Gold Silver Rate Today: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा नीतिगत फैसले और अमेरिका-ईरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते का असर गुरुवार को भारतीय कमोडिटी बाजार में साफ दिखाई दिया। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर चांदी में सबसे बड़ी कमजोरी देखने को मिली, जहां इसके भाव 2.5 प्रतिशत से अधिक टूट गए।
विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव में कमी और अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा भविष्य में ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने के संकेतों ने निवेशकों को कीमती धातुओं से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया। यही वजह रही कि कारोबारी सत्र के दौरान सोना और चांदी दोनों दबाव में कारोबार करते रहे।
एमसीएक्स सिल्वर जुलाई फ्यूचर्स की शुरुआत गुरुवार को 2,48,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर हुई थी, लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ ही इसमें तेज गिरावट देखने को मिली। चांदी अपने पिछले बंद 2,51,807 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2.5 प्रतिशत से अधिक फिसलकर 2,44,495 रुपये प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई। खबर लिखे जाने तक जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 7,057 रुपये यानी 2.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,44,750 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। यह गिरावट हाल के दिनों में चांदी में देखी गई सबसे बड़ी एकदिनी कमजोरियों में से एक मानी जा रही है। कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं में कमी आने से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों से मुनाफावसूली शुरू कर दी है, जिसका सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ा।
चांदी के साथ-साथ सोने में भी दबाव देखने को मिला। एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव 2,378 रुपये यानी 1.55 प्रतिशत टूटकर 1,51,501 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सोना अपने पिछले बंद 1,53,879 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1.64 प्रतिशत गिरकर 1,51,348 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। निवेशकों ने फेडरल रिजर्व के भविष्य के संकेतों को देखते हुए सोने में भी बिकवाली की। विशेषज्ञों का कहना है कि जब ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना होती है, तब सोने की मांग प्रभावित होती है क्योंकि यह कोई ब्याज या नियमित रिटर्न नहीं देता। ऐसे में निवेशक अन्य परिसंपत्तियों की ओर रुख करने लगते हैं।
कीमती धातुओं में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता माना जा रहा है। लंबे समय से चले आ रहे तनाव में कमी आने से वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस घटनाक्रम के बाद ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं में कमी आई और वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल बना। आमतौर पर जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो निवेशक सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भागते हैं। लेकिन तनाव कम होने पर इन धातुओं की मांग घटने लगती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी ताजा बैठक में लगातार चौथी बार बेंचमार्क ब्याज दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखने का फैसला किया। हालांकि केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि वर्ष के अंत तक मौद्रिक नीति को और सख्त किया जा सकता है। फेड के इस रुख ने बाजार में यह धारणा मजबूत कर दी है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है। इससे डॉलर को मजबूती मिलती है और सोना-चांदी जैसी गैर-ब्याज वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ जाता है। विश्लेषकों का कहना है कि ऊंची ब्याज दरें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो कीमती धातुओं में निवेश का आकर्षण कम हो सकता है। यही कारण है कि फेड के बयान के बाद वैश्विक बाजारों में भी सोना और चांदी कमजोर नजर आए।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में सोना और चांदी की दिशा काफी हद तक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर इंडेक्स और ब्याज दरों को लेकर फेड की अगली रणनीति पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव में और कमी आती है तथा ब्याज दरों के ऊंचे रहने के संकेत मिलते हैं तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि किसी भी नए भू-राजनीतिक घटनाक्रम या आर्थिक अनिश्चितता की स्थिति में सोना और चांदी फिर से सुरक्षित निवेश के रूप में मांग हासिल कर सकते हैं।
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