Global Tension में नरमी का असर: चार महीने के निचले स्तर पर पहुंचा कच्चा तेल, भारत को बड़ी राहत

खबर सार :-

कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया गिरावट वैश्विक बाजारों के लिए राहत का संकेत है। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता और होर्मुज स्ट्रेट से सामान्य होती आपूर्ति ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को इससे आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, इसलिए बाजार की दिशा आने वाले घटनाक्रमों पर निर्भर रहेगी।
Global Tension में नरमी का असर: चार महीने के निचले स्तर पर पहुंचा कच्चा तेल, भारत को बड़ी राहत

खबर विस्तार : -

Global crude oil prices Down: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव में कमी और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता की प्रगति का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दबाव देखने को मिला, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों करीब चार महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गए। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं में कमी और होर्मुज स्ट्रेट से सामान्य शिपिंग गतिविधियों की वापसी ने बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाया है।

Brent और WTI दोनों में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.63 प्रतिशत कमजोर होकर 72.76 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पिछले महीने के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की जा चुकी है। विश्लेषकों का कहना है कि हाल के हफ्तों में बाजार में तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कम हुई हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

 Hormuz Strait को लेकर घटी चिंता

वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से होता है। कुछ समय पहले तक इस रणनीतिक जलमार्ग में संभावित व्यवधान को लेकर बाजार में भारी चिंता थी। हालांकि अब हालात सामान्य होते दिखाई दे रहे हैं। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़े तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में फंसे कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। अब रिपोर्ट्स के अनुसार, ये टैंकर दोबारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की तैयारी कर रहे हैं। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक कम हुई है।

कूटनीतिक प्रयासों का दिखा असर

अमेरिका, ईरान और क्षेत्र के अन्य प्रभावशाली देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों ने भी बाजार को राहत दी है। निवेशकों को उम्मीद है कि वार्ता के सकारात्मक परिणाम सामने आने पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और अधिक स्थिर होगी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतें केवल मांग और आपूर्ति पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी इन पर बड़ा प्रभाव डालते हैं। वर्तमान में शांति वार्ता से जुड़े सकारात्मक संकेतों ने जोखिम प्रीमियम को कम कर दिया है, जिसके कारण कच्चे तेल के दाम नीचे आए हैं।

भारत के लिए क्यों है राहत की खबर?

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक मानी जा रही है। कम तेल कीमतों का सीधा असर आयात बिल पर पड़ता है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटता है। साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों की लागत कम होने से महंगाई पर नियंत्रण रखने में भी मदद मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेंट क्रूड का 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहना भारत के लिए अनुकूल स्थिति है। इससे रुपये को स्थिरता मिल सकती है और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है।

आगे की परिस्थितियों पर निवेशकों की नजर

हालांकि मौजूदा स्थिति राहत देने वाली है, लेकिन ऊर्जा बाजार के जानकार अभी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। उनका मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी किसी भी नई घटना या भू-राजनीतिक तनाव के फिर बढ़ने पर तेल बाजार में दोबारा अस्थिरता लौट सकती है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा अभी भी इस समुद्री मार्ग पर निर्भर है। इसलिए किसी भी प्रकार की रुकावट कीमतों में अचानक उछाल ला सकती है। फिलहाल बाजार अमेरिका-ईरान वार्ता और पश्चिम एशिया की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।

अन्य प्रमुख खबरें