोनों पक्षों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और निजी पूंजी जुटाने पर सहयोग बढ़ाने की चर्चा की।

4.G20 में भारत की क्या भूमिका रही है?

भारत ने 2023 में G20 की अध्यक्षता की थी और नई दिल्ली में सदस्य देशों के मतभेदों के बावजूद नेताओं का घोषणापत्र तैयार करवाया था।

 

अन्य प्रमुख खबरें