HDFC बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने लीगल रिव्यू पर उठाए सवाल; रिपोर्ट्स को बताया 'अनावश्यक'
खबर सार :-
एचडीएफसी बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के बयान ने उनके इस्तीफे और उसके बाद हुई कानूनी समीक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि बैंक को कानूनी जांच के बजाय आंतरिक कार्यप्रणालियों और नैतिक मूल्यों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था। यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस और बोर्ड की पारदर्शिता पर भी व्यापक चर्चा को जन्म दे सकता है।
खबर विस्तार : -
HDFC Bank Legal review: एचडीएफसी बैंक के पूर्व पार्ट-टाइम चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतानु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे के बाद बैंक की ओर से कराए गए लीगल रिव्यू पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफे की समीक्षा के लिए नियुक्त की गई लॉ फर्मों की पूरी कवायद अनावश्यक थी। उनका आरोप है कि उन्होंने कई बार बैंक के बोर्ड से पूछा कि आखिर किन कानूनी प्रावधानों और नियमों के तहत इन लॉ फर्मों की नियुक्ति की गई, लेकिन उन्हें इसका स्पष्ट जवाब कभी नहीं मिला।
एनडीटीवी प्रॉफिट से बातचीत में चक्रवर्ती ने कहा कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्तिगत विवाद या प्रशासनिक कारण से नहीं था, बल्कि बैंक की कुछ कारोबारी कार्यप्रणालियों और उनके व्यक्तिगत मूल्यों के बीच बढ़ते मतभेद का परिणाम था। उनका उद्देश्य बैंक को आत्ममंथन और आंतरिक समीक्षा के लिए प्रेरित करना था, लेकिन इसके बजाय पूरा ध्यान कानूनी अनुपालन और प्रक्रियात्मक जांच पर केंद्रित कर दिया गया।
रिपोर्ट में इंटरव्यू और बोर्ड मीटिंग के मिनट्स पर रहा फोकस
पूर्व चेयरमैन के मुताबिक, बैंक की ओर से नियुक्त लॉ फर्मों ने अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय बोर्ड मीटिंग के मिनट्स, इंटरव्यू और अन्य प्रक्रियात्मक दस्तावेजों का अध्ययन किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन रिपोर्टों में उन मूलभूत कारणों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिनकी वजह से उन्होंने अपना पद छोड़ा था। उनके अनुसार, यह समीक्षा उनके इस्तीफे के वास्तविक उद्देश्य से भटक गई। चक्रवर्ती का मानना है कि यदि बैंक वास्तव में उनके इस्तीफे के पीछे की चिंताओं को समझना चाहता, तो उसे कारोबारी प्रक्रियाओं और संस्थागत संस्कृति का मूल्यांकन करना चाहिए था, न कि केवल कानूनी औपचारिकताओं तक सीमित रहना चाहिए था।
कारोबारी प्रथाओं पर नहीं खोले पत्ते
हालांकि अतानु चक्रवर्ती ने यह स्वीकार किया कि बैंक की कुछ कारोबारी प्रथाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मानदंडों के अनुरूप नहीं थीं, लेकिन उन्होंने उन प्रथाओं का खुलासा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि बोर्डरूम में हुई चर्चाएं सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए और संस्थागत गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने दोहराया कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्ति विशेष या किसी एक फैसले के खिलाफ नहीं था, बल्कि उन घटनाक्रमों को लेकर था जिन्हें उन्होंने पिछले दो वर्षों के दौरान बैंक के भीतर महसूस किया।
एटी-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामले पर भी दी प्रतिक्रिया
दुबई से जुड़े एटी-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग मामले पर भी चक्रवर्ती ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि यह मामला उनके कार्यकाल के दौरान सामने आया था, लेकिन बैंक ने उस समय तेजी से सुधारात्मक कदम उठाए थे। उनके अनुसार, इस मामले में आवश्यक कार्रवाई समय पर की गई थी और बैंक ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया।
18 मार्च को दिया था इस्तीफा
अतानु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक पद से इस्तीफा दिया था। वर्ष 2021 में बैंक के बोर्ड से जुड़े चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में लिखा था कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने बैंक के भीतर कुछ ऐसे घटनाक्रम और कार्यप्रणालियां देखीं, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनके इस्तीफे का कारण यही था और इसके पीछे कोई अन्य ठोस वजह नहीं थी। बैंक की ओर से कराए गए लीगल रिव्यू पर अब उनके ताजा बयान ने पूरे घटनाक्रम को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इससे कॉरपोरेट गवर्नेंस, बोर्ड की पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही जैसे मुद्दों पर नई बहस शुरू होने की संभावना है।
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