Share Market Crashed: सेंसेक्स 893 अंक टूटा, IT-Metal शेयरों में बिकवाली से निवेशकों को झटका
खबर सार :-
भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का कारोबारी सत्र निराशाजनक रहा, जहां वैश्विक कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और प्रॉफिट बुकिंग ने बाजार की रफ्तार थाम दी। हालांकि कच्चे तेल की स्थिर कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव में कमी कुछ राहत देने वाले कारक हैं, लेकिन निवेशकों की नजर अब मानसून की प्रगति, वैश्विक संकेतों और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर बनी रहेगी।
खबर विस्तार : -
Share Market Crashed: भारतीय शेयर बाजार में लगातार कई कारोबारी सत्रों तक तेजी का माहौल देखने के बाद मंगलवार को जोरदार गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेत, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और प्रमुख सेक्टरों में मुनाफावसूली के चलते बाजार दबाव में आ गया। दिनभर उतार-चढ़ाव के बीच कारोबार करने के बाद बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 893.39 अंक यानी 1.16 प्रतिशत टूटकर 76,200.68 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी50 278.80 अंक यानी 1.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,824.10 पर पहुंच गया। बाजार में बिकवाली का असर व्यापक रूप से देखने को मिला और निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ी कमी दर्ज की गई।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव
गिरावट केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी कमजोरी दिखाई दी। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.05 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों में भी मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने सुरक्षित रणनीति अपनाते हुए कई शेयरों में मुनाफा बुक किया, जिसका असर व्यापक बाजार पर पड़ा।
मेटल सेक्टर सबसे बड़ा कमजोर खिलाड़ी
सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह दिन का सबसे कमजोर सेक्टर साबित हुआ। वैश्विक स्तर पर धातुओं की कीमतों में कमजोरी और मांग को लेकर बनी अनिश्चितता ने मेटल कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ाया। आईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसयू बैंक) शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई। दूसरी ओर, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे और इनमें सीमित गिरावट देखने को मिली।
इन दिग्गज शेयरों में आई सबसे ज्यादा गिरावट
निफ्टी50 में शामिल प्रमुख कंपनियों में इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस और जेएसडब्ल्यू स्टील के शेयर सबसे अधिक टूटे। इसके अलावा टाटा स्टील, हिंडाल्को, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल) और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयरों में भी 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक टेक सेक्टर में कमजोरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े बदलावों को लेकर चिंताओं ने आईटी शेयरों पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
एशियाई बाजारों की कमजोरी का असर
भारतीय बाजार पर सबसे बड़ा असर एशियाई बाजारों में आई तेज गिरावट का पड़ा। दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक कोस्पी एक समय करीब 10 प्रतिशत तक लुढ़क गया, जिसके बाद बाजार नियामकों को 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। ट्रेडिंग दोबारा शुरू होने के बाद भी गिरावट 9 प्रतिशत से अधिक बनी रही। जापान का निक्केई इंडेक्स 225 लगभग 3.2 प्रतिशत फिसला, जबकि चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग भी करीब 2 प्रतिशत तक कमजोर रहे। एशियाई बाजारों में इस व्यापक कमजोरी ने भारतीय निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी चिंता का कारण
बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक अन्य प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली रही। सोमवार को एफआईआई ने करीब 635.91 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया 6 पैसे कमजोर होकर 94.69 के स्तर पर पहुंच गया। विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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