OFS से सरकारी खजाने में रिकॉर्ड भराव: 2026 में केंद्र ने जुटाए 25,000 करोड़ रुपए से अधिक
खबर सार :-
सरकार के लिए OFS 2026 में राजस्व जुटाने का एक मजबूत माध्यम बनकर उभरा है। 25,000 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली यह दिखाती है कि निवेशकों का भरोसा सरकारी कंपनियों पर कायम है। बाजार की चुनौतियों के बावजूद अधिकांश पीएसयू (PSU) शेयरों का प्रदर्शन सकारात्मक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुटाई गई राशि सब्सिडी और अन्य सरकारी खर्चों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
खबर विस्तार : -
Central Government OFS: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026 में सरकारी कंपनियों में ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 25,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। बाजार आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने अब तक आठ सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) में अपनी हिस्सेदारी बेचकर करीब 25,491 करोड़ रुपए जुटाए हैं। यह पिछले एक दशक में ओएफएस के माध्यम से हासिल की गई सबसे बड़ी राशि मानी जा रही है।
2015 के बाद सबसे बड़ी OFS वसूली
प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में जुटाई गई यह रकम 2015 के बाद सबसे अधिक है। वर्ष 2015 में केंद्र सरकार ने पांच सूचीबद्ध सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर लगभग 35,291 करोड़ रुपए जुटाए थे। हालांकि मौजूदा वर्ष का आंकड़ा उस रिकॉर्ड से कम है, लेकिन यह दर्शाता है कि सरकार विनिवेश और हिस्सेदारी बिक्री के जरिए राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के लिए ओएफएस पूंजी जुटाने का एक प्रभावी और अपेाकृत तेज माध्यम बन चुका है। इससे बाजार में शेयरों की उपलब्धता बढ़ती है और सरकार को अपनी हिस्सेदारी कम करते हुए संसाधन जुटाने का अवसर मिलता है।
Private Companies ने भी दिखाया OFS में दम
सिर्फ सरकारी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि निजी कंपनियां भी इस वर्ष ओएफएस बाजार का भरपूर उपयोग कर रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक कुल 24 सूचीबद्ध कंपनियों ने ओएफएस के जरिए करीब 29,445 करोड़ रुपए जुटाए हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2024 में 28 कंपनियों द्वारा जुटाए गए 30,178 करोड़ रुपए के बेहद करीब पहुंच चुका है। वहीं, 2015 में 19 कंपनियों द्वारा ओएफएस के जरिए जुटाए गए 35,566 करोड़ रुपए के सर्वकालिक रिकॉर्ड से भी बहुत दूर नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय पूंजी बाजार में ओएफएस निवेशकों और कंपनियों दोनों के लिए एक लोकप्रिय विकल्प बना हुआ है।
किन सरकारी कंपनियों में बेची गई हिस्सेदारी
केंद्र सरकार ने इस वर्ष जिन प्रमुख सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री की है, उनमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं। इन कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी कम करने के साथ-साथ बाजार से पूंजी जुटाने का उद्देश्य भी पूरा हुआ है। सरकार लंबे समय से रणनीतिक विनिवेश और सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बिक्री के जरिए राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रही है।
बाजार की अस्थिरता के बीच भी सफल रहा OFS
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निकासी, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में समय-समय पर अस्थिरता बनी रही। इसके बावजूद पीएसयू कंपनियों के ओएफएस इश्यू को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिला। विश्लेषकों का कहना है कि अधिकांश सरकारी कंपनियों के शेयरों ने ओएफएस के बाद संतोषजनक प्रदर्शन किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों का सरकारी कंपनियों में भरोसा बना हुआ है और लंबी अवधि के निवेशकों ने इन अवसरों का लाभ उठाया है।
BHEL बना सबसे बड़ा विजेता
हाल ही में ओएफएस के जरिए विनिवेश की गई कंपनियों में बीएचईएल का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है। कंपनी का शेयर अपने OFS फ्लोर प्राइस से करीब 62 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा है, जो निवेशकों के लिए बड़ा रिटर्न साबित हुआ है। दूसरी ओर, आईआरएफसी का शेयर फरवरी में तय किए गए ओएफएस फ्लोर प्राइस से लगभग 3 प्रतिशत नीचे बना हुआ है। वहीं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI) ने मई में हिस्सेदारी बिक्री के बाद से करीब 6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है। कोल इंडिया और एनएचपीसी के शेयर अपने-अपने फ्लोर प्राइस से लगभग 9 प्रतिशत ऊपर पहुंच चुके हैं। इसके अलावा एनएलसी इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के शेयरों में क्रमशः करीब 1 प्रतिशत और 4 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है।
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