युद्ध का तनाव घटा, तेल हुआ सस्ता, सेंसेक्स ने पकड़ी रफ्तार, 79 हजार के करीब पहुंचा बाजार

खबर सार :-

भारतीय शेयर बाजार की मौजूदा तेजी केवल घरेलू कारकों का परिणाम नहीं है, बल्कि वैश्विक युद्ध तनाव में कमी, कच्चे तेल की नरमी और महंगाई को लेकर बेहतर उम्मीदों का संयुक्त प्रभाव है। हालांकि निवेशकों को अभी भी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और भू-राजनीतिक जोखिमों पर नजर बनाए रखनी होगी, क्योंकि यही आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेंगे।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, 79 हजार पहुंचा सेंसेक्स

खबर विस्तार : -

Indian Share Market: मध्य पूर्व में युद्ध संबंधी तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊर्जा दी है। वैश्विक महंगाई के दबाव के बीच तेल सस्ता होने से निवेशकों को राहत मिली, जिसका असर सोमवार को घरेलू बाजार में जोरदार तेजी के रूप में दिखाई दिया। सेंसेक्स 79 हजार के करीब पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं तो भारतीय बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है।

निवेशकों का भरोसा फिर से हुआ मजबूत

भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत किया। वैश्विक तनाव कम होने की वजह से सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 788.70 अंक यानी 1.01 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,883.34 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 189.10 अंक यानी 0.78 प्रतिशत चढ़कर 24,572.70 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था युद्ध, महंगाई और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।

कच्चे तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत तक की गिरावट

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की इस मजबूती की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट रही। अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले रोकने के संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में करीब पांच प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे यह उम्मीद बढ़ी कि ऊर्जा लागत घटने से दुनिया भर में महंगाई का दबाव कुछ कम हो सकता है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है।

Stock Market-FMCG Sector

मेटल और एफएमसीजी सेक्टर में खरीदारी का असर

भारतीय शेयर बाजार में आज के शुरुआती कारोबार में सबसे अधिक खरीदारी मेटल और एफएमसीजी सेक्टर में देखने को मिली। निफ्टी मेटल और निफ्टी एफएमसीजी प्रमुख बढ़त वाले सूचकांक रहे। इसके अलावा पीएसयू बैंक, कमोडिटीज, आईटी, ऑटो, इंफ्रा, सर्विसेज, इंडिया डिफेंस और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर हेल्थकेयर, फार्मा और मीडिया सेक्टर हल्के दबाव में नजर आए। बाजार की चौतरफा मजबूती का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 274 अंक बढ़कर 62,181 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 164 अंक की बढ़त के साथ 19,513 पर कारोबार करता दिखा। इससे स्पष्ट हुआ कि निवेशकों का भरोसा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक बाजार में भी खरीदारी देखने को मिली।

सेंसेक्स में प्रमुख कंपनियों के शेयरों की स्थिति

सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में इंडिगो, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, टीसीएस, इन्फोसिस, एलएंडटी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, बीईएल, हिंदुस्तान यूनिलीवर, पावर ग्रिड, ट्रेंट, अदाणी पोर्ट्स, एनटीपीसी, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचसीएल टेक के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी रही। वहीं सन फार्मा, मारुति सुजुकी और भारती एयरटेल के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों का रुख हालांकि मिश्रित रहा। एशिया के अधिकांश प्रमुख बाजारों-टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, सोल और जकार्ता-में कमजोरी देखने को मिली। इसके विपरीत अमेरिकी शेयर बाजार पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। डाओ जोन्स में 0.53 प्रतिशत और नैस्डैक में लगभग एक प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की धारणा को सकारात्मक समर्थन मिला।

भू-राजनीतिक तनाव पर आधारित वैश्विक बाजारों की दिशा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव पिछले कई महीनों से वैश्विक बाजारों की दिशा तय कर रहे हैं। जब भी संघर्ष बढ़ता है, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है और महंगाई बढ़ने का खतरा गहरा जाता है। लेकिन हालिया घटनाक्रम ने निवेशकों को यह संकेत दिया है कि यदि तनाव नियंत्रित रहता है तो ऊर्जा कीमतों में नरमी बनी रह सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव भी कम हो सकता है, जिसका सीधा लाभ शेयर बाजारों को मिलता है। तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। सस्ता कच्चा तेल चालू खाते के घाटे, ईंधन लागत और परिवहन खर्च को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इससे महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

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FAQ...

1. भारतीय शेयर बाजार में आज तेजी क्यों आई?

मध्य पूर्व में युद्ध तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिससे बाजार में खरीदारी तेज हुई।

2. सेंसेक्स और निफ्टी किस स्तर पर कारोबार कर रहे थे?

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 78,883.34 और निफ्टी 24,572.70 के स्तर पर पहुंच गया था।

3. किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली?

शेयर बाजार में मेटल, एफएमसीजी, आईटी, ऑटो, पीएसयू बैंक, इंफ्रा और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई।

4. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ता है?

सस्ता कच्चा तेल आयात लागत और महंगाई का दबाव कम करता है, जिससे कंपनियों की लागत घटती है और शेयर बाजार को समर्थन मिलता है।

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