अमेरिका-ईरान युद्ध से शेयर बाजार में भूचाल, निफ्टी 24 हजार के नीचे, सेंसेक्स भी धड़ाम
खबर सार :-
अमेरिका-ईरान के बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा, जहां निफ्टी 24,000 के नीचे चला गया और सेंसेक्स में तेज गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
खबर विस्तार : -
Indian Stock Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए सैन्य संघर्ष का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कमजोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच घरेलू बाजार मंगलवार को लाल निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 472.96 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,471.32 अंक पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 197.80 अंक यानी 0.82 प्रतिशत टूटकर 23,858.00 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट के साथ निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया।
बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक रहा। शुरुआती कारोबार में करीब सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में नजर आए। निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों की धारणा पर वैश्विक तनाव के साथ महंगे कच्चे तेल की चिंता भी हावी रही।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भी जोरदार बिकवाली
बाजार की गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 725.80 अंक यानी 1.15 प्रतिशत टूटकर 62,608.70 पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 199.85 अंक यानी 1.00 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,686.40 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में महंगाई, ब्याज दरों और कंपनियों की लागत पर संभावित असर को लेकर बाजार में सतर्कता बढ़ गई है।
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सेंसेक्स के ज्यादातर शेयर लाल
सेंसेक्स पैक में शुरुआती कारोबार के दौरान सन फार्मा और अदाणी पोर्ट्स ही बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। इसके उलट इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, इंडिगो, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा और बीईएल समेत कई दिग्गज शेयर दबाव में रहे। एशियन पेंट्स, इटरनल, आईटीसी, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, बजाज फिनसर्व और टाइटन जैसे शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। आईटी और ऑटो जैसे प्रमुख सेक्टरों में दबाव ने बाजार की शुरुआती गिरावट को और बढ़ाया।
एशियाई बाजारों पर भी युद्ध का असर
भारतीय बाजार की कमजोरी अकेली नहीं थी। ज्यादातर एशियाई बाजारों में भी मंगलवार को गिरावट के साथ कारोबार हुआ। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, सोल और बैंकॉक के प्रमुख बाजार लाल निशान में रहे। इससे पहले अमेरिकी बाजार भी कमजोरी के साथ बंद हुए थे। डाओ जोन्स में 0.79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक 1.03 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में इस दबाव की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा सैन्य तनाव माना जा रहा है। विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने मंगलवार को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर कई हमले किए। अमेरिकी कार्रवाई में एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री संपत्तियों और सुविधाओं, माइन बिछाने की क्षमताओं तथा कम्युनिकेशन साइट्स को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन और इराक में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है और वैश्विक निवेशकों के बीच जोखिम की धारणा मजबूत हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में आया तूफानी उछाल
अमेरिका-ईरान संघर्ष का सबसे तत्काल असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव 4 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत भी 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। महंगा कच्चा तेल भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता बढ़ा सकता है। इससे आयात बिल बढ़ने, रुपये पर दबाव आने और कंपनियों की लागत प्रभावित होने की आशंका रहती है। यही वजह है कि भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी को घरेलू शेयर बाजार के लिए दोहरी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। निवेशकों की नजर अब अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े अगले घटनाक्रम, कच्चे तेल की दिशा और वैश्विक बाजारों के रुख पर रहेगी। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
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