लगातार पांच दिन की बढ़ोतरी पर ब्रेक: लाल निशान में खुला बाजार, Sensex 700 अंक से ज्यादा टूटा, IT शेयरों में भारी बिकवाली
खबर सार :-
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को तेज गिरावट जरूर देखने को मिली, लेकिन विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि की कमजोरी नहीं मान रहे हैं। आईटी शेयरों में वैश्विक कारणों से दबाव बना, जबकि बैंकिंग और चुनिंदा सेक्टरों में मजबूती की उम्मीद बरकरार है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बेहतर आर्थिक संकेतक आने वाले दिनों में बाजार को दोबारा समर्थन दे सकते हैं।
खबर विस्तार : -
Stock market crash: भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को कमजोर शुरुआत की। लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक तेजी दर्ज करने के बाद बाजार में मुनाफावसूली हावी रही, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुलते ही दबाव में आ गए। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 24 हजार के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर में देखने को मिला, जहां निवेशकों की भारी बिकवाली के कारण निफ्टी आईटी इंडेक्स में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत
कारोबार की शुरुआत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,409.98 अंक के मुकाबले 557.12 अंक गिरकर 76,852.86 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 176.8 अंक टूटकर 23,991.20 के स्तर पर पहुंच गया। सुबह लगभग 9:25 बजे तक सेंसेक्स 773 अंक यानी 1.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,635 पर कारोबार कर रहा था। इसी समय निफ्टी 50 भी 214.85 अंक या 0.89 प्रतिशत कमजोर होकर 23,953.15 के स्तर पर ट्रेड करता दिखाई दिया। बाजार में गिरावट का असर व्यापक सूचकांकों पर भी देखा गया।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
बाजार में बिकवाली केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.41 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों ने व्यापक स्तर पर मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। विश्लेषकों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं और ऊंचे स्तरों पर लाभ बुक कर रहे हैं। इसके चलते बाजार में अस्थायी दबाव देखने को मिल रहा है।
आईटी सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट
शुक्रवार के कारोबार में सबसे अधिक नुकसान आईटी कंपनियों के शेयरों में देखा गया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जिसने पूरे बाजार की धारणा को प्रभावित किया। निफ्टी 50 में शामिल प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इंफोसिस के शेयर 7.7 प्रतिशत तक टूटे, जबकि टीसीएस में 5.6 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 5.08 प्रतिशत, एचसीएल टेक में 4.9 प्रतिशत और विप्रो में 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ये सभी शेयर दिन के शुरुआती कारोबार में टॉप लूजर्स की सूची में शामिल रहे।
इन सेक्टरों में भी दिखा दबाव
आईटी के अलावा रियल्टी, फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, मेटल और ऑटो सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.01 प्रतिशत, फाइनेंशियल सर्विसेज 0.62 प्रतिशत, प्राइवेट बैंक 0.50 प्रतिशत, मेटल 0.42 प्रतिशत और ऑटो इंडेक्स 0.41 प्रतिशत नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत रहे और इनमें सीमित खरीदारी देखने को मिली।
चुनिंदा शेयरों में बनी रही मजबूती
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जहां एक तरफ अधिकांश सेक्टर दबाव में रहे, वहीं कुछ दिग्गज शेयरों ने बाजार को आंशिक सहारा दिया। एनटीपीसी, अदाणी एंटरप्राइजेज, अपोलो हॉस्पिटल्स, ग्रासिम, भारती एयरटेल, ट्रेंट और टाइटन के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। इन शेयरों में निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को और गहरा होने से कुछ हद तक रोका।
एक्सेंचर की गाइडेंस कटौती का असर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक आईटी सेवा कंपनी एक्सेंचर द्वारा अपने कारोबारी अनुमान (गाइडेंस) में कटौती किए जाने का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा है। एक्सेंचर के एडीआर में आई कमजोरी के बाद निवेशकों ने भारतीय आईटी शेयरों में भी बिकवाली शुरू कर दी। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में आईटी सेक्टर पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि कई कंपनियों के आकर्षक वैल्यूएशन को देखते हुए निचले स्तरों पर खरीदारी भी लौट सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में राहत, बैंकिंग सेक्टर पर नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की दीर्घकालिक तस्वीर अभी भी सकारात्मक बनी हुई है। बेहतर होते मैक्रोइकॉनॉमिक संकेतक और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत है। अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने लगी है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड 78.83 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 75.78 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया। साथ ही एफआईआई की शॉर्ट कवरिंग के कारण बैंकिंग शेयरों में आगे भी मजबूती की संभावना जताई जा रही है।
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