GDP विवाद पर N.K. सिंह का पलटवार, बोले- आंकड़ों में हेरफेर के आरोप पूरी तरह आधारहीन

खबर सार :-

एनके सिंह ने जीडीपी आंकड़ों में कथित हेरफेर के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आधार वर्ष और गणना पद्धति में बदलाव आर्थिक आंकड़ों को अधिक सटीक बनाने की सामान्य प्रक्रिया है। 7.8 प्रतिशत की नई विकास दर और ‘ए’ सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को उन्होंने भारत की आर्थिक मजबूती का संकेत बताया। उनके मुताबिक, दोनों उपलब्धियां अर्थव्यवस्था की बदलती संरचना और चुनौतियों से उबरने की क्षमता दर्शाती हैं।
GDP विवाद पर N.K. सिंह का पलटवार, बोले- आरोप पूरी तरह आधारहीन

खबर विस्तार : -

India GDP Growth: भारत की GDP ग्रोथ को लेकर जारी राजनीतिक और आर्थिक बहस के बीच 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन और अर्थशास्त्री एनके सिंह ने सरकार का बचाव किया है। उन्होंने जीडीपी के आंकड़ों में कथित हेरफेर के आरोपों को पूरी तरह आधारहीन बताया। सिंह ने कहा कि आर्थिक आंकड़ों की गणना में समय-समय पर बदलाव करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली सामान्य प्रक्रिया है और इसे आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश नहीं माना जाना चाहिए।

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की ओर से जीडीपी कैलकुलेशन की प्रक्रिया पर उठाई गई चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि उन्हें सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों में कोई आधार नजर नहीं आता। उनके मुताबिक, अर्थव्यवस्था लगातार बदलती रहती है और उसके साथ आर्थिक गतिविधियों की प्रकृति भी बदलती है। ऐसे में पुराने आंकड़ों और तरीकों को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी होता है।

आधार वर्ष बदलना क्यों जरूरी?

सिंह ने समझाया कि जीडीपी की गणना के लिए आधार वर्ष बदलना कोई असामान्य कदम नहीं है। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था में नए क्षेत्र उभरते हैं, कारोबार के तरीके बदलते हैं और ज्यादा व्यापक डेटा उपलब्ध होता है, वैसे-वैसे गणना की पद्धति को भी अपडेट किया जाता है। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति और विकास की दिशा को अधिक सटीक तरीके से समझना होता है। उन्होंने कहा कि नए डेटा और आर्थिक गतिविधियों के बदलते स्वरूप को शामिल करने के लिए देश समय-समय पर जीडीपी के आधार वर्ष में बदलाव करते हैं। इससे अर्थव्यवस्था में हो रहे संरचनात्मक बदलावों को आंकड़ों में बेहतर ढंग से दर्ज किया जा सकता है। सिंह के मुताबिक, हालिया बदलावों को सरकार द्वारा आर्थिक आंकड़ों में हेरफेर के तौर पर देखना सही नहीं होगा। उन्होंने इसे जीडीपी अनुमानों को अधिक मजबूत, व्यापक और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की कोशिश बताया। उनका कहना था कि नई कार्यप्रणाली में पहले की तुलना में अधिक डेटा और आर्थिक क्षेत्रों की बड़ी रेंज को शामिल किया गया है।

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नए अनुमान से 7.8% की ग्रोथ

नई कार्यप्रणाली के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.8 प्रतिशत बताई गई है। सिंह ने इस अनुमान को देश की आर्थिक मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि बेहतर जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा भारत की अर्थव्यवस्था में मौजूद मजबूती को सामने लाता है। उनके अनुसार, अर्थव्यवस्था का आकलन केवल एक आंकड़े के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। जीडीपी की गणना के तरीके, उपलब्ध डेटा की गुणवत्ता और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले बदलावों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। यही वजह है कि समय के साथ राष्ट्रीय आय और उत्पादन के आंकड़ों की समीक्षा की जाती है।

क्रेडिट रेटिंग में सुधार का भी जिक्र

एनके सिंह ने जीडीपी के ताजा अनुमान को भारत की बेहतर सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत ने 38 साल के अंतराल के बाद ‘ए’ क्रेडिट रेटिंग दोबारा हासिल की है। उनके मुताबिक, भारत 1988 में ‘ए’-रेटेड देश था, लेकिन 1991 में यह रेटिंग खोने के बाद इस श्रेणी में लौटने के लिए 2026 तक इंतजार करना पड़ा। सिंह ने कहा कि क्रेडिट रेटिंग में सुधार और जीडीपी के नए अनुमानों का एक ही समय में सामने आना खास तौर पर महत्वपूर्ण है। उन्होंने इन दोनों घटनाओं को भारतीय अर्थव्यवस्था की अंदरूनी मजबूती और चुनौतियों से उबरने की क्षमता का संकेत बताया।

मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर सॉवरेन रेटिंग

एनके सिंह ने इसे ‘खुशी का संयोग’ करार देते हुए कहा कि मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर सॉवरेन रेटिंग भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश करती हैं। उनके मुताबिक, इन घटनाओं को व्यापक आर्थिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक बहस के नजरिए से। GDP आंकड़ों पर विवाद के बीच सिंह की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब आर्थिक विकास दर की गणना और उसमें किए गए बदलावों को लेकर विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज है। सिंह का तर्क है कि आंकड़ों की पद्धति में बदलाव का मुख्य उद्देश्य बदलती अर्थव्यवस्था को अधिक सटीक रूप से मापना है। इसलिए किसी भी संशोधन को स्वतः आंकड़ों में हेरफेर मानना उचित नहीं है।

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