ED Action: 356 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, 35.52 करोड़ की संपत्ति जब्त
खबर सार :-
ED Action: ED की जांच, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (जिसमें यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र और बैंक ऑफ़ बड़ौदा भी शामिल थे) की अगुवाई वाले बैंकों के एक ग्रुप की शिकायत पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा दर्ज FIR पर आधारित है।
खबर विस्तार : -
ED Action 356 Crore Bank Fraud Case: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश में बैंक धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 35.52 करोड़ की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) कर लिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है। ED द्वारा ज़ब्त की गई संपत्तियों में इंदौर और शाजापुर जिलों में स्थित रिहायशी फ़्लैट और जमीन के कई टुकड़े शामिल हैं। ये संपत्तियां आरोपियों के नाम पर रजिस्टर्ड हैं।
क्या है पूरा मामला
ईडी के इंदौर सब-ज़ोनल ऑफ़िस ने मंगलवार को बताया कि यह मामला M/s धनलक्ष्मी सॉल्वैक्स प्राइवेट लिमिटेड (Dhanlaxmi Solvex Pvt. Ltd), उसके डायरेक्टरों और उससे जुड़ी संस्थाओं व व्यक्तियों से जुड़ा है। कंपनी पर बैंकों के साथ लगभग 356.31 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। ईडी की जांच से पता चला है कि धनलक्ष्मी सॉल्वैक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों/डायरेक्टरों ने कथित तौर पर गलत जानकारी देकर बैंक लोन और क्रेडिट सुविधाएं हासिल कीं और बाद में अपनी ही कंपनियों के नेटवर्क के ज़रिए लोन के पैसे को दूसरी जगहों पर भेज दिया या हड़प लिया। जांच एजेंसी ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का फोकस बैंक धोखाधड़ी से मिले या उससे जुड़े फंड के निवेश पर है। इस प्रक्रिया के तहत संपत्तियों को अस्थायी रूप से ज़ब्त किया गया है।
ED कर रही है मामले की जांच
फिलहाल ईडी इस मामले में फंड के स्रोत, उनके इस्तेमाल और अलग-अलग संपत्तियों में किए गए निवेश की जांच कर रही है। कंपनी के डायरेक्टरों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय लेन-देन और अन्य संपत्तियों की जांच जारी रहेगी और जांच के नतीजों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि ED ने 26 फरवरी को मध्य प्रदेश के इंदौर और देवास में पांच जगहों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान कई ज़रूरी दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस और फाइनेंशियल रिकॉर्ड ज़ब्त किए गए। ज़ब्त की गई संपत्तियों में मध्य प्रदेश के इंदौर और शाजापुर ज़िलों में आरोपियों के नाम पर मौजूद रिहायशी फ़्लैट और ज़मीन के टुकड़े शामिल हैं।
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